उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित विकासखंड झंझरी का एक हनुमान मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के अनुसार, इस पवित्र स्थान पर लगातार 11 मंगलवार तक नियमपूर्वक बजरंगबली के दर्शन और पूजा करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं दूर हो जाती हैं। माना जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां आकर संकटमोचन हनुमान की आराधना करता है, उसे नकारात्मक शक्तियों, डर और मानसिक तनाव से पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है। इसी अटूट विश्वास के चलते गोंडा ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।
11 मंगलवार की पूजा का नियम और मान्यताएं
मंदिर के पुजारी अर्जुन कुमार के अनुसार, इस स्थान से जुड़ी परंपराएं और आस्था वर्षों पुरानी हैं। उनका कहना है कि जो श्रद्धालु पूरे नियम, भक्ति और निष्ठा के साथ लगातार 11 मंगलवार मंदिर आकर बजरंगबली के चरणों में शीश नवाते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कई श्रद्धालुओं ने अनुभव साझा करते हुए बताया है कि इस धार्मिक अनुष्ठान को पूरा करने के बाद उन्हें मानसिक तनाव, अनजाने डर और ऊपरी बाधाओं जैसी समस्याओं से राहत महसूस हुई है। हालांकि यह पूरी परंपरा श्रद्धालुओं की गहरी धार्मिक आस्था और दृढ़ विश्वास पर आधारित है, लेकिन यहां मिलने वाले आध्यात्मिक सुकून की वजह से मंदिर की प्रसिद्धि लगातार बढ़ती जा रही है।
धार्मिक अनुष्ठान और भक्तों की विशेष पूजा विधि
मंदिर परिसर में तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो जाता है। यहां आने वाले भक्त अपनी पूजा के दौरान बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ करते हैं। इसके अलावा, भगवान हनुमान को चमेली का तेल और सिंदूर अर्पित करने की भी विशेष परंपरा है। भक्त मंदिर में ताजा प्रसाद चढ़ाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि तथा शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं और संकटमोचन से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
मंगलवार और शनिवार को उमड़ती है भारी भीड़
यूं तो मंदिर में हर दिन भक्त दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन मंगलवार और शनिवार के दिन यहां का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। इन विशेष दिनों में मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। दूर-दराज के गांवों, निकटवर्ती जिलों और अन्य राज्यों से आए श्रद्धालु यहां सुंदरकांड के पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक हवन में उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते हैं। पूरे परिसर में गूंजते मंत्रोचार और भजनों से श्रद्धालुओं को असीम आध्यात्मिक शांति का अहसास होता है।
वर्षों से चली आ रही इस अनूठी धार्मिक मान्यता के कारण यह मंदिर गोंडा जिले की एक प्रमुख पहचान बन चुका है। अपनी मनोकामनाएं पूरी होने के बाद भक्त बजरंगबली का धन्यवाद करने और पुनः प्रसाद चढ़ाने के लिए दोबारा मंदिर जरूर आते हैं। मंगलवार के खास अवसर पर यहां उमड़ने वाला भक्तों का सैलाब इस बात का प्रमाण है कि बजरंगबली के प्रति लोगों की श्रद्धा आज भी उतनी ही प्रगाढ़ है।



















