सस्ते कबाड़ के झांसे में 9 लाख की डकैती, 12 जिलों में 1300 किमी पीछा कर दबोचे गए 7 बदमाशपितृ पक्ष में लोहे के बर्तनों और दान से क्यों बचना चाहिए, जानिए धार्मिक कारणसपोटरा के गज्जूपुरा में राज्य स्तरीय खो-खो टूर्नामेंट का आगाज, 86 टीमों की 1032 छात्राएं दिखाएंगी दमउत्तर भारत से मानसून की विदाई तेज, पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में भारी बारिश का अलर्टअजमेर में बस चालक से मारपीट पर रोडवेज कर्मियों का फूटा गुस्सा, अंबेडकर सर्किल पर बसें रोक लगाया जामशारदीय नवरात्र से पूर्व उत्तराभाद्रपद में शनि का प्रवेश, सप्तम भाव के गोचर से साझेदारी और कारोबार पर असरबालाघाट में रहस्यमयी बीमारी के बाद हरकत में प्रशासन, 50 गांवों में 43 हजार से अधिक लोगों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षणवोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के नियमों में बदलाव, कई राज्यों में फॉर्म-6 से हटी एसआईआर घोषणापंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अमरिंदर सिंह राजा वारिंग की हो सकती है छुट्टी, विजय इंदर सिंगला सबसे आगेदीपावली पर पटाखों पर नहीं लगेगा पूर्ण प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट तलाशेगा आस्था और सेहत के बीच संतुलन
क्या जिनकी बरसी नहीं हुई, उनका भी कर सकते हैं पितृपक्ष में श्राद्ध?धर्म
9 सित॰ 2026, 12:53 am (22 दिन पहले)· 2

क्या जिनकी बरसी नहीं हुई, उनका भी कर सकते हैं पितृपक्ष में श्राद्ध?

पितृपक्ष के दौरान क्या हाल ही में दुनिया छोड़ने वाले परिजनों का श्राद्ध किया जा सकता है, इसको लेकर धार्मिक नियमों में खास बातें बताई गई हैं। गरुड़ पुराण और शास्त्रों के मुताबिक अकाल मृत्यु और सामान्य निधन से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

सनातन परंपरा में पितृपक्ष का समय पूर्वजों को याद करने, उनका तर्पण करने और पिंडदान करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन दिनों में अपने पितरों का स्मरण करने से परिवार को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और मृत आत्माओं को मोक्ष तथा सद्गति की प्राप्ति होती है। हालांकि इसको लेकर लोगों के मन में अक्सर यह असमंजस रहता है कि जिन परिजनों की मृत्यु को अभी एक साल यानी बरसी का समय पूरा नहीं हुआ है, उनका श्राद्धकर्म इन दिनों में किया जाना चाहिए या नहीं। इस विषय पर शास्त्रों और धार्मिक ग्रंथों में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

एक साल पूरा होने से पहले कैसे करें श्राद्ध?

  • गरुड़ पुराण के अनुसार किसी भी व्यक्ति के देहांत के बाद परिवार के सदस्यों को तेरह दिनों के भीतर अंतिम संस्कार, पिंडदान और शांति पाठ की प्रक्रिया को पूरा करवा लेना चाहिए।
  • यदि किसी परिजन की मृत्यु को अभी एक वर्ष पूरा नहीं हुआ है और इस बीच पितृपक्ष आ जाता है, तो ऐसी स्थिति में परिजनों को केवल जल और काले तिल से तर्पण अर्पित करना चाहिए तथा उनका स्मरण करना चाहिए।
  • शास्त्रों के नियमों के अनुसार पिंडदान और मुख्य श्राद्ध कर्म हमेशा मृत्यु के एक साल बाद ही किया जाना उचित माना जाता है। बरसी का दिन बीत जाने के बाद ही परिवार के लोगों को निर्धारित तिथि पर विधिवत श्राद्ध करना चाहिए।
  • धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जब तक किसी व्यक्ति का पहला वार्षिक श्राद्ध या बरसी नहीं हो जाती, तब तक उसे विधिवत पितरों की श्रेणी में नहीं रखा जाता है। बरसी संपन्न होने के बाद हर साल उनकी पुण्यतिथि पर श्राद्ध करने से उनका आशीर्वाद सदैव बना रहता है।
  • यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से होगी और इनका समापन 10 अक्टूबर को होगा। इस पूरे पितृपक्ष का पूरा कैलेंडर देखकर सभी तिथियों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

अकाल मृत्यु के मामलों में क्या है विधान?

सामान्य निधन के विपरीत यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु अकाल हुई है या किसी दुर्घटना के कारण उसकी जान गई है, तो उसकी आत्मा की शांति के लिए विशेष रूप से नारायण बलि का अनुष्ठान करवाया जाना चाहिए। नारायण बलि के विधान से असमय दुनिया छोड़ने वाली आत्माओं को परम शांति मिलती है। जिन मामलों में अकाल मृत्यु का शिकार हुए व्यक्ति की सटीक मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती है, उनका श्राद्ध पितृपक्ष की अमावस्या तिथि के दिन किया जाना शास्त्रों में सही बताया गया है। धार्मिक मत के अनुसार अमावस्या के पावन दिन श्राद्ध अनुष्ठान संपन्न करने से सभी पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार को अपनी कृपा प्रदान करते हैं।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

क्या जिनकी मृत्यु को एक साल नहीं हुआ, उनका श्राद्ध कर सकते हैं?
नहीं, शास्त्रों के अनुसार मृत्यु के एक वर्ष बाद बरसी होने के बाद ही विधिवत रूप से मुख्य श्राद्ध और पिंडदान किया जाना चाहिए।
एक साल पूरा होने से पहले पितृपक्ष में क्या करना चाहिए?
यदि किसी की मृत्यु को एक वर्ष नहीं हुआ है, तो पितृपक्ष के दौरान केवल जल और काले तिल से तर्पण देकर उनका स्मरण करना चाहिए।
अकाल मृत्यु होने पर कौन सा अनुष्ठान करवाना चाहिए?
अकस्मात या दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए नारायण बलि का अनुष्ठान अवश्य करवाना चाहिए।
अकाल मृत्यु वाले व्यक्ति की तिथि ज्ञात न हो तो क्या करें?
यदि अकाल मृत्यु प्राप्त व्यक्ति की सही तिथि पता न हो, तो पितृपक्ष की अमावस्या तिथि के दिन उनका श्राद्ध करना चाहिए।
साल 2026 में पितृपक्ष कब से कब तक रहेंगे?
साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से होगी और इनका समापन 10 अक्टूबर को होगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp