मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजा करने वाला हर श्रद्धालु भगवान की परिक्रमा जरूर लगाता है, लेकिन बहुत कम लोगों को यह पता होता है कि किस देवी-देवता की कितनी बार परिक्रमा करनी चाहिए और परिक्रमा शुरू किस दिशा से करनी है। सनातन परंपरा में परिक्रमा को महज एक रस्म नहीं बल्कि भगवान के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आस्था जताने का तरीका माना गया है। यही वजह है कि हर देवता के लिए परिक्रमा की संख्या और दिशा को लेकर शास्त्रों में अलग-अलग नियम बताए गए हैं।
परिक्रमा को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक परिक्रमा का सीधा मतलब है भगवान को अपने केंद्र में रखकर पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से उनके चारों ओर चक्कर लगाना। इसे ईश्वर के आगे पूरी तरह समर्पित होने का प्रतीक माना जाता है। स्कंद पुराण में भी परिक्रमा की इस परंपरा और इसके महत्व का जिक्र मिलता है। मान्यता है कि अगर परिक्रमा पूरी श्रद्धा और सही तरीके से की जाए, तो पूजा-पाठ का फल कहीं ज्यादा शुभ और असरदार माना जाता है। यही कारण है कि सिर्फ पूजा कर लेना काफी नहीं समझा जाता, परिक्रमा को भी उतना ही जरूरी हिस्सा माना गया है।
किस भगवान की कितनी परिक्रमा शुभ मानी गई है
शास्त्रों और परंपराओं में हर देवी-देवता के लिए परिक्रमा की संख्या अलग-अलग तय की गई है, और इसका पालन करना शुभ माना जाता है।
- भगवान गणेश की परिक्रमा आमतौर पर 3 या 5 बार करना शुभ माना जाता है।
- भगवान विष्णु के सामने 4 बार परिक्रमा करने की परंपरा चली आ रही है।
- मां दुर्गा की परिक्रमा 1 बार या फिर 9 बार की जाती है।
- सूर्यदेव की परिक्रमा 7 बार करना शुभ बताया गया है।
- शिवलिंग के मामले में नियम थोड़ा अलग है, शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती। जलहरी यानी सोमसूत्र को पार किए बिना ही अर्ध परिक्रमा या तय की गई परिक्रमा करने का नियम बताया गया है। अलग-अलग मंदिरों की अपनी परंपराओं के हिसाब से इसमें थोड़ा फर्क देखने को मिल सकता है।
परिक्रमा शुरू करने की सही दिशा क्या है
ज्योतिष से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार मंदिर में परिक्रमा हमेशा दक्षिणावर्त यानी घड़ी की सुइयों की दिशा में ही करनी चाहिए। इसे परिक्रमा करने का सबसे उचित और शुभ फल देने वाला तरीका माना जाता है। यानी परिक्रमा शुरू करते समय भगवान को अपनी दाईं ओर रखते हुए आगे बढ़ना होता है।
परिक्रमा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
परिक्रमा सिर्फ चक्कर लगाने की क्रिया नहीं बल्कि श्रद्धा और अनुशासन से जुड़ी होती है, इसलिए कुछ बातों का खास ख्याल रखना जरूरी बताया गया है।
- परिक्रमा हमेशा शांत मन और श्रद्धा भाव से करनी चाहिए, इस दौरान भगवान का ध्यान करते हुए नाम जप करना शुभ माना जाता है।
- परिक्रमा करते समय जल्दबाजी या दौड़ने से बचना चाहिए, सामान्य गति से ही परिक्रमा पूरी करनी चाहिए।
- परिक्रमा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने, आपस में बातचीत करने या हंसी-मजाक करने से बचना चाहिए।
- इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि परिक्रमा करते समय आसपास मौजूद किसी अन्य श्रद्धालु को कोई परेशानी न हो।
- हर मंदिर की अपनी परंपराएं और नियम होते हैं, इसलिए परिक्रमा हमेशा उसी मंदिर के तय नियमों का पालन करते हुए करनी चाहिए।











