जब भी हम ऊंचे और विशाल पहाड़ों के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में बर्फ से ढकी चोटियों और ऊंचे पर्वतों की तस्वीरें उभरने लगती हैं। हम बचपन से पढ़ते आ रहे हैं कि माउंट एवरेस्ट ही इस दुनिया की सबसे ऊंची चोटी है और इसकी ऊंचाई के सामने सब बौने नजर आते हैं। लेकिन सच तो यह है कि पृथ्वी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा नीले समंदर से ढका हुआ है, और इस विशाल जलराशि के नीचे एक ऐसी अद्भुत दुनिया छिपी है जिसके रहस्य हमारी सोच से आज भी बहुत दूर हैं। समुद्र की गहराइयों में पहाड़ों का एक ऐसा साम्राज्य है, जिसके सामने जमीन पर मौजूद पर्वत भी बहुत छोटे नजर आते हैं।
मौना केआ: पृथ्वी का असली और छुपा हुआ सबसे ऊंचा पर्वत
हवाई द्वीप समूह के पास स्थित मौना केआ एक ऐसा पर्वत है जिसे अगर समुद्र की तलहटी से मापा जाए, तो यह दुनिया का सबसे ऊंचा पहाड़ बन जाता है। जमीन से देखने पर यह माउंट एवरेस्ट जितना ऊंचा नहीं लगता क्योंकि इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा प्रशांत महासागर के ठंडे पानी में डूबा हुआ है। लेकिन जब हम इस पहाड़ की ऊंचाई को समुद्र की गहराई में मौजूद इसके आधार से लेकर इसकी चोटी तक नापते हैं, तो यह लगभग 10,210 मीटर बैठती है। यह ऊंचाई माउंट एवरेस्ट की कुल ऊंचाई से भी बहुत अधिक है, जो यह साबित करती है कि प्रकृति ने पानी के अंदर एक विशालकाय पर्वत छिपा रखा है जिसने ऊंचाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
सीमाउंट क्या हैं और इनका निर्माण कैसे होता है?
समुद्र के नीचे मौजूद इन पहाड़ों को वैज्ञानिक भाषा में सीमाउंट कहा जाता है। ये वास्तव में पानी के अंदर डूबे हुए सक्रिय या शांत ज्वालामुखी होते हैं। समय-समय पर होने वाली भूगर्भीय गतिविधियों और ज्वालामुखी विस्फोटों के कारण ये समुद्र की सतह के नीचे उठते हैं। ये पर्वत समंदर के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि ये समुद्री जीवन को फलने-फूलने के लिए एक अनोखा आधार प्रदान करते हैं। वैज्ञानिक जब इन गहराइयों की जांच करते हैं, तो उन्हें ऐसे कई तथ्य मिलते हैं जो हमारी किताबों में लिखे ज्ञान से बिल्कुल अलग हैं।
मिड-ओशन रिज: पृथ्वी को घेरे हुए 65,000 किलोमीटर लंबी श्रृंखला
समंदर के नीचे केवल एक अकेला पहाड़ ही नहीं है, बल्कि वहां पहाड़ों का एक अंतहीन सिलसिला फैला हुआ है। इसे मिड-ओशन रिज कहा जाता है। यह पूरी पृथ्वी की सबसे लंबी पर्वत श्रृंखला है, जिसके सामने जमीन पर मौजूद कोई भी पर्वतमाला बहुत छोटी नजर आती है। यह महाकाय श्रृंखला लगभग 65,000 किलोमीटर लंबी है और पूरी पृथ्वी के चारों ओर एक बेल्ट या सिलाई की तरह लिपटी हुई है। इसके विस्तार और भव्यता की तुलना जमीन के किसी भी हिस्से से नहीं की जा सकती है।
गहरे समुद्र के हाइड्रोथर्मल वेंट्स और जीवन का अनोखा संसार
इंसानों ने अंतरिक्ष के रहस्यों को जानने में बहुत प्रगति कर ली है, लेकिन हम अपने ही ग्रह के समंदर के नीचे छिपे इन पहाड़ों के बारे में बहुत कम जान पाए हैं। इन पानी के नीचे के पहाड़ों के बीच से लगातार गर्म मैग्मा बाहर निकलता रहता है। इस प्रक्रिया से पानी के अंदर बेहद गर्म पानी के सोते बनते हैं, जिन्हें हाइड्रोथर्मल वेंट्स कहा जाता है। इन वेंट्स के आसपास ऐसी अनोखी और अजीबोगरीब प्रजातियां रहती हैं, जिन्हें जीवित रहने के लिए सूरज की रोशनी की बिल्कुल जरूरत नहीं होती। यह दुनिया विज्ञान को लगातार हैरान करती आ रही है और यहां का जीवन पूरी तरह से रसायनों पर निर्भर करता है।



















