मध्य पूर्व तनाव से उबला कच्चा तेल, WTI क्रूड तीन हफ्तों के नए उच्च स्तर पर पहुंचाअमेरिकी ट्रेजरी की $4 Billion बॉन्ड बायबैक योजना से घटे Yields, यूबीएस ने बताए वित्तीय बाजार के मायनेभोजपुरी बवाल में एंकर के तीखे सवालों पर आम्रपाली दुबे का फूटा गुस्सा, निरहुआ से जुड़े रिश्ते पर दी चेतावनीउड़ानें रद्द होने पर पाकिस्तानियों से भेदभाव का आरोप, असद कैसर ने यूएई के रवैये पर संसद में उठाए सवालआंध्र प्रदेश में नितिन नवीन के भोजन पर छिड़ा विवाद, कांग्रेस के नॉनवेज दावों के बीच बीजेपी ने जारी की शाकाहारी व्यंजनों की सूचीबिहार के मिथिलांचल की पारंपरिक थाली की खास डिश घोरजौर, जानें 15 से 20 मिनट में खट्टी दही और मट्ठे से तैयार होने वाली नमकीन डिश की पूरी रेसिपीडीडीए के मास्टर प्लान 2047 को मंजूरी, भविष्य में एयर टैक्सी और जलमार्गों से आसान होगा दिल्ली का सफरचित्तौड़गढ़ के दोवानी में सो रहे व्यक्ति को कान के पास सांप ने डसा, अस्पताल में दम तोड़ा तो ग्रामीणों ने विषधर को मारालंदन मेटल एक्सचेंज में भंडार बढ़ने से तांबे की तंगी कुछ कम, लेकिन मजबूत हाजिर मांग से कीमतों को मिलेगा सहाराकॉमर्ज़बैंक का अनुमान: 5.25% पर स्थिर रहेगी आरबीआई की रेपो दर, $700 अरब के भंडार से मजबूत बना रुपया
पाली में स्थापित 850 वर्ष प्राचीन माता वचनादेह धाम, जानिए सती के पावन बोल से नामकरण की अनोखी कहानीधर्म
20 अग॰ 2026, 1:48 pm (1 घंटे पहले)· 3

पाली में स्थापित 850 वर्ष प्राचीन माता वचनादेह धाम, जानिए सती के पावन बोल से नामकरण की अनोखी कहानी

राजस्थान के पाली जिले स्थित बाली किले में 850 साल पुराना माता वचनादेह मंदिर आस्था और इतिहास का एक अनोखा केंद्र है। सती होते समय माता के मुख से निकले दिव्य वचनों के कारण इस सिद्ध पीठ को बोल माजीसा के नाम से जाना जाता है।

राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में पाली जिले का ऐतिहासिक बाली किला कई दुर्लभ गाथाओं को अपने भीतर समेटे हुए है। इसी दुर्ग परिसर में करीब 20 फीट की ऊंचाई पर माता वचनादेह का पावन धाम स्थित है, जिसे श्रद्धालु बोल माजीसा मंदिर के रूप में पूजते हैं। लगभग 850 वर्ष पुराना यह धार्मिक स्थल न केवल स्थापत्य कला का सुंदर नमूना है, बल्कि यह बाली किले के निर्माण काल से भी प्राचीन माना जाता है। राजपुरोहित समाज की कुलदेवी के रूप में स्थापित यह पीठ पूरे क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए अगाध श्रद्धा और अलौकिक चमत्कार का प्रतीक बनी हुई है।

विक्रम संवत 1206 से जुड़ा इतिहास और मारवाड़ में धार्मिक मान्यता

इतिहासकारों और क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार इस सिद्ध पीठ का संबंध विक्रम संवत 1206 से है। मारवाड़ अंचल में इस स्थान की सामाजिक और आध्यात्मिक प्रतिष्ठा अत्यंत विशिष्ट रही है। मंदिर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह दुर्ग के ऊपरी हिस्से में निर्मित है और सदियों से राजपुरोहित समाज के लोगों द्वारा कुलदेवी स्थान के रूप में पूजा जाता रहा है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार दुर्ग का निर्माण बाद के वर्षों में हुआ, जबकि माता का यह स्थान पहले से ही एक पावन तपस्थली और पूजा स्थल के रूप में मौजूद था। यहाँ आने वाले श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर आते हैं और माता के आशीर्वाद से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

ये भी पढ़ें

पति देवपाल रायगुर का बलिदान और बोल माजीसा नामकरण की पावन गाथा

माताजी के वंशज चुन्नीलाल राजपुरोहित के अनुसार, इस स्थान का नामकरण एक बेहद मार्मिक और अलौकिक घटना से जुड़ा है। प्राचीन राजा-महाराजाओं के दौर में माता वचनादेह के पति देवपाल रायगुर रणभूमि में शत्रुओं से लोहा लेते हुए अपनी मातृभूमि के लिए वीरगति को प्राप्त हो गए थे। जब माता वचनादेह अपने पति की चिता पर बैठकर सती होने की तैयारी कर रही थीं, उस समय वहां मौजूद सभी लोग एक अद्भुत घटना के साक्षी बने। सती की पावन अग्नि के बीच माता के मुख से स्वतः ही दिव्य वाणी और कल्याणकारी वचन प्रकट होने लगे। मुख से दिव्य बोल निकलने के इसी चमत्कारिक प्रसंग के कारण आगे चलकर इन्हें बोल माजीसा का नाम मिला और यह स्थान एक महान सिद्ध पीठ में तब्दील हो गया।

प्राकृतिक गुफानुमा बनावट और तोता-नागदेव की विहंगम पाषाण प्रतिमा

इस घटना से प्रभावित होकर उस समय के स्थानीय शासकों और राजपरिवार के सदस्यों ने वहां एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। इस मंदिर की वास्तुकला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक गुफानुमा बनावट है। माता वचनादेह की प्रतिमा एक विशाल प्राकृतिक चट्टानी गुफा के अंदर स्थापित है, जिसके ठीक ऊपर भव्य मंदिर की मुख्य संरचना का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, मंदिर परिसर के पास ही एक बेहद प्राचीन और दुर्लभ पत्थर की नक्काशीदार प्रतिमा मौजूद है। इस ऐतिहासिक पाषाण शिल्प की एक दिशा में तोते की सुंदर आकृति उकेरी गई है, जबकि दूसरी दिशा में नागदेव की स्पष्ट छवि दृष्टिगोचर होती है, जो प्राचीन मूर्तिकला का एक अद्भुत उदाहरण है।

राजपुरोहित समाज द्वारा प्रबंधन और चैत्र शुक्ल बीज का भव्य वार्षिकोत्सव

वर्तमान में इस प्राचीन मंदिर की देखरेख का संपूर्ण कार्य राजपुरोहित समाज और परिवार द्वारा श्रद्धापूर्वक संभाला जाता है। मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम की नियमित पूजा-आरती पुजारी पंडित अवधेश महाराज (श्रीमाली) द्वारा पूरे विधि-विधान और निष्ठा के साथ संपन्न कराई जाती है। हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया यानी बीज तिथि पर यहाँ भव्य मेले और धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन होता है। इस खास अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर पहुँचते हैं। माताजी को नई सुंदर पोशाक अर्पित की जाती है, मंदिर के ऊँचे शिखर पर नया ध्वज लहराया जाता है और क्षेत्र की शांति, समृद्धि तथा खुशहाली के लिए विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

सवाल-जवाब

बाली किले का बोल माजीसा मंदिर कितना पुराना है?
यह मंदिर लगभग 850 वर्ष पुराना है और इसका संबंध विक्रम संवत 1206 से जोड़ा जाता है।
माता वचनादेह को बोल माजीसा नाम क्यों मिला?
पति देवपाल रायगुर के बलिदान के बाद सती होते समय माता के मुख से स्वतः दिव्य वचन निकले थे, जिसके कारण उन्हें बोल माजीसा कहा जाने लगा।
मंदिर की वास्तुकला की क्या खासियत है?
माताजी की प्रतिमा एक प्राकृतिक गुफानुमा चट्टान के भीतर स्थित है, जिसके ठीक ऊपर मुख्य मंदिर की इमारत बनी है।
मंदिर में कौन सी दुर्लभ पाषाण प्रतिमा स्थापित है?
मंदिर परिसर के पास एक प्राचीन पत्थर की मूर्ति है, जिसकी एक तरफ तोता और दूसरी तरफ नागदेव की आकृति उकेरी गई है।
चैत्र शुक्ल बीज पर यहाँ क्या विशेष अनुष्ठान होते हैं?
इस दिन माताजी को नई पोशाक अर्पित की जाती है, मंदिर के शिखर पर नया ध्वज फहराया जाता है और सुख-समृद्धि के लिए पूजा होती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR