हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में कई ऐसे भावुक गीत रचे गए जिन्होंने परदे पर इंसानी बेबसी और किस्मत के दर्द को बेहद संजीदगी से उतारा। साल 1994 में रिलीज हुई फिल्म साजन का घर का लोकप्रिय गीत रब ने भी मुझ पे सितम ऐसा ही एक यादगार नग्मा है। यह गीत कहानी के एक बेहद नाजुक और भावुक मोड़ पर आता है, जहां जूही चावला का किरदार अपनी तकदीर और पारिवारिक परिस्थितियों के सामने पूरी तरह लाचार दिखाई देता है।
समीर के संवेदनशील बोल और अलका याग्निक का सुर
इस गीत के प्रभाव की सबसे बड़ी ताकत गीतकार समीर के लिखे अल्फाज हैं। उन्होंने एक बेबस महिला के जीवन की पीड़ा और तकदीर के थपेड़ों को बहुत सीधे और असरदार शब्दों में ढाला है। गायिका अलका याग्निक ने अपने गायन में दर्द और लाचारी के भाव को जिस गहराई से पिरोया है, वह सीधे सुनने वालों के दिलों पर दस्तक देता है। उनकी आवाज की कशिश हर अंतरे के साथ किरदार के अंतर्द्वंद्व को जीवंत कर देती है।
नदीम-श्रवण का दिल को छूने वाला संगीत संयोजन
नब्बे के दशक की मशहूर संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण ने इस भावुक रचना की धुन तैयार की थी। उन्होंने गाने के दर्द को उभारने के लिए बहुत ही संतुलित और भावनात्मक वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल किया। मद्धम गति की यह धुन समीर के शब्दों और अलका याग्निक की गायकी के साथ मिलकर एक गहरा असर पैदा करती है, जिसकी वजह से दशकों बाद भी यह गीत पुराने गानों के शौकीनों की पसंदीदा सूची में बना हुआ है।


















