श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष फल प्राप्त होता है। इस पवित्र महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है। इस वर्ष सावन माह का अंतिम प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ रहा है। जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन आता है, तो उसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस पावन अवसर पर देशभर के प्रमुख मंदिरों और शिवालयों में संध्याकाल के दौरान विशेष धार्मिक अनुष्ठान, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु शाम के समय प्रदोष काल में भगवान भोलेनाथ का पूजन करते हैं।
सावन शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 25 अगस्त को प्रातः काल 6 बजकर 20 मिनट पर हो रहा है। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 26 अगस्त को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर होगा। शास्त्रों में उदया तिथि और संध्याकालीन प्रदोष काल के पूजन का विशेष नियम माना जाता है। इसी कारण उदया तिथि के आधार पर सावन का आखिरी प्रदोष व्रत 25 अगस्त को ही रखा जाएगा।
भौम प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व और कर्ज मुक्ति की मान्यता
मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष के अलावा मंगल प्रदोष भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशिष्ट दिन पर भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने पर साधक को आर्थिक तंगी और पुराने कर्ज से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा, जिन लोगों के जीवन में भूमि, मकान या अचल संपत्ति से जुड़े विवाद चल रहे हों, उनके लिए भी इस दिन शिव उपासना करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। कुंडली में मंगल ग्रह से संबंधित दोषों या समस्याओं को शांत करने के लिए भौम प्रदोष व्रत का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।
भौम प्रदोष व्रत की संपूर्ण पूजा विधि
भौम प्रदोष के दिन व्रत रखने वाले भक्तों को सुबह से ही सात्विक जीवन शैली का पालन करना चाहिए। इस दिन पूजा-पाठ की मुख्य विधि इस प्रकार है
- सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके पश्चात भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- प्रदोष काल यानी शाम के समय निकटतम शिव मंदिर जाएं या फिर घर के पूजा स्थान पर स्थापित शिवलिंग के समक्ष बैठें। सबसे पहले जल और दूध से शिवलिंग का जलाभिषेक करें।
- अभिषेक के बाद शिव जी को बेलपत्र, अक्षत और ताजे पुष्प अर्पित करें। तत्पश्चात पूरी निष्ठा और श्रद्धा भाव से भगवान शिव की पूजा अर्चना करें।
- पूजा के दौरान 'ओम नमः शिवाय' मंत्र का निरंतर जाप करते रहें। इसके साथ ही शिव चालीसा, शिव स्तुति या अन्य शिव मंत्रों का पाठ करना भी फलदायी माना जाता है।
हनुमान जी की उपासना और विशेष नियम
भौम प्रदोष का संबंध मंगलवार से होने के कारण इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ संकटमोचन हनुमान जी की पूजा का भी विधान है। संभव हो तो शाम के समय हनुमान मंदिर जाकर उनके दर्शन करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें। अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती उतारें और अपने परिवार के लिए आरोग्य, सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।



















