ओडिशा के तटीय तीर्थ स्थल पुरी स्थित श्रीमंदिर में शीश नवाने पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने समय सारिणी को लेकर जरूरी निर्देश जारी किया है। अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि, यानी बुधवार 30 सितंबर को गर्भगृह में चलने वाले पारंपरिक कर्मकांड के कारण आम जनता के लिए दर्शन व्यवस्था कुछ समय के लिए स्थगित रखी जाएगी। शाम के 6 बजे से लेकर रात्रि 10 बजे तक पूरे चार घंटे तक भक्तगण देव प्रतिमाओं के सम्मुख उपस्थित नहीं हो सकेंगे। किसी भी तरह की असुविधा अथवा लंबी कतारों की परेशानी से बचने के लिए आगंतुकों को अपनी यात्रा योजना इसी समयावधि को ध्यान में रखकर तैयार करने को कहा गया है।
शाम के समय चार घंटे तक बंद रहेंगे दर्शन
श्रीमंदिर प्रशासन की तरफ से साझा की गई व्यवस्था के मुताबिक, बुधवार को दूसरा भोग मंडप भोग विधिवत समाप्त होने के तुरंत बाद गुप्त धार्मिक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। इस समय सीमा के भीतर मुख्य मंदिर परिसर के पट बंद कर दिए जाते हैं, ताकि आंतरिक मर्यादा बनी रहे। जो भी तीर्थयात्री 30 सितंबर को जगन्नाथ धाम में हाजिरी लगाने की सोच रहे हैं, उन्हें सायंकालीन पहर को लेकर सतर्कता बरतनी होगी। शाम 6 बजे से रात 10 बजे की इस विशेष खिड़की में सार्वजनिक प्रवेश पर पूर्ण विराम रहेगा और अनुष्ठान निर्विघ्न पूरा हो जाने के पश्चात तय नियमों के आधार पर कपाट पुनः खोल दिए जाएंगे।
बनकलागी नीति का स्वरूप और इसका धार्मिक महत्व
धार्मिक परंपरा में बनकलागी नीति को विग्रहों का श्रीमुख श्रृंगार भी कहा जाता है, जो सदियों पुरानी रीतियों का अभिन्न अंग है। रत्न सिंहासन पर सुशोभित भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भ्राता बलभद्र, बहन सुभद्रा तथा भगवान सुदर्शन के मुखमंडल को इस अनुष्ठान के जरिए नवीन आभा दी जाती है। इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के रासायनिक लेप की जगह विशुद्ध प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक द्रव्यों का उपयोग किया जाता है। चेहरे के स्वरूप को निखारने का यह पूरा कार्य एकांत में संपादित होता है, इसलिए इसे बेहद गुप्त और संवेदनशील विधान माना जाता है।
दत्ता महापात्र सेवायत संभालते हैं श्रृंगार की बागडोर
इस विशिष्ट सेवा परंपरा को आगे बढ़ाने का उत्तरदायित्व पुश्तैनी दत्ता महापात्र सेवायतों के कंधों पर होता है। पारंपरिक विधानों के अनुसार मूर्तियों के मुख की साज-सज्जा को पूर्ण करने में लगभग चार से पांच घंटे का समय खप जाता है। जब तक यह कार्य अंदर चल रहा होता है, बाहरी परिसर से गर्भगृह का संपर्क कटा रहता है और आम लोगों का प्रवेश पूरी तरह रोक दिया जाता है। प्रशासन ने पुन: दोहराया है कि भक्तजन समय सारिणी की स्पष्ट जानकारी रखकर ही मंदिर प्रांगण का रुख करें, जिससे निर्धारित पूजा समाप्त होने के उपरांत वे सुगमतापूर्वक दर्शन लाभ ले सकें।



















