अमरीका के मिनेसोटा राज्य में सार्वजनिक पेयजल और सीवरेज प्रणालियों को निशाना बनाकर किए गए बड़े पैमाने पर साइबर हमलों की जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। उद्योग समूह वॉटर इंफॉर्मेशन शेयरिंग एंड एनालिसिस सेंटर (WaterISAC) द्वारा जारी एक आंतरिक संचार दस्तावेज के अनुसार, मिनेसोटा की दर्जनों जल उपयोगिताओं में हुई इस हैकिंग के तार ईरान समर्थित हैकरों से जुड़े हुए हैं। राज्य स्तरीय खुफिया साझाकरण संस्था मिनेसोटा फ्यूजन सेंटर द्वारा जारी एक चेतावनी का हवाला देते हुए इस नोटिस में कहा गया है कि इन हमलों का पैटर्न अमरीकी साइबर सुरक्षा और अवसंरचना सुरक्षा एजेंसी (CISA) द्वारा पूर्व में चिह्नित ईरानी हैकिंग अभियानों से पूरी तरह मेल खाता है। यद्यपि इन दोनों रिपोर्टों को गैर-वर्गीकृत रखा गया है, लेकिन इन्हें केवल आधिकारिक उपयोग के लिए चिह्नित किया गया है।
नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का गंभीर खतरा
अमरीकी ऊर्जा विभाग के अनुबंध पर कार्यरत और लॉस एलामोस नेशनल लैब्स के पूर्व साइबर सुरक्षा शोधकर्ता जो स्लोविक ने बताया कि जल प्रणालियों जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे पर ईरान का यह हस्तक्षेप एक खतरनाक रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। इस प्रकार के परिष्कृत हमले अब तक मुख्य रूप से रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के दौरान ही देखे गए थे। जो स्लोविक के अनुसार, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में सुरक्षा प्रणालियों और परिचालन मापदंडों के साथ छेड़छाड़ का यह दस्तावेजी प्रमाण बेहद चिंताजनक है। जब इस तरह की हैकिंग क्षमताएं ईरान जैसे राष्ट्र समर्थित तत्वों के पास पहुंच जाती हैं और वे कई स्थानों को एक साथ निशाना बनाने में सक्षम हो जाते हैं, तो यह वैश्विक सुरक्षा समुदाय के लिए एक बड़ी चेतावनी बन जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हैकिंग अभियान केवल मिनेसोटा तक ही सीमित नहीं रहेगा। जो स्लोविक ने रेखांकित किया कि देश और दुनिया भर में ऐसे अनेक औद्योगिक केंद्र और जल सुविधाएं मौजूद हैं जो इसी समान नियंत्रण तकनीक का उपयोग करती हैं। जो हमलावर इस प्रकार के बुनियादी ढांचे को बाधित करने का इरादा और क्षमता दिखा चुका है, उसके लिए अन्य स्थानों पर भी इसी तरह के हमलों को अंजाम देना कोई कठिन कार्य नहीं है।
मिनेसोटा के शहरों में पानी आपूर्ति पर प्रभाव
हाल ही में मिनेसोटा के राज्य अधिकारियों ने खुलासा किया कि राज्य की 30 से अधिक नगर पालिकीय जल और अपशिष्ट जल प्रणालियों में हैकर्स ने घुसपैठ की थी। कई मामलों में हैकरों ने औद्योगिक नियंत्रण प्रणाली और जल संयंत्रों के उपकरणों के बीच होने वाले दूरसंचार संपर्क को पूरी तरह बंद कर दिया था। लगभग 1,700 की आबादी वाले ब्राहम शहर में इस हैकिंग के कारण शहर के वाटर प्लांट को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा था। यद्यपि अब तक पेयजल आपूर्ति में किसी बड़े संकट या पानी के दूषित होने के प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिले हैं, फिर भी सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इन व्यवधानों के चलते कई क्षेत्रों में पानी उबालकर पीने के निर्देश (boil-water notices) जारी करने पड़े हैं और तकनीशियनों को मैन्युअल रूप से संयंत्रों का संचालन करना पड़ रहा है।
सीआईएसए की आपातकालीन गाइडलाइन और तकनीकी सुरक्षा उपाय
साइबर हमलों की इस लहर के बाद सीआईएसए ने एक नया सुरक्षा परामर्श जारी किया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि हैकर्स छोटी और बड़ी हर प्रकार की जल प्रणालियों को निशाना बना रहे हैं। एजेंसी ने सभी जल संयंत्र ऑपरेटरों को तत्काल सख्त सुरक्षा उपाय अपनाने के निर्देश दिए हैं। इनमें प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर्स (PLCs) को सीधे इंटरनेट से हटाना, मजबूत पासवर्ड से पहुंच को सुरक्षित करना और केवल विश्वसनीय उपकरणों को ही नेटवर्क से जुड़ने की अनुमति देना (allow-listing) शामिल है।
सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त रिपोर्ट से पता चलता है कि हमलावर औद्योगिक प्रणालियों को संचालित करने वाली प्रोजेक्ट फाइलों को चुरा रहे थे और उनमें बदलाव कर रहे थे। एफ़बीआई, नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (NSA), अमरीकी साइबर कमान, एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी (EPA) और ऊर्जा विभाग सहित प्रमुख अमरीकी एजेंसियों द्वारा तैयार इस परामर्श में चेतावनी दी गई है कि पीएलसी (PLCs) के डिस्प्ले में बदलाव करने से औद्योगिक संयंत्रों में गंभीर भौतिक क्षति या खतरनाक स्थितियां पैदा हो सकती हैं, जिससे भारी वित्तीय नुकसान होता है।
ईरानी हैकर समूहों की संदिग्ध भूमिका
यद्यपि ईरान सरकार या किसी हैकर समूह ने आधिकारिक तौर पर इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन साइबर सुरक्षा फर्मों के विश्लेषण में ईरान ही मुख्य संदिग्ध के रूप में उभरा है। साइबर सुरक्षा फर्म टेनेबल की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस हैकिंग का तरीका साइबरअवेंजर्स (CyberAv3ngers) नामक हैकर समूह से मेल खाता है, जो इरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ा हुआ माना जाता है। 22 जुलाई को अपडेट किए गए सीआईएसए के पुराने परामर्श भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि ईरानी एजेंट पीएलसी (PLCs) को निशाना बनाकर परिचालन में व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं।
हालांकि, मिनेसोटा हमलों में केवल साइबरअवेंजर्स का ही नाम शामिल नहीं है। साइबर सुरक्षा फर्म क्लारोटी के शोधकर्ता योनातन हरारी का कहना है कि एक अन्य ईरानी हैकर समूह हंडाला (Handala) भी इन हमलों में शामिल हो सकता है। हंडाला ने हाल ही में मार्च महीने में स्ट्राइकर साइबर हमले और काश पटेल के ईमेल हैकिंग की जिम्मेदारी ली थी। योनातन हरारी के अनुसार, यद्यपि साइबरअवेंजर्स और हंडाला के बीच सटीक अंतर स्थापित करना जारी है, लेकिन उच्च संभावना यही है कि इन हमलों को ईरानी राज्य समर्थित एजेंटों द्वारा ही अंजाम दिया गया है।
साइबरअवेंजर्स का आपराधिक इतिहास और वैश्विक नेटवर्क
साइबरअवेंजर्स पहली बार 2023 के उत्तरार्ध में इजराइल और गाजा के बीच युद्ध शुरू होने के बाद सुर्खियों में आया था। उस दौरान इस समूह ने जल प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले यूनिट्रोनिक्स (Unitronics) उपकरणों को हैक करके उनकी स्क्रीन पर गाजा के समर्थन में संदेश प्रदर्शित किए थे। ड्रैगोस और क्लारोटी जैसी फर्मों की जांच में पाया गया कि हैकर्स ने उपकरणों के कोड को बदल दिया था, जिससे इजराइल और आयरलैंड से लेकर अमरीका के पेन्सिलवेनिया स्थित पिट्सबर्ग शहर तक जल सेवाएं प्रभावित हुई थीं।
अमरीकी विदेश मंत्रालय द्वारा इस समूह की जानकारी देने पर 10 मिलियन डॉलर के इनाम की घोषणा करने और अमरीकी वित्त मंत्रालय द्वारा आईआरजीसी (IRGC) के 6 अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद इस समूह की हैकिंग गतिविधियां नहीं रुकीं। वर्ष 2024 में ड्रैगोस ने पाया कि इस समूह ने अमरीका की एक तेल और गैस कंपनी में सेंध लगाई थी और विभिन्न औद्योगिक नियंत्रण प्रणालियों में IOControl नामक खतरनाक मालवेयर फैलाया था। ड्रैगोस के साइबर सुरक्षा शोधकर्ता काइल ओ'मीरा ने कहा कि इस समूह के पास बुनियादी ढांचे को बंद करने और नुकसान पहुंचाने की पूरी क्षमता और इरादा मौजूद है।



















