वाराणसी की तंग गलियों में महादेव का एक ऐसा गुप्त धाम है, जहां भक्त गर्भगृह के भीतर कभी प्रवेश नहीं कर पाते, बल्कि करीब एक फीट चौड़े एक छेद से झांककर ही अपने आराध्य के दर्शन करते हैं। चौक इलाके की शीतला गली में बसा यह शिवधाम इतना गोपनीय है कि सावन के पूरे पवित्र महीने में भी यहां भक्तों को भीतर जाने की इजाजत नहीं दी जाती।
जमीन से 40 फीट नीचे विराजते हैं पिता महेश्वर
यह शिवलिंग जमीन की सतह से करीब 40 फीट नीचे स्थापित है और स्थानीय लोग इन्हें पिता महेश्वर के नाम से पुकारते हैं। स्कंद पुराण के काशी खंड में भी इस स्थान की महिमा का जिक्र मिलता है। कहा जाता है कि यहां महादेव का तेज इतना प्रचंड है कि उनके सामने सीधे खड़ा हो पाना भी आसान नहीं, यही वजह मानी जाती है कि साल के 365 दिनों में महज दो मौकों पर ही भक्तों को गर्भगृह तक जाने का सौभाग्य मिलता है, वह भी महाशिवरात्रि और रंगभरी एकादशी के दिन।
बाबा विश्वनाथ धाम से एक किलोमीटर दूर, गलियों के बीच छिपा मंदिर
यह गुप्त शिवधाम बाबा विश्वनाथ मंदिर से महज करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, लेकिन इसके चारों तरफ आम घर बसे हैं जहां लोग रोजमर्रा की जिंदगी जीते हैं। मंदिर के पुजारी हर दिन नियम से महादेव की आरती और अभिषेक करते हैं, इसके बाद वे गर्भगृह से बाहर निकल आते हैं। इसके बाद ही आम भक्तों की बारी आती है, जो सिर्फ उसी छोटे छेद से पिता महेश्वर का दर्शन पूजन कर पाते हैं।
महंत परिवार का दावा, काशी के स्वयंभू शिवलिंगों में से एक
मंदिर के महंत परिवार से जुड़े अंकित मिश्रा के मुताबिक पिता महेश्वर का यह चमत्कारिक शिवलिंग काशी के स्वयंभू शिवलिंगों में गिना जाता है और यह धाम काफी प्राचीन है। उनका कहना है कि जिस भक्त को इस जगह की जानकारी नहीं है, वह यहां पहुंचने के बाद भी इस शिवलिंग को ढूंढते रह जाता है, इतनी सामान्य और गुमनाम दिखती है इसकी बनावट।
कार्तिकेय ने की थी स्थापना, तप के बाद रखा नाम
पौराणिक कथाओं के अनुसार महादेव की प्रिय नगरी काशी में इस शिवलिंग की स्थापना उनके बड़े पुत्र भगवान कार्तिकेय ने की थी। कार्तिकेय ने यहीं जप और तप भी किया और अपने पिता महेश्वर के नाम पर ही इस शिवलिंग का नामकरण किया। इसका उल्लेख काशी खंड में भी मिलता है, जिससे इस स्थान की प्राचीनता और भी पुख्ता होती है।
पितृ दोष से मुक्ति की मान्यता
धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से पिता महेश्वर का दर्शन, पूजन और जलाभिषेक करता है, उसे इनके दर्शन मात्र के प्रभाव से पितृ दोष से मुक्ति मिल जाती है। यही आस्था भक्तों को तंग गलियों से होते हुए महादेव के इस गुप्त धाम तक खींच लाती है।
कैसे पहुंचें पिता महेश्वर के गुप्त धाम तक
पिता महेश्वर का यह मंदिर शीतला गली में स्थित है और चौक की तंग गलियों से होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा महाश्मशान मणिकर्णिका के आगे स्थित सिंधिया घाट की सीढ़ियां चढ़कर भी गलियों के सहारे इस गुप्त धाम तक पहुंचा जा सकता है। हालांकि रास्ता इतना उलझा हुआ है कि मंदिर तक पहुंचने के लिए स्थानीय लोगों से पूछना लगभग जरूरी हो जाता है।
सुबह और रात, दोनों वक्त होती है आरती
मंदिर के पुजारियों के मुताबिक पिता महेश्वर के इस धाम में सुबह और रात, दोनों समय आरती की जाती है। रात की आरती के बाद बाबा का कपाट बंद कर दिया जाता है। सावन के पवित्र महीने में काशी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पिता महेश्वर के इस दर्शन को न चूकने की सलाह दी जाती है।



















