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संगारेड्डी के रेजिंथल स्थित सिद्धि विनायक धाम में चमत्कार, दो सौ सालों में 6.5 फीट ऊंची हुई प्रतिमाधर्म
20 अग॰ 2026, 1:00 pm (61 दिन पहले)· 3

संगारेड्डी के रेजिंथल स्थित सिद्धि विनायक धाम में चमत्कार, दो सौ सालों में 6.5 फीट ऊंची हुई प्रतिमा

तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में स्थित सिद्धि विनायक मंदिर की स्वयंभू गणेश प्रतिमा हर साल राई के दाने जितनी बढ़ती है और 200 वर्षों में इसका आकार 6.5 फीट तक पहुंच गया है।

तेलंगाना राज्य के संगारेड्डी जिले में जहीराबाद के समीप स्थित रेजिंथल गांव का सिद्धि विनायक मंदिर इन दिनों अपनी एक अनोखी और रहस्यमयी परंपरा को लेकर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस ऐतिहासिक मंदिर की सबसे हैरान कर देने वाली विशेषता यहां विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमा का लगातार बढ़ता हुआ आकार है। प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई इस दिव्य प्रतिमा के चमत्कारी स्वरूप के दर्शन करने और बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।

दो शताब्दियों का इतिहास और राई के दाने जितना सालाना विकास

मंदिर के पुजारियों और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यहां स्थापित स्वयंभू प्रतिमा हर साल एक राई या तिल के दाने के बराबर बढ़ती है। बताया जाता है कि लगभग 200 साल पहले जब यह प्रतिमा पहली बार एक प्राकृतिक शिला या चट्टान के रूप में प्रकट हुई थी, तब इसका आकार काफी छोटा था। हालांकि, समय बीतने के साथ-साथ इसका कद धीरे-धीरे बढ़ता चला गया और आज यह दिव्य मूर्ति लगभग 6.5 फीट की भव्य और विशाल ऊंचाई तक पहुंच चुकी है। प्रतिवर्ष प्रतिमा के आकार में होने वाले इस सूक्ष्म बदलाव को भक्त भगवान श्री गणेश की प्रत्यक्ष कृपा और साक्षात चमत्कार मानते हैं।

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दुर्लभ दक्षिणमुखी प्रतिमा और उससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

इस पावन धाम की एक और प्रमुख विशेषता प्रतिमा की दिशा है। सामान्यतः हिंदू मंदिरों में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके स्थापित की जाती हैं, लेकिन रेजिंथल के इस मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा दक्षिणमुखी है। धार्मिक दृष्टि से दक्षिण की ओर मुख वाली गणेश मूर्तियां बहुत दुर्लभ मानी जाती हैं। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि दक्षिणमुखी सिद्धि विनायक के दर्शन मात्र से जीवन में आने वाले बड़े से बड़े संकट और विघ्न टल जाते हैं तथा भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

सिंदूर और चोला का तर्क तथा तीन राज्यों के भक्तों का जमावड़ा

एक ओर जहां लाखों श्रद्धालु इसे भगवान गणेश का जीवंत चमत्कार मानते हैं, वहीं विशेषज्ञों एवं जानकारों का एक वर्ग इसके पीछे व्यावहारिक वजह भी देखता है। उनके अनुसार, सदियों से निरंतर चढ़ाए जाने वाले सिंदूर, तेल और चोला के लेप की परतें धीरे-धीरे जमा होने के कारण भी मूर्ति का स्वरूप विशाल प्रतीत हो सकता है। इस रहस्य के पीछे धार्मिक आस्था हो या कोई अन्य वजह, रेजिंथल के सिद्धि विनायक मंदिर में पूरे वर्ष भक्तों का तांता लगा रहता है। खासतौर पर गणेश चतुर्थी और अंगारक चतुर्थी के शुभ अवसरों पर तेलंगाना, महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस अद्भुत स्थल के साक्षी बनने के लिए यहां पहुंचते हैं।

सवाल-जवाब

सिद्धि विनायक मंदिर तेलंगाना में कहां स्थित है?
यह मंदिर तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में जहीराबाद तहसील के पास रेजिंथल गांव में स्थित है।
रेजिंथल के गणेश मंदिर की प्रतिमा की क्या विशेषता है?
यहां की स्वयंभू गणेश प्रतिमा हर साल राई या तिल के दाने जितनी बढ़ती है और 200 वर्षों में लगभग 6.5 फीट ऊंची हो चुकी है।
इस मंदिर की प्रतिमा किस दिशा में मुख किए हुए है?
रेजिंथल के सिद्धि विनायक मंदिर की गणेश प्रतिमा दक्षिणमुखी है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत दुर्लभ और शुभ माना जाता है।
मंदिर में किन विशेष अवसरों पर सबसे अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं?
गणेश चतुर्थी और अंगारक चतुर्थी के अवसरों पर तेलंगाना, महाराष्ट्र और कर्नाटक से हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं।
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