एथेंस के पास सालामिना द्वीप पर भड़की भीषण आग, 2 की मौत के बाद समुद्र के रास्ते रेस्क्यू ऑपरेशन शुरूतेजस्वी प्रकाश संग पुरानी अनबन पर सुरभि चंदना ने तोड़ी चुप्पी, रिश्ते और पेशेवर एकता पर कही बड़ी बातअंबेडकरनगर में IPS अधिकारी की 94 वर्षीय मां की संदिग्ध मौत पर अखिलेश यादव ने राज्य सरकार को घेरादुनिया के कई देशों में बोतलबंद पानी से भी सस्ती क्यों मिलती है बीयर, जानिए वजह और कतर जैसा उलटा हालखतरों के खिलाड़ी 15 के सेट पर पानी-हवा वाले स्टंट के दौरान जैस्मिन भसीन को लगा सिर में झटका, कंकशन की वजह से कुछ समय के लिए खो बैठीं याददाश्तहोर्मुज की खाड़ी में 75 दिन मौत के साये में बिताकर लौटे कैप्टन रमन कपूर, मर्चेंट नेवी के नाविकों की सुरक्षा पर उठाई आवाजस्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद सियासी घमासान: पी. चिदंबरम की टिप्पणी पर रविशंकर प्रसाद का करारा हमलागुवाहाटी और आसपास के इलाकों में 17 अगस्त तक भारी बारिश की चेतावनी, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्टNTA का बड़ा फैसला: UGC NET जून 2026 के तीन विषयों की पुन: परीक्षा सितंबर में, देखें पूरा शेड्यूलराजस्थान के 15 जिलों में 5,755 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत, अमित शाह और भजनलाल शर्मा ने निंबाहेड़ा से दिया तोहफा
गणेश जी के 13 रूप, हर महीने अलग नाम से होती है संकष्टी चतुर्थी की पूजाधर्म
2 जुल॰ 2026, 11:24 pm (45 दिन पहले)· 2

गणेश जी के 13 रूप, हर महीने अलग नाम से होती है संकष्टी चतुर्थी की पूजा

हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखे जाने वाले संकष्टी चतुर्थी व्रत का नाम हर बार बदल जाता है, क्योंकि यह गणेश जी के अलग-अलग स्वरूपों से जुड़ा है। जानिए साल भर में आने वाली सभी 13 संकष्टी चतुर्थी के नाम और उनका महत्व।

हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणपति बप्पा की पूजा के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि हर महीने इस व्रत का नाम बदल जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यह व्रत रखने और विधि-विधान से गणेश जी की आराधना करने से बड़ी से बड़ी मुश्किलें दूर हो जाती हैं और साथ ही आध्यात्मिक लाभ भी मिलता है। आखिर हर महीने आने वाली इस चतुर्थी का नाम अलग क्यों होता है, आइए इसकी वजह जानते हैं।

क्या है संकष्टी चतुर्थी व्रत

संकष्टी चतुर्थी गणेश जी को समर्पित एक मासिक व्रत है, जिसे हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर रखा जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन पूरी श्रद्धा और सही विधि से गणपति की पूजा और व्रत करने वालों के जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। इसके साथ ही घर में सुख, समृद्धि और बुद्धि का आशीर्वाद भी बना रहता है।

ये भी पढ़ें

संकष्टी शब्द का असल मतलब क्या है

संकष्टी मूलतः संस्कृत भाषा से निकला शब्द है। इसमें संकट का मतलब कठिनाई या मुसीबत होता है, जबकि चतुर्थी का मतलब चंद्र मास के हिसाब से चौथा दिन होता है। इसी वजह से इस तिथि को एक ऐसे खास और पावन मौके के तौर पर देखा जाता है, जिस दिन गणेश जी की पूजा करने से जीवन के संकट खुद ब खुद दूर होने लगते हैं।

हर महीने नाम क्यों बदल जाता है

यह व्रत हर महीने एक ही तिथि, यानी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को ही आता है, लेकिन हर बार इसका नाम अलग होता है। इसके पीछे की वजह भगवान गणेश के अलग-अलग स्वरूप बताए गए हैं। धार्मिक ग्रंथों में गणपति के कई दिव्य रूपों का जिक्र मिलता है और हर महीने की संकष्टी चतुर्थी को उन्हीं में से किसी एक स्वरूप के नाम से जाना जाता है।

धर्मग्रंथों में क्या मिलता है जिक्र

धार्मिक मान्यताओं की मानें तो भविष्य पुराण और नरसिंह पुराण जैसे ग्रंथों में साल भर आने वाली हर संकष्टी चतुर्थी के महत्व के बारे में बताया गया है। अधिक मास को मिलाकर साल में कुल 13 संकष्टी चतुर्थी पड़ती हैं और इनमें से हर एक का नाता बप्पा के किसी न किसी अलग रूप से जुड़ा है। यानी संकष्टी चतुर्थी के बदलते नाम सिर्फ परंपरा भर नहीं हैं, बल्कि ये गणेश जी के अलग-अलग स्वरूपों और उनके खास गुणों की याद भी दिलाते हैं।

जानिए किस महीने में कौन सी संकष्टी चतुर्थी

  • चैत्र मास: विकट संकष्टी चतुर्थी
  • वैशाख मास: एकदंत संकष्टी चतुर्थी
  • ज्येष्ठ मास: कृष्ण पिंगला संकष्टी चतुर्थी
  • आषाढ़ मास: गजानन संकष्टी चतुर्थी
  • श्रावण मास: हेरम्बा संकष्टी चतुर्थी
  • भाद्रपद मास: विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी
  • आश्विन मास: वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी
  • कार्तिक मास: गणाधीपा संकष्टी चतुर्थी
  • मार्गशीर्ष मास: अखुरथ संकष्टी चतुर्थी
  • पौष मास: लंबोदर संकष्टी चतुर्थी
  • माघ मास: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी
  • फाल्गुन मास: बालचंद्र संकष्टी चतुर्थी
  • अधिक मास: विभुवन संकष्टी चतुर्थी

यहां दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है, इसका कोई वैज्ञानिक आधार या प्रमाण नहीं है।

सवाल-जवाब

संकष्टी चतुर्थी व्रत किसे समर्पित है?
यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है और हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर रखा जाता है।
संकष्टी चतुर्थी का नाम हर महीने क्यों बदलता है?
हर महीने की संकष्टी चतुर्थी गणेश जी के किसी एक अलग दिव्य स्वरूप से जुड़ी होती है, इसलिए हर बार व्रत का नाम अलग होता है।
संकष्टी शब्द का मतलब क्या है?
यह संस्कृत शब्द है, जिसमें संकट का अर्थ कठिनाई और चतुर्थी का अर्थ चंद्र मास का चौथा दिन होता है।
साल में कुल कितनी संकष्टी चतुर्थी होती हैं?
अधिक मास को मिलाकर साल में कुल 13 संकष्टी चतुर्थी होती हैं, जिनमें से हर एक का नाम अलग है।
संकष्टी चतुर्थी के नामों का उल्लेख किन ग्रंथों में मिलता है?
भविष्य पुराण और नरसिंह पुराण जैसे धर्मग्रंथों में साल भर आने वाली सभी संकष्टी चतुर्थी के महत्व का वर्णन मिलता है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने से क्या लाभ मिलता है?
मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख, समृद्धि व बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR