मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में एक तरफ जहाँ प्रशासनिक दल सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए प्राचीन मंदिर परिसर को हटाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आठ फुट ऊंची हनुमान प्रतिमा अपनी जगह से तनिक भी नहीं हिली है। उज्जैन नगर निगम द्वारा भारी क्रेन और आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किए जाने के बावजूद इस मूर्ति को खिसकाया नहीं जा सका। इस अकल्पनीय घटना ने स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच भक्ति भाव को और गहरा कर दिया है। ठीक इसी समय, सिनेमाघरों में हाल ही में रिलीज हुई कम बजट की फिल्म 'हनुमान अंश' भी दर्शकों के बीच जबरदस्त आध्यात्मिक लहर पैदा कर रही है और बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है।
सिनेमाघरों में 'हनुमान अंश' की 140 करोड़ रुपये की बंपर कमाई
बहुत ही सीमित लागत में निर्मित हुई फिल्म 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर कई बड़े बजट और नामचीन कलाकारों की फिल्मों को पछाड़ दिया है। इस फिल्म ने अब तक 140 करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्डतोड़ कारोबार कर लिया है। फिल्म में प्रस्तुत की गई भक्ति, चमत्कारिक प्रसंगों और सनातन आस्था की कहानी ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से गहराई तक प्रभावित किया है। सिनेमाघरों के भीतर का माहौल किसी पवित्र तीर्थस्थल की भांति प्रतीत हो रहा है, जहाँ फिल्म का शो समाप्त होते ही दर्शक भावविभोर होकर 'जय श्री राम' और 'जय बजरंगबली' के गगनभेदी नारे लगाने लगते हैं।
निर्माण के दौरान धार्मिक अनुशासन और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की तैयारी
फिल्म 'हनुमान अंश' की सफलता केवल उसके कमाई के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके निर्माण के पीछे की आध्यात्मिक यात्रा भी उतनी ही चर्चा में है। फिल्म के निर्माता और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने शूटिंग आरंभ करने से पूर्व व्यापक आध्यात्मिक तैयारियाँ की थीं। शूटिंग के दौरान संपूर्ण क्रू द्वारा कड़े धार्मिक अनुशासन का पालन किया गया और प्रतिदिन नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता था। निर्माण कार्य के दौरान आई विभिन्न बाधाओं के बाद जिस प्रकार से कार्य सुगम हुए, उन अनुभवों को फिल्म से जुड़े कलाकारों और तकनीशियनों ने भी साझा किया है। दर्शकों का मानना है कि पर्दे पर दिखाया गया भक्ति रस अब वास्तविक दुनिया में भी महसूस हो रहा है।
उज्जैन के 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर का अद्भुत घटनाक्रम
मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में मार्ग चौड़ीकरण योजना के क्रियान्वयन के दौरान 170 वर्ष प्राचीन 'खड़े हनुमान मंदिर' के ऊपरी ढांचे को तो हटा दिया गया, किंतु मुख्य प्रतिमा को स्थानांतरित करना संभव नहीं हो सका है। नगर निगम की टीमों द्वारा भारी मशीनों के प्रयोग के बाद भी आठ फीट ऊंची प्रतिमा अपनी जगह पर अडिग बनी हुई है। इस घटनाक्रम के दौरान एक अनोखा दृश्य तब देखने को मिला जब अचानक दर्जनों बंदर मंदिर स्थल के आसपास आकर बैठ गए। इस दृश्य को देखकर उपस्थित श्रद्धालुओं की आँखें छलक आईं और वे इसे बजरंगबली की प्रत्यक्ष उपस्थिति एवं इच्छा से जोड़कर देखने लगे।
आईआईटी इंदौर की विशेष टीम द्वारा दो घंटे तक वैज्ञानिक जांच
स्थिति की गंभीरता और तकनीकी पेचीदगियों को देखते हुए उज्जैन नगर निगम के कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने मंदिर के पुजारी के विशेष अनुरोध पर इंदौर आईआईटी की विशेषज्ञ टीम को आमंत्रित किया। मंगलवार के दिन आईआईटी इंदौर के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम ने लगभग दो घंटे तक स्थल पर पहुँचकर गहन पड़ताल की। विशेष तकनीकी उपकरणों की मदद से प्रतिमा की जमीन में गहराई, नींव के आकार और आसपास की भूगर्भीय संरचना से जुड़े आंकड़े एकत्रित किए गए हैं। नगर कमिश्नर अभिलाष मिश्रा के अनुसार, विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत ही प्रतिमा को सुरक्षित रूप से स्थानांतरित करने की आगामी प्रक्रिया और तिथि का निर्धारण किया जाएगा।
विज्ञान की दलील और सनातनी आस्था का विश्वास
जहाँ एक ओर तकनीकी विशेषज्ञ और इंजीनियर इस घटना को पत्थर की अत्यधिक गहरी नींव, भूमिगत जकड़न और संरचनात्मक मजबूती का परिणाम मान रहे हैं, वहीं उज्जैन की जनता तथा 'हनुमान अंश' के प्रशंसकों का विश्वास है कि ईश्वर की इच्छा के बिना संसार में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। आस्था और तकनीक के इस अनूठे संगम ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना दिया है।



















