झारखंड के कोडरमा जिले के जयनगर प्रखंड में स्थित खरियोडीह बाबा धाम इन दिनों आसपास के इलाकों के श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था और भक्ति का मुख्य केंद्र बना हुआ है। पवित्र सावन महीने के दौरान यहां भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए दूरदराज के क्षेत्रों से भक्त बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। उत्तरवाहिनी नदी के तट पर बसे इस ऐतिहासिक मंदिर की अपनी एक अलग महिमा है, जहां ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है और इसी वजह से पूरे सावन यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।
करीब एक सदी पुराना है इस प्राचीन मंदिर का इतिहास
इस पवित्र धाम से जुड़ी हुई आस्था और स्थापना की कहानी करीब सौ साल पुरानी है। मंदिर के पुजारी अजीत पांडेय ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि गांव के ही बद्री भगत को एक बार रात में सपना आया था कि उत्तरवाहिनी नदी के किनारे एक दिव्य शिवलिंग मौजूद है। उस सपने में उन्हें निर्देश मिला था कि उस शिवलिंग को वहां से ससम्मान उठाकर उचित विधि-विधान के साथ स्थापित किया जाना चाहिए।
इसके बाद इस बात की चर्चा पूरे गांव में फैली और सभी ग्रामीणों ने मिलकर इस पर विचार किया। पुजारी अजीत पांडे के मुताबिक, उनके दादा बैजनाथ पाण्डेय ने लगभग एक सदी पहले तमाम धार्मिक अनुष्ठानों और विधि-विधान के साथ उस शिवलिंग को मंदिर परिसर में स्थापित करवाया था। तभी से यह पावन स्थल धीरे-धीरे इलाके के लोगों की आस्था का एक बेहद खास और पवित्र केंद्र बन गया है।
मन्नत पूरी होने पर नदी से मंदिर तक दंडवत करते हैं भक्त
यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की भक्ति और निष्ठा देखने लायक होती है। पुजारी अजीत पांडेय का कहना है कि जो भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव के दरबार में अपनी अर्जी लगाता है, उसकी मुराद अवश्य पूरी होती है। मनोकामना पूर्ण होने के बाद श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और संकल्प के अनुसार विशेष पूजा-पाठ और रुद्राभिषेक का आयोजन कराते हैं।
सावन के पावन दिनों में यहाँ का दृश्य काफी अनूठा होता है। कई भक्त भगवान शिव को नारियल अर्पित करते हैं, तो वहीं कई श्रद्धालु उत्तरवाहिनी नदी में पवित्र स्नान करने के बाद जमीन पर दंडवत प्रणाम करते हुए मंदिर परिसर तक का सफर तय करते हैं। मंदिर पहुँचकर वे भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।
शिवलिंग के साथ अन्य देवी-देवताओं के दर्शन और मंदिर की खुली छत की खासियत
खरियोडीह बाबा धाम के इस मंदिर परिसर में केवल भगवान शिव का शिवलिंग ही नहीं है, बल्कि इसके अलावा माता पार्वती और भगवान हनुमान जी के मंदिर भी स्थापित किए गए हैं। सावन के पूरे महीने में श्रद्धालु केवल शिव जी ही नहीं, बल्कि इन सभी देवी-देवताओं की भी विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इस पूरे धार्मिक परिवेश और भारी जनसमूह के कारण मंदिर का पूरा प्रांगण हमेशा भक्तिमय और ऊर्जा से ओत-प्रोत रहता है।
इस मंदिर की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता इसके गर्भगृह की छत का खुला होना है। जहाँ भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित किया गया है, उस हिस्से की छत को पूरी तरह ढका नहीं गया है बल्कि उसे खुला छोड़ा गया है। पुजारी अजीत पांडे ने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि मंदिर के निर्माण के दौरान निर्माणकर्ता को फिर से एक स्वप्न आया था कि इस ऊपरी हिस्से को हमेशा खुला रखा जाए। उस समय से लेकर आज तक किसी ने भी इस हिस्से को बंद करने की कोशिश नहीं की। यह अनूठी परंपरा और रहस्य आज भी श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था का विषय बनी हुई है।



















