जब पंकज त्रिपाठी को पड़ी थीं लाठियां, कभी संजय दत्त के दीवाने थे ये दिग्गज अभिनेताराजनाथ सिंह ने महाराष्ट्र के नेताओं के साथ मिलकर की जवानों के लिए रक्तदान पहलजोधपुर के लोगों के लिए खुशखबरी, 1 सितंबर से छह नए शहरों के लिए शुरू होंगी सीधी उड़ानेंशहनाज गिल का वो भावुक गाना, जिसे सुन आज भी नम हो जाती हैं सिडनाज फैंस की आंखेंभारत तक सीधी ट्रेन चलाने का रूस का प्लान, पाकिस्तान और ईरान से होकर गुजर सकता है नया रेल कॉरिडोरसावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026: अपनों को भेजें महादेव के आशीर्वाद वाले ये खास शुभकामना संदेशमेचेरनिच में जर्मन सैन्य ठिकाने के ऊपर मंडराते मिले ड्रोन, लिपजिग एयरपोर्ट की घटना के बाद बढ़ी चिंताशशि थरूर के बयान से कांग्रेस में मचा सियासी घमासान, केसी वेणुगोपाल ने दी सख्त नसीहत111 साल की चीनी महिला वांग गाइयिंग ने खोले लंबी उम्र के राज, अच्छी सेहत के लिए अपनाती हैं ये अजीब आदतेंमिथुन राशिफल 10 अगस्त: जरूरी फैसलों के लिए शाम का समय रहेगा सबसे मुफीद
बीकानेर की चाय की दुकान पर दिखी नन्ही छिपकली निकली विज्ञान के लिए नई प्रजाति, नाम मिला 'मेसालिना बिश्नोई'विज्ञान
24 जून 2026, 11:30 am (47 दिन पहले)· 2

बीकानेर की चाय की दुकान पर दिखी नन्ही छिपकली निकली विज्ञान के लिए नई प्रजाति, नाम मिला 'मेसालिना बिश्नोई'

बीकानेर के गजनेर इलाके में वैज्ञानिकों को मिली छिपकली की नई प्रजाति को 'मेसालिना बिश्नोई' नाम दिया गया है, जो भारत में मेसालिना जीनस का पहला प्रमाणित रिकॉर्ड है।

राजस्थान के बीकानेर ने एक बार फिर देश का ध्यान अपनी जैव विविधता की ओर खींचा है। गजनेर इलाके में वैज्ञानिकों को छिपकली की एक ऐसी प्रजाति मिली है, जो अब तक विज्ञान की दुनिया में दर्ज नहीं थी। इसे नाम दिया गया है 'मेसालिना बिश्नोई'। खास बात यह है कि यह पूरे भारत में मेसालिना जीनस का पहला प्रमाणित रिकॉर्ड माना जा रहा है। इस खोज ने न सिर्फ थार के रेगिस्तान की छिपी हुई समृद्धि को सामने रखा है, बल्कि प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति बिश्नोई समाज की सदियों पुरानी आस्था को भी वैज्ञानिक मंच पर सम्मान दिलाया है।

दिलचस्प बात यह है कि इतनी बड़ी खोज की शुरुआत एक मामूली पड़ाव से हुई। अगस्त 2025 में जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के वैज्ञानिक और दूसरे शोधकर्ता गजनेर के पास अर्ध-रेगिस्तानी इलाके में फील्ड सर्वे कर रहे थे। गजनेर के वन क्षेत्र की ओर बढ़ते हुए टीम रास्ते में एक चाय की दुकान पर रुकी। वहीं एक छोटी-सी छिपकली ने सबका ध्यान खींच लिया। बाद में उसकी शारीरिक बनावट और डीएनए की बारीकी से जांच की गई, तो पता चला कि यह विज्ञान के लिए बिल्कुल नई प्रजाति है।

ये भी पढ़ें

नाम के पीछे की वजह

अध्ययन के सह-लेखक धर्मेंद्र खंडाल के मुताबिक इस प्रजाति को 'मेसालिना बिश्नोई' नाम जानबूझकर दिया गया है, ताकि वन्यजीवों और प्रकृति के संरक्षण को लेकर बिश्नोई समुदाय की सदियों पुरानी प्रतिबद्धता को सम्मान मिल सके। यह नाम उस समाज को समर्पित है, जिसने पीढ़ियों से पेड़ों और जानवरों की रक्षा को अपने जीवन का हिस्सा बना रखा है।

90 साल पुरानी पहेली का जवाब

राजकीय डूंगर महाविद्यालय के जूलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रताप सिंह बताते हैं कि साल 1935 में ब्रिटिश जीवविज्ञानी मैल्कम ए. स्मिथ ने जैसलमेर इलाके में मेसालिना जीनस की एक प्रजाति का जिक्र किया था। लेकिन उस दावे के पीछे कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं था। अब बीकानेर के गजनेर से मिले नमूनों के डीएनए और मॉर्फोलॉजिकल कैरेक्टर के आधार पर वैज्ञानिक सुमित रॉय और उनकी टीम ने इसे आधिकारिक रूप से नई प्रजाति घोषित किया है। यानी जिसे करीब नौ दशकों तक सिर्फ किताबों के पन्नों में ढूंढा जाता रहा, वह आखिरकार जमीन पर पहचान लिया गया।

कैसी दिखती है यह छिपकली

वैज्ञानिकों के अनुसार यह छिपकली आकार में बेहद छोटी होती है और इसकी लंबाई करीब 39.2 मिलीमीटर है। इसका रंग स्लेटी से लेकर ऑलिव-भूरा तक होता है। गर्दन से पूंछ तक दो साफ धारियां इसकी पहचान हैं। आंखों के पीछे काले निशान, शरीर पर गहरे धब्बे और उन धब्बों के बीच बने सफेद बिंदु इसे बाकी प्रजातियों से अलग बनाते हैं। इसके शरीर का निचला हिस्सा हल्के स्लेटी या मटमैले सफेद रंग का होता है।

थार की जैव विविधता का नया पन्ना

यह छिपकली ऐसे इलाके में मिली, जहां जमीन कठोर और पथरीली थी और रेगिस्तानी वनस्पति बहुत कम थी। यह प्रजाति शुष्क और अर्ध-शुष्क इलाकों में रहना पसंद करती है और खासकर पत्थरीले इलाकों में ज्यादा नजर आती है। सर्वे के दौरान इसके साथ सहगल गेको, स्पॉटेड डेजर्ट रेसर और सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसे दूसरे सरीसृप भी दर्ज किए गए।

डॉ. प्रताप सिंह के मुताबिक फिलहाल इस प्रजाति की जानकारी सिर्फ बीकानेर के गजनेर इलाके से ही मिली है। इसकी असली आबादी का अंदाजा व्यापक सर्वे के बाद ही लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि यह खोज इशारा करती है कि थार के रेगिस्तान में अब भी कई ऐसी जीव प्रजातियां मौजूद हैं, जिनकी वैज्ञानिक पहचान बाकी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज पश्चिमी भारत के शुष्क इलाकों में और ज्यादा टैक्सोनॉमिक सर्वे की जरूरत को रेखांकित करती है। साथ ही यह भी साबित करती है कि थार सिर्फ कठोर जलवायु वाला सूखा इलाका नहीं, बल्कि अद्भुत और अब तक अनजानी जैव विविधता का अहम केंद्र भी है।

सवाल-जवाब

नई छिपकली प्रजाति का नाम क्या रखा गया है?
इस नई प्रजाति का नाम 'मेसालिना बिश्नोई' रखा गया है।
यह छिपकली कहां मिली?
यह राजस्थान के बीकानेर जिले के गजनेर इलाके में अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्र में मिली।
इसे यह नाम क्यों दिया गया?
वन्यजीवों और प्रकृति संरक्षण के प्रति बिश्नोई समाज की सदियों पुरानी प्रतिबद्धता को सम्मान देने के लिए इसे 'मेसालिना बिश्नोई' नाम दिया गया।
यह खोज कब और किसने की?
अगस्त 2025 में जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के वैज्ञानिकों और अन्य शोधकर्ताओं ने फील्ड सर्वे के दौरान यह खोज की, और वैज्ञानिक सुमित रॉय व उनकी टीम ने इसे नई प्रजाति घोषित किया।
इस छिपकली की पहचान कैसे होती है?
यह करीब 39.2 मिलीमीटर लंबी होती है, इसका रंग स्लेटी से ऑलिव-भूरा होता है, गर्दन से पूंछ तक दो धारियां और शरीर पर गहरे धब्बों के बीच सफेद बिंदु इसकी पहचान हैं।
1935 का इससे क्या संबंध है?
साल 1935 में ब्रिटिश जीवविज्ञानी मैल्कम ए. स्मिथ ने जैसलमेर में मेसालिना जीनस की एक प्रजाति का जिक्र किया था, लेकिन उसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं था, जो अब बीकानेर के नमूनों से मिला है।
क्या यह प्रजाति और इलाकों में भी पाई जाती है?
फिलहाल इसकी जानकारी सिर्फ बीकानेर के गजनेर इलाके से मिली है, असली आबादी व्यापक सर्वे के बाद ही पता चलेगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR