भूकंप मापने वाले उपकरण आम तौर पर ज़मीन के नीचे होने वाली हलचल और भूकंपीय तरंगों को रिकॉर्ड करने के लिए लगाए जाते हैं। लेकिन इस बार वर्ल्ड कप के दौरान बर्गेन में कुछ अलग ही नज़ारा देखने को मिला। यूनिवर्सिटी ऑफ बर्गेन के कैंपस के एक बेसमेंट में रखे सीस्मोमीटर ने नॉर्वे की टीम के मैचों के दौरान ऐसे अजीब संकेत दर्ज किए, जो आम तौर पर भूकंप के वक्त ही दिखते हैं। खास बात यह है कि यह उपकरण इतना संवेदनशील है कि एक मिलीमीटर के दस लाखवें हिस्से जितनी छोटी हलचल को भी पकड़ सकता है।
वैज्ञानिकों ने क्या कहा
प्रोफेसर माथिल्डे सोरेनसन और प्रोफेसर लार्स ओटेमोलर ने अपने नतीजों के साथ जारी एक बयान में कहा कि यह हलचल इस बात का सबूत है कि बर्गेन एक जीवंत शहर है, जिसमें ढेर सारी ऊर्जा भरी हुई है। उन्होंने अपने बयान का अंत बड़े ही जोश के साथ किया, गो बर्गेन, और गो नॉर्वे।
हालैंड के गोल पर साफ दिखे झटके
यूनिवर्सिटी ऑफ बर्गेन की टीम को सबसे पहले यह अजीब संकेत 17 जून को इराक के खिलाफ हुए मुकाबले में नज़र आए। इस मैच में नॉर्वे की टीम ने 4-1 से जीत दर्ज की थी। उपकरण पर दर्ज हुई हलचल उस वक्त और भी ज़्यादा साफ हो गई, जब स्ट्राइकर अर्लिंग हालैंड ने अपने दो में से एक गोल दागा।
इसके कुछ ही दिन बाद, 22 और 23 जून की दरमियानी रात नॉर्वे ने सेनेगल को 3-2 से हराया। इस मैच में भी वही सिलसिला दोहराया गया। नॉर्वे का हर गोल सीस्मोमीटर के आंकड़ों में पहचाने जाने लायक झटकों के रूप में दर्ज हुआ।
आखिर ज़मीन क्यों हिलती है
वैज्ञानिकों के मुताबिक जब हजारों लोग एक साथ चीखते, उछलते और शोर मचाते हैं, तो वे काफी मात्रा में ऊर्जा पैदा करते हैं। यह ऊर्जा इमारतों के रास्ते होते हुए ज़मीन तक पहुंच जाती है। यानी इस बार वर्ल्ड कप के दौरान बर्गेन में लोगों का सामूहिक जोश वैज्ञानिक रूप से नापा जा सका। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब खेल आयोजनों, कॉन्सर्ट या ऐसे ही बड़े जमावड़ों की हलचल इस तरह पकड़ी गई हो, लेकिन बर्गेन शहर का यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि धरती का अध्ययन करने के लिए बने उपकरण भी इंसानी गतिविधियों को कैसे रिकॉर्ड कर लेते हैं।













