सनातन परंपरा में किसी भी नए भवन में निवास आरंभ करने से पूर्व काल गणना, पंचांग शुद्धि और ग्रह नक्षत्रों की स्थिति का आकलन अनिवार्य माना गया है। व्यक्ति जीवन भर की संचित पूंजी और निरंतर परिश्रम से अपने आशियाने का निर्माण करता है। ऐसे में गृह प्रवेश जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार को शास्त्रोक्त विधि और शुभ मुहूर्त में संपन्न करना परिवार के लिए दीर्घकालिक सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। उचित वेला में अनुष्ठान करने से नवनिर्मित परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का निरंतर प्रवाह बना रहता है तथा विघ्नकारी और नकारात्मक प्रभाव स्वतः दूर रहते हैं।
फाल्गुन मास का ज्योतिषीय महत्व और गृह प्रवेश
धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणना के दृष्टिकोण से वर्तमान में जारी फाल्गुन का पवित्र महीना गृह प्रवेश अनुष्ठान हेतु बेहद कल्याणकारी माना गया है। शास्त्रों में वर्णित व्यवस्था के अनुसार इस अवधि के दौरान देवगुरु बृहस्पति और दैत्यगुरु शुक्र दोनों ही ग्रह आकाश मंडल में उदित अवस्था में गोचर करते हैं। देवगुरु बृहस्पति ज्ञान, धार्मिक चेतना, बुद्धि और स्थायित्व के अधिष्ठाता ग्रह माने जाते हैं। वहीं दूसरी ओर शुक्र ग्रह भौतिक सुख, ऐश्वर्य, समृद्धि और पारिवारिक वैभव के कारक हैं। जब यह दोनों प्रमुख शुभ ग्रह पूर्ण रूप से उदित और सशक्त स्थिति में होते हैं, तब इनके संयुक्त प्रभाव से किसी भी नए गृह में किया गया मंगल प्रवेश अत्यंत फलदायी सिद्ध होता है।
सूर्य की स्थिति और स्थिर लग्न का विधान
देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के सुप्रसिद्ध तीर्थ पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी के अनुसार, जब सूर्य देव किसी स्थिर राशि अथवा स्थिर लग्न में विराजमान होते हैं, तभी गृह प्रवेश का अनुष्ठान करना शास्त्रों के अनुकूल बैठता है। वैदिक ज्योतिष में कुंभ राशि और वृषभ राशि को स्थिर राशि का दर्जा प्राप्त है। सूर्य जब कुंभ राशि में संचरण करते हैं, तो फाल्गुन मास का पावन काल आरंभ होता है, जिसे शास्त्रों में परम शुभ वेला के रूप में मान्यता दी गई है।
तीर्थ पुरोहित ने इस संदर्भ में दिशा और ग्रहों के योग का भी उल्लेख किया। गृह प्रवेश के निर्धारित समय पर सूर्य का बाईं दिशा में स्थित होना और राहु का पृष्ठ भाग यानी पीछे होना अत्यंत मंगलकारी संकेत माना जाता है। इस प्रकार की विशिष्ट खगोलीय और ज्योतिषीय अनुकूलता फाल्गुन मास में विशेष रूप से निर्मित होती है। इसी दिव्य संयोग के कारण मनीषियों ने गृह प्रवेश संस्कार के लिए फाल्गुन मास को सर्वश्रेष्ठ समय घोषित किया है। इस अनुकूल कालावधि में विधिवत किया गया गृह प्रवेश परिवार के समस्त सदस्यों के जीवन में कल्याण, शांति और वैभव का संचार करता है।
फाल्गुन माह में गृह प्रवेश के लिए प्रशस्त तिथियां
शास्त्रसम्मत नियमों के आधार पर फाल्गुन माह में नवीन भवन में कदम रखने के लिए 06, 19, 20, 21, 26 और 27 तारीखें विशेष रूप से उत्तम मानी गई हैं। इन चुनिंदा तारीखों में गृह प्रवेश संस्कार आयोजित करने से भवन निर्माण के समय उत्पन्न हुए वास्तु दोषों का दुष्प्रभाव काफी हद तक निष्प्रभावी हो जाता है। साथ ही घर के भीतरी वातावरण में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचरण तीव्र गति से होने लगता है।
इन तिथियों और वारों में सर्वथा वर्जित है प्रवेश
शास्त्रों में कुछ विशिष्ट तिथियों, वारों और महीनों में नए घर में प्रवेश करने पर कड़ा निषेध लगाया गया है। पंचांग के अनुसार चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और पूर्णिमा तिथियों को रिक्ता तिथि तथा निषिद्ध काल की श्रेणी में रखा जाता है, इसलिए इनमें गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए। साप्ताहिक दिनों की बात करें तो मंगलवार, शनिवार और रविवार के दिन भी नए घर में गृह प्रवेश करने से परहेज करने की स्पष्ट हिदायत दी गई है।
इसके अतिरिक्त वार्षिक कालचक्र में आषाढ़, सावन, भाद्रपद, आश्विन, पौष और होलाष्टक की पूरी अवधि के दौरान भी किसी भी प्रकार का गृह प्रवेश सर्वथा वर्जित बताया गया है। यदि कोई गृहस्वामी नए आवास में निवास की योजना बना रहा है, तो उसे इन वर्जित अवधियों से बचते हुए फाल्गुन जैसे अति शुभ मास और शास्त्रसम्मत तिथियों का चयन कर अपने नवीन गृहस्थ जीवन की नींव रखनी चाहिए।


















