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चीन ने रचा इंजीनियरिंग का इतिहास, समुद्र के नीचे बना दी दुनिया की सबसे लंबी हाई-स्पीड रेल सुरंगविज्ञान
18 अग॰ 2026, 3:18 pm (1 घंटे पहले)· 2

चीन ने रचा इंजीनियरिंग का इतिहास, समुद्र के नीचे बना दी दुनिया की सबसे लंबी हाई-स्पीड रेल सुरंग

चीन अपने पूर्वी प्रांत झेजियांग में Ningbo से Zhoushan को जोड़ने वाली Jintang अंडरसी टनल पर तेजी से काम कर रहा है। हाल ही में इंजीनियरों ने इसके बेहद कठिन कटिंग टूल्स बदलने का काम पूरा कर लिया है, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना को एक नया मुकाम मिला है।

दुनियाभर में ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में चीन लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। सामान्य उत्पादों के निर्माण से आगे बढ़कर यह देश अब ऐसी विशाल परियोजनाओं को साकार कर रहा है जो देखने में किसी चमत्कार जैसी प्रतीत होती हैं। वर्तमान में चीन के पूर्वी प्रांत झेजियांग में एक ऐसी ही अनूठी परियोजना पर काम चल रहा है, जो महासागर की गहराइयों के भीतर दुनिया की सबसे लंबी हाई-स्पीड रेल सुरंग का निर्माण कर रही है। जहां कई विकसित देशों में आज भी तेज रफ्तार रेलगाड़ियों का नेटवर्क बिछाना एक चुनौती बना हुआ है, वहीं ड्रैगन गहरे खारे पानी के बीच से ट्रेन गुजारने की तैयारी में है।

निंगबो-झोउशान हाई-स्पीड रेलवे की प्रगति

ग्लोबल टाइम्स के आंकड़ों और विवरण के अनुसार, Ningbo-Zhoushan हाई-स्पीड रेलवे के तहत Jintang अंडरसी टनल का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस परियोजना से जुड़े इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने हाल ही में एक बेहद जटिल और महत्वपूर्ण चरण सफलतापूर्वक पार कर लिया है। निर्माण टीम ने अत्यधिक जल दबाव और कठिन परिस्थितियों के बीच केवल 21 दिनों की अवधि में टनल के भीतर 104 शील्ड कटिंग टूल्स की पूरी तरह से जांच करके उन्हें बदलने का चुनौतीपूर्ण कार्य संपन्न किया है। जानकारों के अनुसार यह इस पूरी हाई-स्पीड रेल सुरंग के निर्माण का सबसे कठिन और जोखिम भरा पड़ाव था।

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अत्यधिक दबाव और तकनीकी सफलता

यह महत्वपूर्ण उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि चीन द्वारा स्वदेशी तकनीक से विकसित मजबूत प्रणालियों ने लंबे समय तक अत्यधिक दबाव झेलने की इस कठिन परीक्षा को सफलतापूर्वक पास कर लिया है। समुद्र के भीतर आकार ले रही Jintang टनल की कुल लंबाई 16.18 किलोमीटर है, जिसमें से 11.21 किलोमीटर का हिस्सा शील्ड सेक्शन के रूप में सबसे अहम माना गया है। यह सुरंग निंगबो शहर को झोउशान द्वीपों के साथ आपस में जोड़ेगी।

यात्रारूप और समय में भारी कमी

वर्तमान समय में सड़क मार्ग या फेरी के माध्यम से निंगबो से झोउशान की इस यात्रा को पूरा करने में लगभग डेढ़ से दो घंटे का समय लग जाता है। हालांकि, इस अत्याधुनिक रेलवे लाइन के शुरू हो जाने के बाद दोनों शहरों के बीच की यह पूरी दूरी सिमटकर मात्र 26 मिनट रह जाएगी। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यात्रियों का यह सफर पूरी तरह से समुद्र के बीचोंबीच बनी टनल के अंदर से होकर गुजरेगा।

इस विशाल परियोजना के तहत दो सुपर-लार्ज डायमीटर वाली शील्ड मशीनें निंगबो और झोउशान के दोनों सिरों से एक-दूसरे की ओर सुरंग की खुदाई कर रही हैं। महाद्वीप की तरफ से आगे बढ़ रही Yongzhou मशीन को कुल 4,940 मीटर की दूरी तय करनी है। इसके रास्ते में कुल 24 प्रकार की नरम और कठोर चट्टानों की परतें आती हैं, और लगभग 70 प्रतिशत मार्ग इन्हीं कठिन परतों से होकर गुजरता है।

चट्टानों की मजबूती और गहराइयों का दबाव

इस क्षेत्र की चट्टानें असाधारण रूप से मजबूत हैं और उनकी कठोरता 191 मेगापास्कल तक दर्ज की गई है। समुद्र तल से 92 मीटर की गहराई वाले सबसे निचले हिस्से में पानी और मिट्टी का दबाव सामान्य से 8.5 गुना अधिक है। इसके अलावा लगभग 2,000 मीटर के दायरे में यह दबाव 6 गुना से भी ज्यादा बना हुआ है। इतने भीषण दबाव के बीच कटिंग टूल्स को बदलना शील्ड टनलिंग का सबसे दुष्कर कार्य माना जाता है।

डीप-सी स्पेस स्टेशन और सैचुरेशन डाइविंग

पारंपरिक वायु दाब विधियों के जरिए काम करने पर एक कर्मचारी एक बार में केवल 40 मिनट ही काम कर सकता था और उसकी गहराई की सीमा भी करीब 60 मीटर तक ही थी। इस भारी बाधा से पार पाने के लिए निर्माण दल ने तीन वर्षों के अथक प्रयासों के बाद गहरे समुद्र की सैचुरेशन डाइविंग तकनीक को अपनाया। उन्होंने शील्ड टनलिंग के लिए देश का पहला घरेलू सैचुरेशन हाइपरबेरिक सिस्टम तैयार किया, जिसे आधिकारिक तौर पर डीप-सी स्पेस स्टेशन का नाम दिया गया है।

इस अत्याधुनिक प्रणाली में रहने, ट्रांसफर करने और नियंत्रण से जुड़े विभिन्न मॉड्यूल शामिल हैं, जिन्हें पूरी तरह से देश के भीतर ही डिजाइन और निर्मित किया गया है। इसमें नौ कर्मचारी लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं। कर्मी ट्रांसफर चैंबर के जरिए सीधे कार्यस्थल तक पहुंचते हैं और एक बार में लगातार आठ घंटे तक काम करने में सक्षम होते हैं। इससे 28 दिनों तक 24 घंटे लगातार शिफ्ट में काम करना संभव हो जाता है। कार्य पूरा होने के बाद केवल एक बार नियंत्रित तरीके से दबाव कम किया जाता है, जिससे बार-बार प्रेशर बदलने से श्रमिकों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले जोखिम नगण्य हो जाते हैं।

परियोजना का वर्तमान स्टेटस

फिलहाल Yongzhou मशीन ने 3,936 मीटर की दूरी तय कर ली है, जो इसके कुल कार्य का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा बनता है और इसे पूरी सफलता के साथ पूरा कर लिया गया है। यह मील का पत्थर केवल एक तकनीकी विजय नहीं है, बल्कि यह वैश्विक मंच पर चीन की अभूतपूर्व इंजीनियरिंग क्षमता और निर्माण कौशल का एक शानदार उदाहरण भी पेश करता है।

सवाल-जवाब

चीन में समुद्र के अंदर कौन सी हाई-स्पीड रेल टनल बनाई जा रही है?
चीन के पूर्वी प्रांत झेजियांग में Ningbo और Zhoushan को जोड़ने वाली Jintang अंडरसी टनल बनाई जा रही है।
जिंतांग टनल की कुल लंबाई कितनी है?
इस अंडरसी टनल की कुल लंबाई 16.18 किलोमीटर है, जिसमें 11.21 किलोमीटर का शील्ड हिस्सा सबसे महत्वपूर्ण है।
इस रेल प्रोजेक्ट के शुरू होने से यात्रा के समय में कितना बदलाव आएगा?
वर्तमान में सड़क या फेरी से लगने वाले डेढ़ से दो घंटे के सफर को रेलवे शुरू होने के बाद सिर्फ 26 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
निर्माण कार्य में उपयोग किए गए हाइपरबेरिक सिस्टम को क्या नाम दिया गया है?
इस स्वदेशी सैचुरेशन हाइपरबेरिक सिस्टम को डीप-सी स्पेस स्टेशन कहा जाता है।
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