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उत्तर प्रदेश के इस ऐतिहासिक काली मंदिर में होती है हर मुराद पूरी, महाराष्ट्र के शिल्पकारों ने गढ़ी है अद्भुत बनावटधर्म
1 सित॰ 2026, 9:10 am (30 दिन पहले)· 2

उत्तर प्रदेश के इस ऐतिहासिक काली मंदिर में होती है हर मुराद पूरी, महाराष्ट्र के शिल्पकारों ने गढ़ी है अद्भुत बनावट

बलिया के रसड़ा कस्बे में स्थित प्राचीन बड़ी काली मंदिर अपनी खास वास्तुकला और गहरी आस्था के लिए जाना जाता है। यहां महाराष्ट्र के कारीगरों द्वारा बनाई गई संरचना के दर्शन करने दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं।

उत्तर प्रदेश के कई धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, और ऐसा ही एक प्रसिद्ध स्थान बलिया जिले में स्थित है। यह ऐतिहासिक बड़ी काली मंदिर अपनी अनोखी बनावट और गहरी धार्मिक मान्यताओं के लिए दूर-दूर तक पहचाना जाता है। इस पावन स्थल की वास्तुकला इतनी अनूठी है कि देखने वाले दंग रह जाते हैं, क्योंकि इसकी नक्काशी को महाराष्ट्र से आए विशेष कारीगरों ने तैयार किया था।

श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और परंपरा

क्षेत्रीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ मां काली के चरणों में शीश झुकाता है, उसकी हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इसी वजह से यहां स्थानीय लोगों के अलावा अन्य प्रदेशों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। सुबह से लेकर शाम तक यह पूरा परिसर भक्तों की आवाजाही से गुलजार रहता है। यहाँ आने वाला हर नया भक्त बाद में बार-बार हाजिरी लगाने पहुंचता है और मुराद पूरी होने पर मन्नत के रूप में घंटा या रक्षासूत्र अर्पित करता है।

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मंदिर का प्राचीन इतिहास और जीर्णोद्धार

इस पवित्र मंदिर के वास्तविक निर्माण काल के बारे में किसी के पास पुख्ता जानकारी नहीं है, और यहाँ के बुजुर्ग भी इसके उद्गम वर्ष से अनजान हैं। रसड़ा क्षेत्र में स्थित इस बड़ी काली मंदिर के मुख्य पुजारी सूर्य प्रकाश उपाध्याय का कहना है कि उनके पिता और दादा ने भी इसी स्थान पर सेवा दी थी। उनके पूर्वजों को भी इसके इतिहास की सही तिथि ज्ञात नहीं थी। हालांकि यह अनुमान लगाया जाता है कि जब इस इलाके की स्थापना हुई होगी, तभी मंदिर का निर्माण किया गया होगा क्योंकि गाँव की सीमा से बाहर देवी मंदिर स्थापित करने की पुरानी परंपरा रही है। इसके जीर्णोद्धार का कार्य 2 साल पहले रामचंद्र सिंह द्वारा करवाया गया था, जिसके लिए विशेष तौर पर महाराष्ट्र से कारीगर बुलवाए गए थे।

दूर-दराज से पहुँचते हैं मन्नतधारी भक्त

इस पावन दरबार में केवल बलिया के नागरिक ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य बिहार समेत कई दूरवर्ती इलाकों से भी लोग आशीर्वाद पाने आते हैं। मनोकामनाएं पूरी होने पर भक्त अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं, जिसमें मुख्य रूप से घंटा बांधना और रक्षासूत्र अर्पित करना शामिल है। मंदिर में हमेशा ही भारी भीड़ देखने को मिलती है, जहाँ लोग संतान प्राप्ति, सरकारी नौकरी और विवाह जैसी अपनी तमाम मनोकामनाएं लेकर आते हैं और माँ सबकी झोली भरती हैं।

भक्तों के व्यक्तिगत अनुभव और चमत्कार

मंदिर से जुड़ी आस्था के अनगिनत किस्से स्थानीय लोग साझा करते हैं। श्रद्धालु प्रियंका पाण्डेय का कहना है कि वह नियमित रूप से यहाँ हाजिरी लगाती हैं और उन्होंने परिवार की सुरक्षा के साथ अपना घर बनवाने की मन्नत माँगी थी जो अब पूरी हो रही है। बबलू प्रजापति ने बताया कि उनकी माता रानी में अगाध श्रद्धा है और उन्होंने अन्य भक्तों के सहयोग से परिसर में एक विशाल शिव मंदिर का निर्माण करवाया है जो सिर्फ देवी की कृपा से ही संभव हुआ है। इसके अलावा कृष्णा कुमारी ने साझा किया कि माँ ने उन्हें वंश, पुत्र, पौत्र, पुत्रवधू और पर्याप्त धन-दौलत से नवाजा है।

सवाल-जवाब

बड़ी काली मंदिर कहाँ स्थित है?
यह प्राचीन मंदिर उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रसड़ा कस्बे में स्थित है।
इस मंदिर की वास्तुकला की क्या विशेषता है?
इस मंदिर की अनूठी वास्तुकला और नक्काशी को महाराष्ट्र से आए कुशल कारीगरों ने तैयार किया है।
मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य कब और किसने करवाया था?
इस मंदिर का जीर्णोद्धार 2 साल पहले रामचंद्र सिंह द्वारा करवाया गया था।
भक्त मनोकामना पूरी होने पर मंदिर में क्या चढ़ाते हैं?
मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर में घंटा बांधते हैं या रक्षासूत्र अर्पित करते हैं।
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