पितृ पक्ष में लोहे के बर्तनों और दान से क्यों बचना चाहिए, जानिए धार्मिक कारणसपोटरा के गज्जूपुरा में राज्य स्तरीय खो-खो टूर्नामेंट का आगाज, 86 टीमों की 1032 छात्राएं दिखाएंगी दमउत्तर भारत से मानसून की विदाई तेज, पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में भारी बारिश का अलर्टअजमेर में बस चालक से मारपीट पर रोडवेज कर्मियों का फूटा गुस्सा, अंबेडकर सर्किल पर बसें रोक लगाया जामशारदीय नवरात्र से पूर्व उत्तराभाद्रपद में शनि का प्रवेश, सप्तम भाव के गोचर से साझेदारी और कारोबार पर असरबालाघाट में रहस्यमयी बीमारी के बाद हरकत में प्रशासन, 50 गांवों में 43 हजार से अधिक लोगों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षणवोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के नियमों में बदलाव, कई राज्यों में फॉर्म-6 से हटी एसआईआर घोषणापंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अमरिंदर सिंह राजा वारिंग की हो सकती है छुट्टी, विजय इंदर सिंगला सबसे आगेदीपावली पर पटाखों पर नहीं लगेगा पूर्ण प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट तलाशेगा आस्था और सेहत के बीच संतुलनबिना जानकारी बेंच से केस हटाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, रजिस्ट्री और सरकारी वकील की कार्यशैली पर सवाल
पुरी श्रीमंदिर में शाम को चार घंटे नहीं मिलेंगे महाप्रभु के दर्शन, विशेष श्रृंगार के चलते गर्भगृह के कपाट रहेंगे बंदधर्म
30 सित॰ 2026, 9:07 pm (30 मिनट पहले)· 0

पुरी श्रीमंदिर में शाम को चार घंटे नहीं मिलेंगे महाप्रभु के दर्शन, विशेष श्रृंगार के चलते गर्भगृह के कपाट रहेंगे बंद

पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर में 30 सितंबर को अश्विन कृष्ण चतुर्थी पर बनकलागी अनुष्ठान के कारण शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक आम लोगों के लिए प्रवेश रोका गया है।

ओडिशा के तटीय तीर्थ स्थल पुरी स्थित श्रीमंदिर में शीश नवाने पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने समय सारिणी को लेकर जरूरी निर्देश जारी किया है। अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि, यानी बुधवार 30 सितंबर को गर्भगृह में चलने वाले पारंपरिक कर्मकांड के कारण आम जनता के लिए दर्शन व्यवस्था कुछ समय के लिए स्थगित रखी जाएगी। शाम के 6 बजे से लेकर रात्रि 10 बजे तक पूरे चार घंटे तक भक्तगण देव प्रतिमाओं के सम्मुख उपस्थित नहीं हो सकेंगे। किसी भी तरह की असुविधा अथवा लंबी कतारों की परेशानी से बचने के लिए आगंतुकों को अपनी यात्रा योजना इसी समयावधि को ध्यान में रखकर तैयार करने को कहा गया है।

शाम के समय चार घंटे तक बंद रहेंगे दर्शन

श्रीमंदिर प्रशासन की तरफ से साझा की गई व्यवस्था के मुताबिक, बुधवार को दूसरा भोग मंडप भोग विधिवत समाप्त होने के तुरंत बाद गुप्त धार्मिक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। इस समय सीमा के भीतर मुख्य मंदिर परिसर के पट बंद कर दिए जाते हैं, ताकि आंतरिक मर्यादा बनी रहे। जो भी तीर्थयात्री 30 सितंबर को जगन्नाथ धाम में हाजिरी लगाने की सोच रहे हैं, उन्हें सायंकालीन पहर को लेकर सतर्कता बरतनी होगी। शाम 6 बजे से रात 10 बजे की इस विशेष खिड़की में सार्वजनिक प्रवेश पर पूर्ण विराम रहेगा और अनुष्ठान निर्विघ्न पूरा हो जाने के पश्चात तय नियमों के आधार पर कपाट पुनः खोल दिए जाएंगे।

ये भी पढ़ें

बनकलागी नीति का स्वरूप और इसका धार्मिक महत्व

धार्मिक परंपरा में बनकलागी नीति को विग्रहों का श्रीमुख श्रृंगार भी कहा जाता है, जो सदियों पुरानी रीतियों का अभिन्न अंग है। रत्न सिंहासन पर सुशोभित भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भ्राता बलभद्र, बहन सुभद्रा तथा भगवान सुदर्शन के मुखमंडल को इस अनुष्ठान के जरिए नवीन आभा दी जाती है। इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के रासायनिक लेप की जगह विशुद्ध प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक द्रव्यों का उपयोग किया जाता है। चेहरे के स्वरूप को निखारने का यह पूरा कार्य एकांत में संपादित होता है, इसलिए इसे बेहद गुप्त और संवेदनशील विधान माना जाता है।

दत्ता महापात्र सेवायत संभालते हैं श्रृंगार की बागडोर

इस विशिष्ट सेवा परंपरा को आगे बढ़ाने का उत्तरदायित्व पुश्तैनी दत्ता महापात्र सेवायतों के कंधों पर होता है। पारंपरिक विधानों के अनुसार मूर्तियों के मुख की साज-सज्जा को पूर्ण करने में लगभग चार से पांच घंटे का समय खप जाता है। जब तक यह कार्य अंदर चल रहा होता है, बाहरी परिसर से गर्भगृह का संपर्क कटा रहता है और आम लोगों का प्रवेश पूरी तरह रोक दिया जाता है। प्रशासन ने पुन: दोहराया है कि भक्तजन समय सारिणी की स्पष्ट जानकारी रखकर ही मंदिर प्रांगण का रुख करें, जिससे निर्धारित पूजा समाप्त होने के उपरांत वे सुगमतापूर्वक दर्शन लाभ ले सकें।

सवाल-जवाब

पुरी के जगन्नाथ मंदिर में 30 सितंबर को दर्शन क्यों बंद रहेंगे?
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन की बनकलागी नीति यानी श्रीमुख श्रृंगार अनुष्ठान के कारण आम दर्शन बंद रहेंगे।
सार्वजनिक दर्शन किस समय से किस समय तक बंद रहेंगे?
आम श्रद्धालुओं के लिए शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक कुल चार घंटे दर्शन बंद रहेंगे।
बनकलागी नीति क्या होती है?
यह एक गुप्त और पारंपरिक अनुष्ठान है जिसमें प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करके देवताओं के श्रीमुख का श्रृंगार किया जाता है।
इस श्रृंगार सेवा को कौन संपन्न करता है?
परंपरा के अनुसार इस विशेष सेवा को दत्ता महापात्र सेवायत संपन्न करते हैं।
यह अनुष्ठान किस समय शुरू होगा?
यह अनुष्ठान 30 सितंबर को दूसरा भोग मंडप भोग पूरा होने के बाद शुरू किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp