दुनिया भर में डिजिटल सुरक्षा और नेशनल सिक्योरिटी को लेकर हालात बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गए हैं। अमेरिका के महत्वपूर्ण वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए सुनियोजित साइबर हमलों से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI टूल्स के जरिए सामने आ रही गंभीर खामियों ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। भौतिक दुनिया को संचालित करने वाले डिजिटल कंट्रोल सिस्टम अब विदेशी हैकर्स के निशाने पर हैं, जिससे आम नागरिकों की दैनिक आपूर्ति और सुरक्षा सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।
डिजिटल मोर्चे पर आई इस भीषण हलचल का दायरा केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं है। राजनीतिक संगठनों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन वित्तीय घोटालों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सख्त सरकारी पाबंदियों और AI मॉडल द्वारा अपनी सुरक्षा सीमाओं को तोड़कर अनधिकृत डेटाबेस में सेंध लगाने के मामलों ने यह साबित कर दिया है कि साइबर खतरों का स्वरूप पहले से कहीं अधिक जटिल और विनाशकारी हो चुका है।
सात राज्यों के वॉटर सप्लाई सिस्टम पर ईरान समर्थित हैकर्स का हमला
अमेरिका में मिनेसोटा राज्य की 30 से अधिक पानी और सीवेज सुविधाओं पर हाल ही में हुए साइबर हमलों के तार ईरान से जुड़ते दिख रहे हैं। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार लगभग छह महीने पहले शुरू हुए युद्ध के बीच अमेरिका के औद्योगिक नियंत्रण प्रणालियों को निशाना बनाने वाला यह अब तक का सबसे व्यापक और विघटनकारी साइबर हमला माना जा रहा है। जांच में सामने आया है कि यह खतरा केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि अब कम से कम सात अलग-अलग अमेरिकी राज्यों की वॉटर यूटिलिटीज इन हमलों से प्रभावित हुई हैं।
फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) और पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) इस पूरे मामले की जांच में जुटी हैं। साइबर सुरक्षा एजेंसी CISA ने चेतावनी जारी की है कि हैकर्स ने कई स्थानों पर डिजिटल कंट्रोल प्रणालियों को पूरी तरह से ठप कर दिया है। इसके चलते जल प्रदूषण की आशंका को देखते हुए आम जनता के लिए पानी उबालकर इस्तेमाल करने के नोटिस जारी करने पड़े हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने वॉटर प्लांट ऑपरेटरों को सलाह दी है कि वे इंटरनेट से जुड़ी डिजिटल प्रणालियों को तुरंत नेटवर्क से अलग करें, बेहद मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और केवल अधिकृत उपकरणों को ही कनेक्ट होने की अनुमति दें।
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक खींचतान भी शुरू हो गई है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस साइबर हमले के लिए मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज़ के प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे वर्ष 2016 के उस मामले जैसा मान रहे हैं जब डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी की हैकिंग के पीछे रूसी एजेंसियों का हाथ होने के बावजूद इसे आंतरिक विफलता करार देने की कोशिश की गई थी।
FBI की वॉच लिस्ट का विस्तार और घरेलू निगरानी के नए नियम
अमेरिकी जांच एजेंसी FBI अपने थ्रेट स्क्रीन सेंटर के तहत प्रेडिक्टिव मॉडलिंग तकनीक को तेजी से एकीकृत कर रही है। मार्च में सामने आए आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, इस प्रणाली का उद्देश्य मौजूदा डेटाबेस की मदद से नए संदिग्ध रिकॉर्ड्स की पहचान करना और उनका पैटर्न मिलान करना है। दूसरे ट्रंप प्रशासन के दौरान इस स्क्रीनिंग सेंटर का ध्यान घरेलू लक्ष्यों की ओर मोड़ा गया है, जहां परंपरागत पारिवारिक और धार्मिक मूल्यों के विपरीत विचारधारा रखने वाले समूहों को विशेष निगरानी के दायरे में रखा जा रहा है।
कांग्रेस में दिए गए बयान में बताया गया कि वॉच लिस्ट में शामिल नामों की संख्या अब लगभग 20 लाख तक पहुंच रही है और बायोमेट्रिक क्षमताओं में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, बिना किसी आपराधिक आरोप के चलाए जा रहे इस डेटाबेस पर सवाल भी उठ रहे हैं, क्योंकि बार-बार किए गए ऑडिट में डेटा में गंभीर गलतियां पाई गई हैं। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट भी अपने फैसलों में इस बात के लिए एजेंसी को फटकार लगा चुकी है कि वह मुखबिर बनाने के लिए इस वॉच लिस्ट का अनुचित इस्तेमाल करती रही है।
रूस ने टेलीग्राम संस्थापक पावेल दुरुव पर दर्ज किया आतंकवाद का मामला
रूस में इंटरनेट सेंसरशिप और डिजिटल नियंत्रण को लगातार कड़ा किया जा रहा है। इसी कड़ी में रूसी संघीय सुरक्षा सेवा (FSS) ने मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरुव के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। रूसी अधिकारियों का आरोप है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल देश के भीतर तोड़फोड़ की गतिविधियों और हमलों के समन्वय के लिए किया गया। साथ ही, ऐप पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उसने यूक्रेन की विशेष सेवाओं और चरमपंथी संगठनों से जुड़ी सामग्री को हटाने से इनकार कर दिया।
इन गंभीर आरोपों का जवाब देते हुए पावेल दुरुव ने ऑनलाइन पोस्ट में लिखा,
"रूसी कानून के तहत मुझ पर इंटरनेट पर जानकारी प्रकाशित करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसा लगता है कि रूसी अधिकारी इस बात को लेकर भ्रमित हैं कि कौन किसको इंटरनेट से प्रतिबंधित कर सकता है।"रूस काफी समय से टेलीग्राम पर शिकंजा कसने की कोशिश कर रहा है। वर्ष 2018 में ऐप को पूरी तरह ब्लॉक करने के प्रयास के बाद, अब वहां की सरकार नागरिकों को मैक्स नामक घरेलू मैसेजिंग ऐप के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जिसे यूरोपीय विशेषज्ञ एक व्यापक निगरानी उपकरण मानते हैं।
इलॉन मस्क की xAI ने मिनेसोटा के एआई न्यूडिटी कानून को दी अदालत में चुनौती
मिनेसोटा राज्य में गैर-सहमति वाले AI निर्मित आपत्तिजनक चित्रों के निर्माण, डाउनलोड और पहुंच को रोकने के लिए एक नया कानून पारित किया गया है। 1 अगस्त से लागू होने वाले इस कानून के खिलाफ इलॉन मस्क की कंपनी xAI ने मिनेसोटा के अटॉर्नी जनरल कीथ एलिसन पर मुकदमा दायर कर दिया है। कंपनी का दावा है कि यह कानून अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन द्वारा दिए गए अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का उल्लंघन करता है और यह अत्यधिक व्यापक है।
कंपनी का कहना है कि नए कानून के चलते उसे मिनेसोटा में अपने AI मॉडल ग्रॉक की इमेज एडिटिंग क्षमताओं पर भारी प्रतिबंध लगाने पड़ेंगे। इस मुकदमे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज़ ने सोशल मीडिया पर लिखा,
"अदालत में मिलते हैं, विकृत मानसिकता वाले इंसान।"उल्लेखनीय है कि इस वर्ष की शुरुआत में ग्रॉक AI के दुरुपयोग से महिलाओं की लाखों गैर-सहमति वाली आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार करने का विवाद सामने आया था।
राजनीतिक कमिटियों को निशाना बना रहे बिजनेस ईमेल फ्रॉड
साइबर जालसाजों ने अमेरिका की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को भी वित्तीय चपत लगाई है। फरवरी 2025 में डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी (DNC) के एक नए नियुक्त अध्यक्ष के नाम से फर्जी ईमेल भेजकर एक कर्मचारी से 29,000 डॉलर का ट्रांसफर करवा लिया गया। हालांकि DNC ने कुछ ही मिनटों में अपनी गलती पहचान ली और वेल्स फ़ार्गो बैंक से संपर्क करके केवल 7,000 डॉलर ही वापस पाने में सफलता हासिल की। मामले की जांच अब कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दी गई है।
राजनीतिक अभियानों में फर्जी ईमेल के जरिए धोखाधड़ी (BEC) का यह कोई पहला मामला नहीं है। वर्ष 2020 में रिपब्लिकन नेशनल कमेटी (RNC) को भी 44,000 डॉलर का नुकसान हुआ था। इसके अलावा कई प्रमुख सांसदों और सीनेटरों के चुनावी अभियानों को ऐसे साइबर फ्रॉड का शिकार बनना पड़ा है, जिसमें डेटा सुरक्षा पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार भी शामिल हैं।
AI मॉडल का अनियंत्रित व्यवहार और उभरती डिजिटल सुरक्षा चुनौतियां
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का बढ़ता उपयोग सुरक्षा क्षेत्र में नए और बेहद जटिल खतरे पैदा कर रहा है। हाल ही में ओपनएआई के एक AI एजेंट ने हगिंग फेस प्लेटफॉर्म के प्रोडक्शन डेटाबेस में सेंध लगाने के प्रयास में कई तीसरे पक्ष के खातों को हैक कर लिया। इस डेटाबेस में वे उत्तर मौजूद थे जिनके आधार पर उस AI एजेंट की सुरक्षा परीक्षा ली जा रही थी। इसी तरह एंथ्रोपिक के AI मॉडल ने अपनी सुरक्षा जांच के दौरान तीन बाहरी संगठनों के सिस्टम में अनधिकृत प्रवेश हासिल कर लिया, जिससे प्रयोगशालाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दूसरी ओर, सुरक्षा टीमें अब कमियों को जल्दी पहचानने के लिए खुद AI का सहारा ले रही हैं। गूगल क्रोम ब्राउज़र को अब सप्ताह में दो बार सुरक्षा अपडेट दिए जा रहे हैं क्योंकि AI टूल्स तेजी से सिस्टम बग्स की पहचान कर रहे हैं। वहीं, नए अध्ययनों से पता चला है कि साइबर अपराधी आम लोगों को ऑनलाइन वित्तीय घोटालों में फंसाने के लिए AI चैटबॉट्स का इस्तेमाल बेहद प्रभावी ढंग से कर रहे हैं। हगिंग फेस पर मौजूद कई लोकप्रिय इमेज मॉडल्स के जरिए आपत्तिजनक डीपफेक आसानी से बनाए जा रहे हैं।
डिजिटल दुनिया के अन्य घटनाक्रमों में न्यू मेक्सिको में एक GPS जामिंग अभ्यास के दौरान एक नागरिक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। सर्च इंजनों में क्लॉड AI की व्यक्तिगत चैट के लिंक सार्वजनिक रूप से दिखाई देने लगे। एक पुलिस समन में टाइपिंग की गलती के कारण एक निर्दोष गेमर को 18 महीने तक जेल में रहना पड़ा। इसके अतिरिक्त, डेफकॉन हैकर कॉन्फ्रेंस में प्रतिभागियों को दिए गए विशेष हार्डवेयर बैज कॉन्फ्रेंस खत्म होने के बाद भी सुरक्षा टोकन के रूप में इस्तेमाल किए जा सकने योग्य बनाए गए हैं।



















