धर्मेंद्र और रेखा का वो सदाबहार सावन गीत, जिसने चार दशकों से दिलों पर किया है राजअमेरिकी डॉलर पर मंडराया डिबेसमेंट का खतरा, अमेरिकी ट्रेजरी की चाल और ईरान प्रतिबंधों पर टिकी निवेशकों की नजरकोडरमा का अनोखा खरियोडीह बाबा धाम, जहां मन्नत पूरी होने पर दंडवत चलते हैं भक्त और आज भी खुली है मंदिर की छतइंडोनेशिया के वन्यजीव संरक्षण को मिला वनतारा का साथ, जकार्ता में हुआ ऐतिहासिक ऐलानघर बैठे ऐसे रद्द करें रेलवे काउंटर टिकट, जानिए रिफंड पाने का पूरा नियममलेशिया से डिपोर्ट किए गए बंबीहा गैंग के 3 खतरनाक गुर्गों को पंजाब पुलिस ने दबोचाऐल्फा रिव्यू (2025): थिएटर में फ्लॉप होने के बाद अब घर बैठे नेटफ्लिक्स पर देखिए आलिया भट्ट और शरवरी वाघ की स्पाई थ्रिलरउदयपुर का लखारा चौक: जहां कभी मेवाड़ की रानियां खरीदती थीं लाख की चूड़ियांरूसी ऑनलाइन रिटेलर ओजोन के गोदामों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों से भारी तबाही, शेयरों में बड़ी गिरावटगोल्ड में जोरदार तेजी जारी, लेकिन ओवरबॉट आरएसआई दे रहा सुस्ती का संकेत
उदयपुर में सावन के आखिरी सोमवार पर निकली महाकाल की शाही सवारी, 50 से अधिक झांकियों के साथ उमड़ी भारी भीड़धर्म
24 अग॰ 2026, 3:26 pm (1 घंटे पहले)· 2

उदयपुर में सावन के आखिरी सोमवार पर निकली महाकाल की शाही सवारी, 50 से अधिक झांकियों के साथ उमड़ी भारी भीड़

उदयपुर में सावन के अंतिम सोमवार पर भगवान महाकाल की भव्य सवारी निकाली गई जिसमें 50 से अधिक झांकियां शामिल हुईं और हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़े।

उदयपुर शहर में सावन मास के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर भगवान महाकाल की एक अत्यंत भव्य और आकर्षक शाही सवारी निकाली गई। परंपरा के अनुसार इस बार भी महादेव नगर भ्रमण पर निकले, जिन्हें निहारने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए सड़कों पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया। सावन के इस आखिरी सोमवार को लेकर स्थानीय भक्तों में जबरदस्त उत्साह और उमंग का माहौल देखा गया, जो सुबह से ही प्रमुख मार्गों पर जमा हो गए थे।

शहरी परंपरा के मुताबिक उदयपुर में सावन के चारों सोमवार को भगवान शिव से जुड़े विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और आयोजन किए जाते हैं। सावन के पहले सोमवार को मंदिर परिसर में ही भगवान की विशेष परिक्रमा कराई जाती है, जबकि दूसरे सोमवार को महादेव को वन भ्रमण कराया जाता है। इसके पश्चात, तीसरे सोमवार के दिन भगवान को प्रसिद्ध फतेहसागर झील ले जाया जाता है जहां जल विहार का आयोजन होता है। और अंत में, सावन के आखिरी सोमवार को महादेव की यह विशाल सवारी निकाली जाती है जो शहर के तमाम प्रमुख रास्तों से होकर गुजरती है।

ये भी पढ़ें

महाकाल मंदिर से शुरू होकर मुख्य मार्गों से गुजरी यात्रा

यह भव्य यात्रा महाकाल मंदिर से आरंभ हुई। सबसे पहले मंदिर के गर्भगृह में विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न हुई, जिसके बाद भगवान महाकाल की पालकी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। तय रूट के अनुसार यह सवारी चेतक सर्कल, हाथीपोल और जगदीश चौक जैसे शहर के व्यस्त और प्रमुख मार्गों से गुजरी। मार्ग में हर जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर और आरती उतारकर भगवान महाकाल का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके दर्शन का लाभ उठाया। पूरी परिक्रमा के बाद यह सवारी वापस महाकाल मंदिर लौट आई।

इस धार्मिक यात्रा के दौरान पूरा शहर शिवमय वातावरण में रंग गया। हवा में लगातार ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के गूंजते जयकारों से पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। हर वर्ष की भांति इस बार भी इस विशेष सवारी में बड़ी संख्या में मनमोहक झांकियों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन में करीब 50 से ज्यादा झांकियां शामिल हुईं जिन्होंने सभी का ध्यान खींचा। इन झांकियों के माध्यम से विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश भी दिए गए, जिन्हें देखने के लिए शहर के कोने-कोने से लोग पहुंचे थे।

उदयपुर की परंपरा और सावन के आयोजनों का महत्व

उदयपुर में महाकाल की यह वार्षिक सवारी अब शहर के सबसे बड़े और प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शुमार हो चुकी है। जिस प्रकार मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में सावन के दौरान महाकाल की सवारी निकाली जाती है, उसी ऐतिहासिक तर्ज पर उदयपुर में भी इस गौरवशाली परंपरा को पूरी श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह के साथ निभाया जा रहा है। सावन के चारों सोमवार के अलग-अलग चरणों और आयोजनों को पूरा करने के बाद, अंतिम सोमवार की यह विशाल सवारी हर साल श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र बनती है।

सवाल-जवाब

उदयपुर में महाकाल की शाही सवारी किस अवसर पर निकाली गई?
यह भव्य सवारी सावन मास के अंतिम सोमवार के अवसर पर निकाली गई।
इस सवारी में कितनी झांकियां शामिल थीं?
सावन के अंतिम सोमवार की इस यात्रा में 50 से ज्यादा झांकियां शामिल हुईं।
सवारी शहर के किन प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी?
यह सवारी चेतक सर्कल, हाथीपोल और जगदीश चौक सहित शहर के मुख्य मार्गों से गुजरी।
सावन के तीसरे सोमवार को उदयपुर में क्या आयोजन होता है?
सावन के तीसरे सोमवार को भगवान को फतेहसागर झील में जल विहार कराया जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR