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सावन के आखिरी प्रदोष व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर दूर करें असमंजस, जानिए सही तारीखधर्म
24 अग॰ 2026, 7:40 am (1 घंटे पहले)· 2

सावन के आखिरी प्रदोष व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर दूर करें असमंजस, जानिए सही तारीख

अगस्त 2026 के आखिरी प्रदोष व्रत की तारीख और पूजा के शुभ मुहूर्त को लेकर फैली उलझन को दूर करें। जानिए भौम प्रदोष व्रत का सही समय, पूजा विधि और इसके धार्मिक महत्व से जुड़ी खास बातें।

हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया गया है, जो पूरी तरह से भगवान शिव की आराधना को समर्पित होता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस पावन व्रत का विधिवत पालन करने से मनुष्य के जीवन के तमाम संकट और समस्याएं समाप्त हो जाती हैं और देवाधिदेव महादेव की कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह व्रत प्रत्येक माह में दो बार आता है, जिससे एक वर्ष के दौरान कुल 24 या 25 प्रदोष व्रत आते हैं। वार के हिसाब से इनके नाम तय होते हैं जैसे सोमवार को आने पर सोम प्रदोष, मंगलवार को पड़ने पर भौम प्रदोष और शनिवार को आने पर शनि प्रदोष कहा जाता है। इस बार अगस्त महीने के आखिरी प्रदोष व्रत की सही तिथि और इसके पूजा मुहूर्त को लेकर लोगों के मन में संशय बना रहता है, जिसे आसानी से अगस्त महीने का आखिरी प्रदोष व्रत कब पड़ रहा है लिंक के जरिए समझा जा सकता है।

अगस्त प्रदोष व्रत 2026 की सही तारीख

वर्ष 2026 के अगस्त माह का अंतिम प्रदोष व्रत 25 अगस्त 2026 को आ रहा है, जिस दिन मंगलवार है। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष के रूप में मनाया जाएगा। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार भौम प्रदोष का व्रत रखने वाले जातकों को कर्ज के बोझ से मुक्ति मिलती है, भूमि और भवन से जुड़े विवादों का समाधान निकलता है और शारीरिक ऊर्जा व बल में बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा कुंडली में मंगल ग्रह से जुड़े अशुभ और नकारात्मक प्रभाव भी शांत होते हैं।

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भौम प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त 2026

इस भौम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की आराधना के लिए शुभ मुहूर्त 25 अगस्त 2026 की शाम को 06:51 बजे से शुरू होकर रात के 09:04 बजे तक रहेगा। इस दिन त्रयोदशी तिथि का आरंभ 25 अगस्त 2026 की सुबह 06:20 बजे होगा और इसका समापन अगले दिन यानी 26 अगस्त की सुबह 07:59 बजे हो जाएगा।

भौम प्रदोष व्रत की पूरी पूजा विधि

  • सायंकाल यानी प्रदोष काल के वक्त स्नान करने के बाद शिव मंदिर या घर में भगवान शिव की पूजा प्रारंभ करें।
  • शिवलिंग पर बेलपत्र, चंदन, भांग, ताजे फल, अक्षत, धतूरा, मिठाई और पवित्र गंगाजल अर्पित करें।
  • इसके बाद शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान शिव तथा माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा संपन्न करें।
  • पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र अथवा महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम 11 बार सस्वर जाप करें।
  • इसके पश्चात नियमपूर्वक शिव चालीसा का पाठ करें।
  • भौम प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण या पठन अवश्य करें।
  • शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित कर शिव और पार्वती की आरती करें।
  • भगवान को अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोग लगाएं।
  • यदि संभव हो सके तो इस दिन मसूर की दाल, गुड़, तांबा या लाल रंग के वस्त्रों का दान जरूर करें।
  • इस विशेष दिन पर भगवान शिव को सिंदूर अर्पित करने का भी विधान है।
  • इस बात का खास तौर पर ध्यान रखें कि भगवान शिव की पूजा में केतकी, तुलसी के पत्ते और केवड़ा के फूल बिल्कुल नहीं चढ़ाने चाहिए।
  • अन्य धार्मिक जानकारियों के लिए आप 25 अगस्त को मंगल के नक्षत्र में शुक्र करेंगे शुक्र गोचर की खबर भी देख सकते हैं।

सवाल-जवाब

अगस्त 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत कब है?
अगस्त महीने का आखिरी प्रदोष व्रत 25 अगस्त 2026, मंगलवार को पड़ रहा है।
मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को क्या कहा जाता है?
मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इस व्रत को भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है।
भौम प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
पूजा का शुभ मुहूर्त 25 अगस्त 2026 की शाम 06:51 से रात 09:04 बजे तक रहेगा।
त्रयोदशी तिथि कब से कब तक रहेगी?
त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त 2026 की सुबह 06:20 बजे से शुरू होकर 26 अगस्त की सुबह 07:59 बजे तक रहेगी।
भौम प्रदोष व्रत रखने से क्या लाभ मिलता है?
इस व्रत को रखने से कर्ज से मुक्ति मिलती है, भूमि-भवन के विवाद दूर होते हैं और मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभाव खत्म होते हैं।
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