भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार को बड़ी जानकारी देते हुए कहा है कि गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल सिस्टम से जुड़े तीन बड़े परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं. ये तीनों परीक्षण अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और मॉड्यूल की मजबूती से जुड़े अहम पहलुओं की जांच के लिए किए गए थे, और भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की तैयारियों में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं.
तीन परीक्षणों में क्या-क्या जांचा गया
पहला परीक्षण उस स्थिति से जुड़ा था जब मिशन पूरा होने के बाद अंतरिक्ष यात्री समुद्र में उतरेंगे. स्पलैशडाउन के बाद यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना मिशन की सबसे अहम जरूरतों में गिना जाता है, इसलिए इस चरण को विशेष तवज्जो दी गई. दूसरे परीक्षण में उस प्रणाली को परखा गया जो क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल को आपस में जोड़ती है. क्रू मॉड्यूल में अंतरिक्ष यात्री रहते हैं, जबकि सर्विस मॉड्यूल यान को ऊर्जा और प्रणोदन यानी प्रोपल्शन मुहैया कराता है. मिशन के दौरान एक तय समय पर दोनों हिस्सों को अलग होना होता है, इसलिए यह सेपरेशन प्रक्रिया सुचारू रूप से काम करे, यह जांचना जरूरी था. तीसरे परीक्षण में एपेक्स कवर के अलग होने के दौरान क्रू मॉड्यूल की संरचना कितनी मजबूत रहती है, इसकी पुष्टि की गई.
कुछ दिन पहले हुआ था मुख्य पैराशूट का परीक्षण
इन तीन परीक्षणों से ठीक पहले इसरो ने गगनयान के क्रू मॉड्यूल के मुख्य पैराशूट का भी एक बड़ा परीक्षण पूरा किया था. यह परीक्षण 7 जुलाई को मध्यप्रदेश के श्योपुर में स्थित हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास संस्थापन यानी एडीआरडीई के ड्रॉप जोन में किया गया. इसरो ने अगले ही दिन 8 जुलाई को जारी बयान में बताया कि इस परीक्षण का मकसद पहले मानवरहित गगनयान जी1 मिशन के दौरान ज़्यादा से ज़्यादा संभावित भार की स्थिति में मुख्य पैराशूट की मजबूती और डिजाइन को परखना था.
2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से गिराई गई असेंबली
परीक्षण के दौरान एक मुख्य पैराशूट और डमी भार से युक्त सिम्युलेटेड असेंबली को भारतीय वायु सेना के आईएल-76 विमान से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से गिराया गया. अलग होते ही सबसे पहले एक ड्रोग पैराशूट खोला गया. इस तरह के पैराशूट क्रू मॉड्यूल को स्थिर करने और उसकी रफ्तार को काफी हद तक कम करने के लिए जाने जाते हैं. इसके बाद मुख्य पैराशूट खोला गया, जिसने पेलोड की गति को धीमा करके सुरक्षित टर्मिनल गति तक ला दिया.
यह पांचवां आईमैट परीक्षण, भरोसा और मजबूत हुआ
इसरो के मुताबिक यह गगनयान मिशन के लिए महत्वपूर्ण मुख्य पैराशूट प्रणाली के प्रमाणीकरण के मकसद से आयोजित एकीकृत मुख्य पैराशूट एयरड्रॉप परीक्षण यानी आईमैट शृंखला का पांचवां परीक्षण था. इसरो ने कहा कि आईमैट-05 के सफल परीक्षण से यह भरोसा और बढ़ गया है कि गगनयान के पहले मानवरहित मिशन जी-1 में मुख्य पैराशूट प्रणाली प्रभावी ढंग से काम करेगी. गगनयान के क्रू मॉड्यूल में चार अलग-अलग तरह के कुल 10 पैराशूट लगे हैं.
कैसे काम करते हैं ये 10 पैराशूट
इस पूरी प्रणाली में सबसे पहले दो एपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट काम करते हैं, जो नीचे उतर रहे यान से एपेक्स कवर को अलग करते हैं. यह एपेक्स कवर दरअसल पुनः प्रवेश यानी रीएंट्री के दौरान पैदा होने वाली भीषण गर्मी से पैराशूट कंपार्टमेंट की रक्षा करता है. इसके बाद दो ड्रोग पैराशूट और तीन पायलट पैराशूट सक्रिय होते हैं, जो स्वतंत्र रूप से काम करते हुए तीन मुख्य पैराशूट को बाहर निकालने और तैनात करने का जिम्मा संभालते हैं. इस तरह चरणबद्ध तरीके से खुलने वाले पैराशूट क्रू मॉड्यूल की रफ्तार को धीरे-धीरे कम करते हुए उसे सुरक्षित लैंडिंग तक पहुंचाते हैं.











