उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक नगर आगरा में अनेक ऐसे प्राचीन और पवित्र देवालय हैं, जिनकी चमत्कारी मान्यताएं और धार्मिक इतिहास श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। आगरा के सिकंदरा अंतर्गत पश्चिमपुरी इलाके में स्थित पूर्णमासी कालरात्रि मंदिर ऐसा ही एक मुख्य धार्मिक स्थल है। यहाँ रोजाना सैकड़ों की संख्या में भक्त मां कालरात्रि और मां काली की पूजा-अर्चना के लिए एकत्र होते हैं। मंदिर के प्रांगण में मौजूद मां के पवित्र चरण चिन्हों के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं, क्योंकि इस स्थान का सीधा संबंध एक अलौकिक घटना से माना जाता है।
एक किशोर का सपना और मां काली के चरण चिन्हों की खोज
पूर्णमासी कालरात्रि मंदिर के निर्माण और स्थापना की कहानी काफी रहस्यमयी और रोचक है। स्थानीय मान्यताओं और जनश्रुतियों के अनुसार, मंदिर निर्माण से पूर्व इस स्थान पर निवास करने वाले एक स्थानीय परिवार के लगभग 15 वर्ष के बच्चे को सपने में मां काली का अलौकिक रूप दिखाई दिया था। स्वप्न के दौरान मां काली ने उस बालक को आदेश दिया कि वह तुरंत घर के सामने बने पार्क में जाकर देखे, जहां उनके चरण चिन्ह अंकित हैं।
जब उस 15 वर्षीय बालक ने सुबह जागकर अपने परिवार के सदस्यों को सपने के बारे में विस्तार से बताया, तो शुरुआत में किसी ने भी उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया और इसे महज एक बच्चे का सपना समझकर टाल दिया। हालांकि, जब बालक ने अपनी बात पर जोर दिया और बार-बार इस बात को दोहराया, तब परिवार की एक घरेलू सहायिका सच्चाई जांचने के लिए पार्क में गई। वहां पहुँचकर उसने देखा कि पार्क की मिट्टी पर चावल के दाने के रूप में मां काली के स्पष्ट चरण चिन्ह बने हुए थे। यह दृश्य देखते ही पूरे इलाके में हलचल मच गई और देखते ही देखते आसपास के लोगों की भारी भीड़ उस स्थान पर जमा होने लगी।
मुख्य पुजारी पंडित देवेंद्र तिवारी की जुबानी धार्मिक मान्यता
समय बीतने के साथ ही इस दिव्य स्थान पर भक्तों का तांता लगने लगा और बाद में यहाँ भव्य पूर्णमासी कालरात्रि मंदिर का निर्माण करवाया गया। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित देवेंद्र तिवारी ने इस धार्मिक इतिहास के संबंध में बताया कि जिस स्थान पर मां काली के चरण चिन्ह चावल के स्वरूप में मिले थे, उसी स्थान पर वर्तमान में विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां के पदचिन्हों को नए स्वरूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
मुख्य पुजारी पंडित देवेंद्र तिवारी का कहना है कि आज भी श्रद्धालु उसी मूल स्थान पर जाकर स्थापित किए गए चरण चिन्हों का जलाभिषेक, पूजन और दर्शन करते हैं। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। विशेष रूप से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि पाने के लिए लोग मां कालरात्रि के दरबार में अर्जी लगाते हैं।
शनिवार और नवरात्रि पर उमड़ती है हजारों की भीड़
यद्यपि सामान्य दिनों में भी मंदिर में सुबह और शाम के समय श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहता है, परंतु शनिवार और नवरात्रि के पावन अवसरों पर यहाँ का दृश्य अत्यंत भव्य और भक्तिमय हो जाता है। शनिवार के दिन माँ काली की विशेष पूजा का विधान होने के कारण तड़के से ही हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में कतारबद्ध होने लगते हैं।
नवरात्रि के दौरान तो मंदिर प्रांगण में विशेष धार्मिक अनुष्ठान, चंडी पाठ और अखंड भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। प्रातकाल से ही मंदिर परिसर मां के जयकारों से गूंज उठता है। श्रद्धालु घंटों लाइन में लगकर मां के दिव्य दर्शन करते हैं, माता रानी को चुनरी, नारियल और प्रसाद अर्पित करते हैं तथा अपने परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।



















