मेन के समुद्री तटों पर इस पूरे मौसम ग्रेट व्हाइट शार्क की आमद लगातार चर्चा का विषय बनी रही। अमेरिकी पूर्वी तट के कई हिस्सों में शार्क दिखने के मामले सामने आए, लेकिन मेन राज्य के तटीय क्षेत्रों में यह हलचल असाधारण रूप से ज्यादा दर्ज की गई। दक्षिणी मेन के पाइन पॉइंट बीच के पास महज दो दिनों के भीतर एक दर्जन शार्क देखे जाने की जानकारी दर्ज हुई। जुलाई और अगस्त के महीनों में बार-बार शार्क दिखने के बाद सुरक्षा कारणों से पूरे राज्य के कई समुद्र तटों को अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा। गर्मियों के समापन तक भी यह सिलसिला थमा नहीं, जहां लेबर डे वीकेंड के दौरान वेल्स बीच के करीब एक ग्रेट व्हाइट शार्क नजर आई और उसी छुट्टी के दिन लगभग 30 मील दूर एक मछुआरे के कांटे में एक और शार्क फंसी।
समुद्री तापमान में बदलाव और जटिल पारिस्थितिकी
मेन के तटवर्ती जलक्षेत्र दुनिया के उन हिस्सों में शामिल हैं जो सबसे तेजी से गर्म हो रहे हैं, और हाल के दौर में अटलांटिक महासागर ने कई समुद्री हीटवेव का सामना किया है। अल नीनो मौसम चक्र ने भी वैश्विक तापमान को बढ़ाने में भूमिका निभाई है। इन परिस्थितियों के बावजूद, शार्क की बढ़ती मौजूदगी को केवल जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखना पूरी सच्चाई नहीं है। इसके पीछे दशकों पहले शुरू किए गए वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की लंबी सफलता और समुद्र तटों पर उन्नत निगरानी उपकरणों का बढ़ता इस्तेमाल एक बड़ी वजह बनकर उभरा है।
संरक्षण नीतियों का कई दशकों बाद दिखा असर
साल 1975 में स्टीवन स्पीलबर्ग की मशहूर फिल्म जॉज के रिलीज होने के दौर में ग्रेट व्हाइट शार्क भारी संकट से घिरी थीं। अत्यधिक शिकार, मछली पकड़ने के जालों में अनजाने में फंसने और ट्रॉफी हंटिंग के चलते अमेरिका के पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटों पर इनकी आबादी काफी घट गई थी। इस गिरावट को रोकने के लिए 1990 के दशक में संघीय स्तर पर कड़े संरक्षण नियम लागू किए गए। ये कानूनी सुरक्षा उपाय न केवल शार्क के लिए बल्कि उनके मुख्य शिकार ग्रे सील के लिए भी तय किए गए थे।
शार्क की जैविक संरचना और प्रजनन चक्र को देखते हुए संरक्षण का असर दिखने में लंबा वक्त लगता है। नर ग्रेट व्हाइट शार्क को वयस्क होने में 26 साल का समय लगता है, जबकि मादा शार्क को पूरी तरह वयस्क होने में 33 साल तक लग जाते हैं। संरक्षण नियम लागू होने के बाद से बीता समय इस जैविक समय सीमा से पूरी तरह मेल खाता है। वैज्ञानिक अध्ययनों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कानूनी सुरक्षा मिलने से पूर्वी तट पर शार्क और सील दोनों की संख्या में ठोस सुधार हुआ है। मेन के प्राकृतिक संसाधन विभाग के शार्क विशेषज्ञ मैथ्यू डेविस और मेन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मरीन साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर वाल्टर गोलेट का मानना है कि पिछली कई दशकों की तुलना में इस मौसम तटों पर ग्रेट व्हाइट शार्क की वास्तविक तादाद बढ़ी है।
ट्रैकिंग सिस्टम और निगरानी की सीमाएं
मेन का राज्य शार्क निगरानी कार्यक्रम एकाउस्टिक टेलीमेट्री तकनीक पर काम करता है। इस प्रक्रिया में शार्क के शरीर पर एक इलेक्ट्रॉनिक टैग लगाया जाता है, जो पानी के भीतर एक खास इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल छोड़ता है। समुद्र के भीतर स्थापित स्टेशन इस सिग्नल को पकड़ते हैं और टैग की गई शार्क की आवाजाही को दर्ज करते हैं। हालांकि, मेन का यह ट्रैकिंग कार्यक्रम एक दशक से भी कम पुराना है। मैथ्यू डेविस बताते हैं कि हर शार्क पर टैग नहीं लगा है, जिसकी वजह से इस बढ़ोतरी के हर पहलू को बिल्कुल सटीक तरीके से समझ पाना अभी भी एक चुनौती बना हुआ है।
शारीरिक तापमान नियंत्रण और शिकार के ठिकाने
जलवायु परिवर्तन ने महासागरों में बड़े बदलाव किए हैं और कई समुद्री प्रजातियों को ठंडे पानी की तलाश में उत्तर की ओर खिसकने पर मजबूर किया है। लेकिन ग्रेट व्हाइट शार्क पर अत्यधिक गर्मी का असर सीधा और एकतरफा नहीं है। कुछ अध्ययनों का सुझाव रहा है कि बहुत अधिक तापमान होने पर शार्क अत्यधिक गर्म हो सकती हैं, जिससे वे सुस्त हो सकती हैं या ठंडे पानी की ओर जाने को मजबूर हो सकती हैं।
इसके विपरीत, ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के कोस्टल ओरेगन मरीन एक्सपेरिमेंट स्टेशन के निदेशक जेम्स सुलिकोव्स्की के अनुसार ग्रेट व्हाइट शार्क अपने शरीर का तापमान खुद नियंत्रित करने में सक्षम होती हैं। वे बताते हैं कि यह क्षमता उन्हें तापमान के भारी उतार-चढ़ाव को आसानी से झेलने में मदद करती है। मैथ्यू डेविस का कहना है कि जलवायु परिवर्तन का असर सीधे तापमान के बजाय शिकार प्रजातियों के व्यवहार के जरिए ज्यादा दिखाई देता है। जब तटीय पानी हल्का गर्म रहता है, तो शिकार बनने वाले जीव उन इलाकों में पहले की तुलना में ज्यादा समय तक टिके रहते हैं। इसका सीधा परिणाम यह होता है कि ग्रेट व्हाइट शार्क भी उन क्षेत्रों में अधिक समय बिताती हैं जहां वे पहले केवल कुछ महीनों के लिए ही आती थीं।
स्मार्टफोन, ड्रोन और समुद्र पर नई नजरें
शार्क दिखने की बढ़ती घटनाओं के पीछे मानवीय व्यवहार और आधुनिक गैजेट्स की भी बड़ी भूमिका है। गर्म मौसम के चलते बड़ी संख्या में लोग समुद्र तटों का रुख कर रहे हैं। वर्ष 2026 में लगभग हर तटयात्री के पास आधुनिक तकनीक मौजूद है, जिनमें आईफोन से लेकर शौकिया तौर पर उड़ाए जाने वाले ड्रोन शामिल हैं। ये उपकरण हवा और किनारे से पानी की सतह पर मौजूद समुद्री जीवों की हाई-क्वालिटी फुटेज रिकॉर्ड कर लेते हैं। विशेषज्ञ इस बात पर एकमत हैं कि मेन में शार्क दिखने की बाढ़ का एक बड़ा कारण यह भी है कि लोगों के पास समुद्र पर नजर रखने के लिए पहले से कहीं बेहतर और आधुनिक साधन उपलब्ध हैं। वाल्टर गोलेट के अनुसार समुद्र में शार्क की संख्या पहले से अधिक हुई है, लेकिन साथ ही उन्हें देख पाना भी बहुत आसान हो गया है।



















