ओडिशा के रायगढ़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध मां मझिघरियाणी मंदिर परिसर में उस समय एक भावुक कर देने वाला वाकया सामने आया, जब मंदिर की दान पेटियों (हुंडियों) की गिनती की जा रही थी। कड़ी सुरक्षा के बीच जब दान पात्रों को खोला गया तो उनमें भारी मात्रा में नकदी, कीमती सोने-चांदी के आभूषण और विदेशी मुद्रा बरामद हुई। हालांकि, नोटों और गहनों के इस विशाल ढेर के बीच गिनती में लगे कर्मचारियों और अधिकारियों का ध्यान करीब सात पन्नों के एक handwritten प्रार्थना पत्र ने अपनी ओर खींच लिया। यह पत्र केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं था, बल्कि इसमें एक परेशान भक्त की गहरी पीड़ा, कर्ज का बोझ, परिवार की चिंताएं और देवी के प्रति अटूट आस्था दर्ज थी।
कड़ी सुरक्षा के बीच 9 दान पेटियों से निकले 54 लाख रुपये
मां मझिघरियाणी मंदिर प्रशासन द्वारा सोमवार को कुल 9 दान पेटियों को खोलने की प्रक्रिया शुरू की गई। सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए इन सभी हुंडियों से निकले पैसों और आभूषणों को एकत्रित किया गया। दान में मिली भारी नकदी की पारदर्शी और सटीक गणना सुनिश्चित करने के लिए पूरी रकम को रायगढ़ा स्थित यूनियन बैंक की मुख्य शाखा में भेजा गया। बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा गिनती पूरी किए जाने के बाद कुल 54 लाख 15 हजार 902 रुपये की नकद धनराशि का आधिकारिक आंकड़ा सामने आया।
हुंडी से केवल भारतीय नोट ही नहीं, बल्कि बहुमूल्य धातुएं भी भारी मात्रा में निकलीं। आभूषणों की तौल करने पर कुल 64 ग्राम सोना और 1.764 किलोग्राम चांदी बरामद की गई। इसके अतिरिक्त, श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए विभिन्न मूल्यों के भारतीय नोटों का विस्तृत विवरण भी जारी किया गया है
- 500 रुपये के नोट: कुल 2,679 नोट
- 200 रुपये के नोट: कुल 1,488 नोट
- 100 रुपये के नोट: कुल 22,034 नोट
- 50 रुपये के नोट: कुल 14,806 नोट
- 20 रुपये के नोट: कुल 21,460 नोट
भारतीय मुद्रा के अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धालुओं की आस्था को दर्शाते हुए दान पेटियों से कई देशों के सिक्के और विदेशी करेंसी भी मिली। इनमें मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर, ओमानी रियाल, सऊदी रियाल और यूएई दिरहम शामिल रहे। मंदिर में इतनी बड़ी मात्रा में चढ़ावा निकलने की खबर से स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच काफी उत्सुकता देखी गई।
कोरापुट निवासी सुनील खरा की 7 पन्नों की चिट्ठी का सच
गिनती के दौरान मिले इस खजाने के बीच सबसे चर्चा का विषय सात पन्नों की वह चिट्ठी बनी, जो कोरापुट जिले के रहने वाले सुनील खरा नामक भक्त द्वारा लिखी गई थी। पत्र पर 20 अगस्त 2026 की तारीख अंकित थी। सुनील ने अपने पत्र में अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दौर और गहराते आर्थिक संकट का भावुक विवरण प्रस्तुत किया था। उसने पत्र में लिखा कि वह मौजूदा समय में अत्यधिक वित्तीय परेशानियों का सामना कर रहा है और उस पर भारी लेन-देन का दबाव है।
पत्र के अनुसार, सुनील पर लगभग 23 अलग-अलग लोगों का कर्ज बकाया है। उसने देवी मां के समक्ष अपना दुखड़ा रोते हुए प्रार्थना की कि उसे इतनी शक्ति, सही अवसर और आमदनी के साधन प्रदान किए जाएं जिससे वह एक-एक करके अपने सभी 23 देनदारों का पाई-पाई पैसा वापस कर सके और इस मानसिक तनाव से मुक्ति पा सके।
रोजगार, मकान की बिक्री और मां-भाई के कल्याण की गुहार
सात पन्नों के इस लंबे पत्र में भक्त की उम्मीद और संघर्ष साफ झलक रहा था। सुनील ने मां मझिघरियाणी से एक अच्छी नौकरी मिलने और अपने राजस्व में बढ़ोतरी होने की कामना की, ताकि वह सम्मानजनक जीवन जी सके। इसके अलावा, उसने अपने मकान की बिक्री से जुड़ी कागजी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक अड़चनों को बिना किसी बाधा के आसानी से पूरा होने के लिए भी मां से मदद मांगी।
पत्र की सबसे खास बात यह रही कि भक्त ने केवल अपनी आर्थिक तंगी की ही बात नहीं की, बल्कि अपने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अपनी मां और भाई के सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए भी देवी से आशीर्वाद मांगा। उसने अपने दिल से डर और असुरक्षा की भावना को दूर करने, जीवन में सही निर्णय लेने की सामर्थ्य विकसित करने और मन की शांति बनाए रखने के लिए मार्गदर्शन की याचना की। पत्र के अंतिम पृष्ठ पर उसने अपनी तमाम परेशानियों, असफलताओं और कर्जों का बोझ मां मझिघरियाणी के पावन चरणों में अर्पित करते हुए स्वयं को पूरी तरह देवी की शरण में सौंप दिया।



















