हिमालय की सुरम्य वादियों में स्थित बाबा केदारनाथ के पावन धाम में इस बार दिवाली के अवसर पर अलौकिक और मनमोहक दृश्य देखने को मिल रहा है। शीतकाल के आगमन और मंदिर के कपाट बंद होने से ठीक पहले संपूर्ण मंदिर परिसर को भव्य तरीके से संवारा गया है। यहां की छटा ऐसी है कि धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की नजरें मंदिर की भव्यता से हट नहीं रही हैं। आस्था और उत्सव के इस अद्भुत संगम ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया है। देश के विभिन्न कोनों से पहुंचे भक्त न केवल बाबा केदार के दर्शन कर आत्मिक शांति प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि दिवाली के पावन पर्व की खुशियों को भी इस पवित्र स्थल पर महसूस कर रहे हैं।
फूलों की मनमोहक सुगंध से महका मंदिर प्रांगण
इस पावन पर्व पर श्री केदारनाथ धाम के मुख्य मंदिर और पूरे प्रांगण को सजाने के लिए करीब 18 से 20 क्विंटल विविध किस्मों के ताजे और रंग-बिरंगे फूलों का इस्तेमाल किया गया है। इन खूबसूरत फूलों की लड़ियों और सुंदर कलाकृतियों से मंदिर के हर कोने को सजाया गया है, जिससे पूरे परिसर का रूप भव्य और दिव्य नजर आ रहा है। दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए यह सजावट विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सदस्य डॉ. विनीत चंद्र पोस्ती ने इस भव्य अवसर पर देश और उत्तराखंड के सभी नागरिकों को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उनका कहना है कि इस अनुपम सजावट ने धाम की आध्यात्मिक आभा को और अधिक बढ़ा दिया है।
भगवान भुकुंड भैरवनाथ के कपाट बंद होने की विधि
केदारनाथ धाम में दीपोत्सव की रौनक के बीच शीतकाल के लिए कपाट बंद करने की धार्मिक परंपराओं की शुरुआत भी हो चुकी है। धाम के क्षेत्रपाल और रक्षक माने जाने वाले भगवान भुकुंड भैरवनाथ जी के मंदिर के कपाट आज शीतकालीन अवधि के लिए विधिवत रूप से बंद किए जा रहे हैं। सनातन परंपराओं और शास्त्रों में वर्णित विधि-विधान के अनुसार यह महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया जा रहा है। इस अनुष्ठान के दौरान स्थानीय हक-हकूकधारी, तीर्थ पुरोहित समाज के प्रमुख प्रतिनिधि और श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस बल तथा स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भी इस धार्मिक प्रक्रिया में शामिल हुए।
11 नवंबर को बंद होंगे बाबा केदार के मुख्य कपाट
धाम की प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक क्षेत्रपाल भगवान भुकुंड भैरवनाथ जी के कपाट बंद होने के साथ ही बाबा केदारनाथ के मुख्य मंदिर को शीतकाल के लिए बंद करने का औपचारिक सिलसिला प्रारंभ हो जाता है। मंदिर समिति के सदस्य डॉ. विनीत चंद्र पोस्ती ने स्पष्ट किया है कि बाबा केदारनाथ के मुख्य कपाट आगामी 11 नवंबर को पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चार के बीच शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस वर्ष बाबा केदार के साक्षात दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं के पास अब बेहद सीमित समय बचा है। इसके बाद शीतकालीन प्रवास के दौरान बाबा की पूजा-अर्चना उनके गद्दी स्थल पर विधिवत संपन्न होगी।
श्रद्धालुओं से मर्यादा बनाए रखने की खास अपील
मंदिर समिति ने इस विशेष अवसर पर धाम पहुंच रहे सभी तीर्थयात्रियों से खास अपील भी की है। डॉ. विनीत चंद्र पोस्ती ने कहा कि श्रद्धालु दिवाली के इस पवित्र पर्व पर केदारनाथ धाम पहुंचकर दीप अवश्य प्रज्वलित करें और सामूहिक दीपोत्सव का हिस्सा बनें। इसके साथ ही उन्होंने सभी भक्तों से आग्रह किया कि वे हिमालयी धाम की गरिमा, मर्यादा और पवित्रता का पूरा ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अनुचित गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहें। उच्च हिमालयी क्षेत्र के शांत वातावरण, धार्मिक मर्यादाओं और परंपराओं के संरक्षण में प्रशासन व मंदिर समिति का पूरा सहयोग करें ताकि यात्रा का यह अंतिम चरण शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हो सके।



















