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उज्जैन में बाबा महाकाल की भस्म आरती से शुरू हुआ भक्तिमय मंगलवार, जानें इस दिव्य परंपरा का पूरा महत्वधर्म
16 जून 2026, 7:38 am (45 दिन पहले)· 2

उज्जैन में बाबा महाकाल की भस्म आरती से शुरू हुआ भक्तिमय मंगलवार, जानें इस दिव्य परंपरा का पूरा महत्व

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में 16 जून 2026, मंगलवार को तड़के भस्म आरती और श्रृंगार दर्शन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में मंगलवार, 16 जून 2026 की सुबह एक बार फिर भक्ति की लहर दौड़ती दिखी। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती और श्रृंगार दर्शन का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें पहुंचे श्रद्धालुओं ने ‘जय महाकाल’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से पूरे परिसर को गुंजायमान कर दिया।

आरती के दौरान मंदिर का वातावरण पूरी तरह दिव्य और भक्तिमय बना रहा। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आस्था का गहरा अनुभव लिया, उनका प्रसाद ग्रहण किया और जीवन के कष्टों से मुक्ति के साथ सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। श्रृंगार दर्शन ने वहां मौजूद हर भक्त को भगवान श्री महाकालेश्वर की मनोहारी छवि के और करीब ले जाकर एक अनूठा अनुभव दिया।

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उज्जैन क्यों है इतना खास

पुराणों में इस नगरी को कई नामों से पुकारा गया है। अवंतिका, अवंतिकापुरी, कनकश्रंगा और उज्जैनी जैसे नाम इसी पवित्र भूमि के लिए प्रयोग होते रहे हैं। देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों में श्री महाकालेश्वर की यह नगरी अपनी एक अलग पहचान रखती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां बाबा महाकाल को तांत्रिक क्रिया के अनुसार दक्षिण मुखी पूजा प्राप्त है, और पूरी दुनिया में केवल यहीं बाबा महाकाल दक्षिण मुख में विराजमान हैं।

तड़के चार बजे की भस्म आरती

महाकाल मंदिर का महत्व इसलिए भी कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि यहां सुबह चार बजे भस्म आरती करने का विधान है। इसी आरती को मंगला आरती भी कहा जाता है। पूरे दिन में बाबा महाकाल की कुल छह बार आरती होती है, लेकिन इन सबमें सबसे खास भस्म आरती ही मानी जाती है। इसे देखने के लिए देश और विदेश से लाखों की संख्या में भक्त उज्जैन पहुंचते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली इस आरती में बाबा महाकाल को घटा टोप स्वरूप दिया जाता है। इसके लिए एक सूती कपड़ा लिया जाता है और उसे बांधकर शिवलिंग पर भस्म बिखेरते हुए आरती संपन्न की जाती है। मान्यता के अनुसार बाबा महाकाल के दर्शन के बाद जूना महाकाल के दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है।

पूजा से मिलने वाली शांति

शास्त्रों और मान्यताओं में बताया गया है कि महाकाल की पूजा से कालदोष, ग्रहदोष और अकाल मृत्यु के योग शांत होते हैं। जिन जातकों की कुंडली में शनिदोष या राहु-केतु दोष होता है, उन्हें बाबा महाकाल की उपासना से अद्भुत शांति का अनुभव होता है। शास्त्रों में इस उपासना को सर्वग्रह पीड़ा नाशक कहा गया है। मान्यता है कि महाकाल के क्षेत्र में काल का प्रभाव ही समाप्त हो जाता है, यानी मनुष्य के कर्मों का बंधन धीरे-धीरे क्षीण होता है और आत्मा में स्थिरता आती है।

सवाल-जवाब

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती किस समय होती है?
भस्म आरती तड़के चार बजे ब्रह्म मुहूर्त में की जाती है और इसे मंगला आरती भी कहा जाता है।
बाबा महाकाल की पूजा क्यों खास मानी जाती है?
यहां तांत्रिक क्रिया के अनुसार बाबा महाकाल को दक्षिण मुखी पूजा प्राप्त है और दुनिया में केवल यहीं वे दक्षिण मुख में विराजमान हैं।
महाकाल की पूरे दिन में कितनी बार आरती होती है?
पूरे दिन में छह बार आरती होती है, जिनमें सबसे खास भस्म आरती मानी जाती है।
बाबा महाकाल के दर्शन के बाद और किसके दर्शन जरूरी हैं?
मान्यता के अनुसार बाबा महाकाल के दर्शन के बाद जूना महाकाल के दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है।
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