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DTU के वैज्ञानिकों ने रचा इतिहास, ओआरसीए कंप्यूटिंग और AI की मदद से बनाए नए पेप्टाइड्सविज्ञान
12 जुल॰ 2026, 9:48 pm (92 दिन पहले)· 2

DTU के वैज्ञानिकों ने रचा इतिहास, ओआरसीए कंप्यूटिंग और AI की मदद से बनाए नए पेप्टाइड्स

टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ डेनमार्क के शोधकर्ताओं ने जेनेरेटिव AI और छोटे आकार के क्वांटम कंप्यूटर को मिलाकर नए पेप्टाइड्स का सफलतापूर्वक निर्माण किया है, जिससे टीकों के विकास को नई रफ्तार मिल सकती है।

वैज्ञानिकों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल करते हुए जेनेरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग के अनोखे मेल से पूरी तरह नए पेप्टाइड्स का निर्माण किया है। टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ डेनमार्क (DTU) के शोधकर्ताओं ने ब्रिटिश स्टार्टअप ओआरसीए कंप्यूटिंग द्वारा बनाए गए एक प्रिंटर के आकार के क्वांटम कंप्यूटर का उपयोग करके इस काम को अंजाम दिया। यह प्रणाली क्वांटम मशीनों को पारंपरिक प्रोसेसर के साथ जोड़कर काम करती है, जिससे AI की रफ्तार काफी बढ़ गई। इस हाइब्रिड तकनीक की मदद से वैज्ञानिकों ने नए पेप्टाइड्स तैयार किए हैं। पेप्टाइड्स अमीनो एसिड की छोटी कड़ियां होते हैं, जो मानव शरीर में खास तरह के प्रोटीन से जुड़ने की क्षमता रखते हैं। प्रोटीन के साथ पेप्टाइड्स का यह जुड़ाव वैक्सीन यानी टीका विकसित करने की प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

सप्ताहांत की मेहनत और बजट का अनोखा इस्तेमाल

इस ऐतिहासिक खोज की कहानी आम वैज्ञानिक प्रोजेक्ट्स से काफी अलग है। इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व करने वाले टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ डेनमार्क के प्रोफेसर टिमोथी पैट्रिक जेनकिंस ने साझा किया कि उनकी टीम ने वीकेंड यानी सप्ताहांत पर अतिरिक्त काम किया और दूसरे प्रोजेक्ट्स से बचे हुए पैसों को इकट्ठा करके इस शोध को पूरा किया। वैज्ञानिकों को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि ज्यादातर पारंपरिक संस्थान ऐसे क्रांतिकारी और अत्यधिक आधुनिक विज्ञान को फंडिंग देने से कतराते हैं, क्योंकि उन्हें इसमें जोखिम बहुत ज्यादा लगता है। शोधकर्ताओं का मानना था कि संशयवादी लोगों को यह समझाने के लिए कि उनके ये वैज्ञानिक अनुमान असल दुनिया में भी सटीक काम करते हैं, उन्हें एक ठोस और व्यावहारिक मॉडल बनाकर दिखाना जरूरी था।

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दिलचस्प बात यह है कि खुद प्रोफेसर पैट्रिक जेनकिंस पहले इस तकनीक को लेकर काफी शंकित थे। उन्होंने हंसते हुए स्वीकार किया कि वे खुद भी क्वांटम कंप्यूटिंग को लेकर बड़े संशयवादी हुआ करते थे। उन्हें लगता था कि उनके काम में इस तकनीक का व्यावहारिक उपयोग होने में अभी कई दशक का समय लगेगा। लेकिन प्रयोगशाला में जब उन्होंने और उनकी टीम ने इन नए पेप्टाइड्स का निर्माण किया और उनकी प्रोटीन से जुड़ने की क्षमता का परीक्षण किया, तो नतीजे हैरान करने वाले थे। इस नए मॉडल ने अपने पारंपरिक कंप्यूटर आधारित मॉडल की तुलना में बहुत बेहतर पेप्टाइड्स तैयार किए। सबसे बेहतरीन नतीजे उन मामलों में देखने को मिले जहां ट्रेनिंग के लिए डेटा बहुत सीमित या दुर्लभ था।

वैश्विक स्वास्थ्य असमानता को दूर करने की कोशिश

इस तकनीक से तैयार पेप्टाइड्स की मदद से व्यक्तिगत इम्यूनोथेरेपी और टीकों के विकास को बहुत तेज गति दी जा सकती है। इसके अलावा, उन आबादी समूहों के लिए भी दवाओं के प्रभाव को सुधारा जा सकता है जिन पर अब तक पर्याप्त शोध नहीं हुआ है। चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी समस्या यह है कि अधिकांश जेनेटिक रिसर्च और डेटा पश्चिमी देशों की आबादी पर केंद्रित होते हैं। इस कारण एशिया और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों की विविध आबादी के लिए प्रभावी पेप्टाइड्स विकसित करना कठिन हो जाता है, क्योंकि वहां की जेनेटिक विविधता का डेटा बहुत कम उपलब्ध है।

शोधकर्ताओं ने यह अनुमान लगाया कि यदि वे अपने इस काम में क्वांटम कंप्यूटर का उपयोग करेंगे, तो वे अधिक विविध प्रकार के पेप्टाइड्स का निर्माण कर सकेंगे। खासकर उन मरीजों और जेनेटिक समूहों के लिए जहां डेटा की भारी कमी है। दरअसल, इससे पहले इमेज यानी तस्वीरें बनाने के काम में क्वांटम कंप्यूटरों ने बेहद शानदार और विविध नतीजे दिए थे, जिसे देखते हुए वैज्ञानिकों ने चिकित्सा अनुसंधान में भी इसी सिद्धांत को लागू करने का फैसला किया।

हार्डवेयर की सीमाएं और भविष्य की राह

भले ही यह तकनीक भविष्य के लिए बेहद उम्मीद जगाती है, लेकिन यह रातों-रात चिकित्सा जगत में कोई क्रांति नहीं लाने वाली है। इसका मुख्य कारण यह है कि वर्तमान क्वांटम कंप्यूटर अभी भी बहुत छोटे और सीमित क्षमता वाले हैं। वे इतने बड़े नहीं हैं कि बहुत बड़े पैमाने पर चलने वाले सबसे आधुनिक AI मॉडल्स को पूरी तरह संभाल सकें। इसलिए कई मामलों में सामान्य या पारंपरिक सुपरकंप्यूटर अब भी बेहतर परिणाम दे सकते हैं।

टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ डेनमार्क के पीएचडी छात्र जोनाथन फंक ने स्पष्ट किया कि वर्तमान क्वांटम कंप्यूटर अभी बहुत शक्तिशाली नहीं हैं। इस वजह से वे सामान्य आकार के एंटीबॉडी की जटिल संरचना को इसके जरिए कोड नहीं कर सके, जबकि प्रयोगशालाओं में आमतौर पर एंटीबॉडी पर ही काम किया जाता है। इसके अलावा, किसी खास जीन से जुड़ने वाले पेप्टाइड की खोज करना वैक्सीन विकास का सिर्फ एक शुरुआती चरण है, और केवल इससे ही पूरी दवा बनकर तैयार नहीं हो जाती।

व्यावसायिक उपयोग और भविष्य की योजनाएं

औद्योगिक कंपनियां भी लंबे समय से क्वांटम तकनीक को लेकर संशय में रही हैं। ओआरसीए कंप्यूटिंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रिचर्ड मरे ने बताया कि कई कंपनियां क्वांटम तकनीक को बहुत धुंधला और भविष्य की बात मानती हैं, क्योंकि अभी तक इसके तत्काल और व्यावहारिक लाभ के बहुत मजबूत उदाहरण सामने नहीं आए थे। मरे के अनुसार, यह नया शोध दिखाता है कि क्वांटम कंप्यूटिंग का बहुत जल्द व्यावसायिक इस्तेमाल संभव है। उनकी कंपनी इस तकनीक का उपयोग ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी BP के साथ रसायन विज्ञान में और वाहन निर्माता कंपनी टोयोटा के साथ उनकी डिजाइनिंग प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाने के लिए भी कर रही है।

डेनमार्क की यह वैज्ञानिक टीम अब इस तकनीक का उपयोग और अधिक जटिल मॉडल्स तथा बड़े प्रोटीनों पर करने की तैयारी कर रही है। प्रोफेसर पैट्रिक जेनकिंस का कहना है कि यह शोध उन उपेक्षित बीमारियों के इलाज की खोज में बेहद मददगार साबित हो सकता है जिन्हें अनुसंधान के लिए बहुत कम बजट मिलता है। इसके साथ ही, वे अब सांप के काटने के इलाज के लिए सिंथेटिक एंटीडोट (जहरनाशक) तैयार करने की दिशा में भी इस क्वांटम और जेनेरेटिव AI तकनीक के उपयोग पर विचार कर रहे हैं। सांप के जहर में जहरीले प्रोटीनों का एक बेहद जटिल मिश्रण होता है, और उन्हें बेअसर करने वाले कृत्रिम अणुओं को डिजाइन करने के लिए लाखों-करोड़ों संयोजनों की जांच करनी पड़ती है। पारंपरिक कंप्यूटर अक्सर इस काम में पीछे रह जाते हैं, लेकिन क्वांटम-आधारित तकनीक इस काम को बेहद आसान बना सकती है।

सवाल-जवाब

वैज्ञानिकों ने क्या उपलब्धि हासिल की है?
उन्होंने जेनेरेटिव AI को क्वांटम कंप्यूटर के साथ जोड़कर सफलतापूर्वक नए पेप्टाइड्स का निर्माण किया है, जो वैक्सीन बनाने के लिए आवश्यक हैं।
यह शोध किसने किया है?
यह प्रोजेक्ट टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ डेनमार्क (DTU) के प्रोफेसर टिमोथी पैट्रिक जेनकिंस और उनकी टीम द्वारा पूरा किया गया है।
इस्तेमाल किए गए क्वांटम कंप्यूटर की क्या खासियत है?
उन्होंने ब्रिटिश स्टार्टअप ओआरसीए कंप्यूटिंग द्वारा बनाए गए एक छोटे, प्रिंटर के आकार के क्वांटम कंप्यूटर का उपयोग किया जो पारंपरिक प्रणालियों के साथ मिलकर काम करता है।
यह एशिया और अफ्रीका के लोगों की कैसे मदद कर सकता है?
क्वांटम-बेस्ड AI बेहद सीमित डेटा होने पर भी विविध पेप्टाइड्स डिजाइन कर सकता है, जिससे पश्चिमी-केंद्रित डेटाबेस के कारण होने वाले जेनेटिक डेटा अंतर को पाटने में मदद मिलेगी।
क्या यह तकनीक तुरंत पूरी दवा प्रणाली को बदल देगी?
नहीं, वर्तमान क्वांटम हार्डवेयर अभी भी बहुत छोटे हैं और पूरे आकार की एंटीबॉडी जैसी जटिल संरचनाओं को संसाधित नहीं कर सकते। पेप्टाइड डिजाइन करना वैक्सीन बनाने का सिर्फ पहला कदम है।
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