नाथ नगरी के नाम से मशहूर बरेली में सावन के पवित्र महीने का उत्साह अब हर कोने में देखते ही बन रहा है। शहर में हर तरफ शिवभक्ति का गहरा माहौल है, जहां हजारों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए हरिद्वार और कछला जैसे प्रमुख तीर्थ स्थानों से पवित्र गंगाजल लाने की कठिन तैयारियों में जोर-शोर से जुटे हुए हैं। इन व्यापक तैयारियों का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण केंद्र बरेली का मटकी चौकी इलाका है। यह खास जगह अपने ऐतिहासिक कांवड़ बाजार के लिए पूरे क्षेत्र में जानी जाती है, जहां पिछले 25 से 30 सालों से स्थानीय कारीगर पूरी श्रद्धा और दिन-रात की कड़ी मेहनत के साथ हजारों खूबसूरत कांवड़ तैयार कर रहे हैं।
महीनों पहले शुरू होती है बारीक कारीगरी
कांवड़ बनाने की यह जटिल प्रक्रिया कोई एक दिन या चंद घंटों का काम नहीं है। मटकी चौकी के अत्यंत कुशल कारीगर सावन शुरू होने से करीब एक से डेढ़ महीने पहले ही अपनी तैयारियों में पूरी तरह से लग जाते हैं। वे मजबूत बांस, चमकीली पन्नियों, रंग-बिरंगे कपड़ों और ढेरों सजावटी सामानों का बेहतरीन इस्तेमाल करके बेहद खूबसूरत और आकर्षक कांवड़ तैयार करते हैं। समय बीतने के साथ श्रद्धालुओं की पसंद और मांग काफी बदली है, इसलिए इन कारीगरों ने भी अपने काम में काफी आधुनिकता शामिल कर ली है। आजकल बाजार में साधारण पारंपरिक कांवड़ों के साथ-साथ विशेष रूप से डाक कांवड़, खड़ी कांवड़, बैकुंठी कांवड़ और झूला कांवड़ के कई शानदार डिज़ाइन आसानी से उपलब्ध हैं, जिनकी भारी मांग की वजह से पूरा बाजार सावन भर ग्राहकों से गुलजार रहता है।
कीमत, कमाई और कारीगरों की अथक मेहनत
यह बाजार सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि कई स्थानीय परिवारों की रोजी-रोटी का सबसे मुख्य जरिया भी है। पिछले 12-13 सालों से कांवड़ बनाने का काम कर रहे एक अनुभवी कारीगर नीरज ने बाजार के बारे में बताते हुए कहा कि उनके यहां ग्राहकों की मांग के अनुसार तरह-तरह के बेहतरीन डिज़ाइन वाली कांवड़ तैयार की जाती हैं। दिन भर की अथक मेहनत के बाद एक कारीगर आम तौर पर एक दिन में 5 से 7 कांवड़ पूरी तरह से बनाकर तैयार कर लेता है। बाजार में इन हस्तनिर्मित कांवड़ों की कीमत कारीगरी के हिसाब से 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये के बीच होती है। यहां बड़ी मेहनत से तैयार होने वाला यह सामान सिर्फ बरेली शहर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसे फरीदपुर, सीबीगंज और मीरगंज जैसे आसपास के तमाम इलाकों में भी भारी मात्रा में बिक्री के लिए सप्लाई किया जाता है।
शांतिपूर्ण और सुरक्षित यात्रा का विशेष संदेश
कांवड़ बनाने वाले ये कारीगर सिर्फ व्यापार के नजरिए से काम नहीं करते, बल्कि इस पूरी प्रक्रिया को गहरी आस्था और सम्मान की नजर से भी देखते हैं। काम की व्यस्तता के बीच, कारीगर नीरज ने यात्रा पर जाने वाले सभी श्रद्धालुओं से एक बेहद खास और महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने विनम्रता से कहा, "कांवड़ यात्रा शांतिपूर्वक करें, डीजे की आवाज कम रखें और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करें।" यह सीधी सी बात इस बात को दर्शाती है कि पूरा समाज और कारीगर वर्ग चाहता है कि यह विशाल धार्मिक आयोजन पूरी शालीनता, अनुशासन और सच्ची भक्ति भावना के साथ सुरक्षित रूप से संपन्न हो।
कई पड़ोसी जिलों में फैली है मटकी चौकी की बड़ी पहचान
मटकी चौकी के इस विशेष कांवड़ बाजार की ख्याति और लोकप्रियता अब केवल बरेली जिले की सीमाओं तक ही सीमित नहीं रह गई है। पीलीभीत, बदायूं, रामपुर, शाहजहांपुर और लखीमपुर खीरी जैसे कई पड़ोसी जिलों में भी इसकी एक बहुत ही अलग और मजबूत पहचान बन चुकी है। हर साल सावन के इस पावन महीने में हजारों की संख्या में दूर-दराज के शिवभक्त खास तौर पर यहां आते हैं और अपनी पसंद की सुंदर कांवड़ खरीदकर सीधे हरिद्वार या कछला घाट के लिए रवाना होते हैं। मटकी चौकी के इन स्थानीय कारीगरों को साल भर सावन के इसी खास मौसम का बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि यह एक महीना उनके परिवार के पूरे साल के आर्थिक भरण-पोषण का सबसे प्रमुख आधार साबित होता है।



















