ईमोन होम्स और रूथ लैंग्सफोर्ड, टेस डेली और वर्नन के, और ह्यू जैकमैन और डेबोरा-ली फर्नेस जैसी मशहूर हस्तियों के रिश्ते लंबे समय तक चलने के बाद आखिर में टूट चुके हैं। केवल रेड कार्पेट पर चलने वाले ही नहीं, बल्कि आम जिंदगी जीने वाले लोगों में भी यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक शादियां अब अक्सर 20 साल के बाद टूटती हैं। इंग्लैंड और वेल्स में 2025 में हुए कुल 102,879 विषम-लिंगी जोड़ों के तलाक के मामलों में से 26 प्रतिशत ऐसे थे जिनकी शादी को कम से कम 20 साल हो चुके थे। हालांकि चार दीवारों के पीछे क्या चल रहा है यह पूरी तरह से कभी नहीं जाना जा सकता, लेकिन पारिवारिक मामलों के विशेषज्ञ और काउंसलर अक्सर कुछ खास वजहों को ही रिश्तों के टूटने के पीछे की मुख्य वजह मानते हैं।
रिश्ते का स्वाभाविक अंत हो जाना
कई बार रिश्ते किसी बड़े विवाद की वजह से नहीं बल्कि इसलिए खत्म हो जाते हैं क्योंकि दोनों में से एक या दोनों ही पार्टनर के बीच प्यार कम हो जाता है और आपसी जुड़ाव खत्म हो जाता है। रॉयटर्स सॉलिसिटर्स में फैमिली लॉ एक्सपर्ट कैरोलिन इलियट बताती हैं कि वह ऐसे कई लोगों से मिलती हैं जिनकी शादी को 20, 25, 30 साल या उससे अधिक समय हो चुका होता है और उनका रिश्ता बस अपनी स्वाभाविक सीमा पूरी कर चुका होता है। इसमें कोई तीसरा शख्स शामिल नहीं होता, बल्कि दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह बोर हो चुके होते हैं। कई बार बच्चों के बड़े होने और घर से चले जाने के बाद खालीपन आ जाता है और दोनों सोचते हैं कि अब उनके पास बात करने के लिए क्या बचा है।
रिश्ते को नजरअंदाज करना
तलाक की तरफ ले जाने वाला एक और धीमा रास्ता है जिसे थेरेपी फाइंडर्स की रिलेशनशिप काउंसलर मिग बेनेट उपेक्षित रिश्ता कहती हैं। उनका कहना है कि एक समय पर जो रिश्ता ठीक से काम कर रहा था, वह जीवन के तनावों जैसे कि बच्चों की जिम्मेदारी, नौकरी छूट जाना, माता-पिता की मौत या बीमारी के आगे कमजोर पड़ जाता है। जोड़े अक्सर करियर में तरक्की और बच्चों के आने के बाद आने वाले बदलावों से तालमेल बिठाने में चूक जाते हैं। वे अपने रिश्ते से ध्यान हटा लेते हैं और वह प्राथमिकता सूची में जिम या पालतू जानवर से भी नीचे चला जाता है। मिग महीने में कम से कम एक बार डेट नाइट और हफ्ते में एक बार बातचीत का सेशन रखने की सलाह देती हैं।
बेवफाई
स्टो फैमिली लॉ की पार्टनर और सॉलिसिटर अनुराधा कुर्त के अनुभव के मुताबिक अगर बेवफाई सीधे तौर पर तलाक की मुख्य वजह नहीं भी होती, तो भी इसके तत्व पूरे मामले में कहीं न कहीं जरूर मौजूद होते हैं। क्लाइंट्स शुरुआत में इस मुद्दे को भले ही न उठाएं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के दौरान अक्सर यह बात सामने आ जाती है कि कोई एक पार्टनर किसी दूसरे रिश्ते में है या किसी और के साथ रह रहा है। अनुराधा के अनुसार कम समय के रिश्तों वाले जोड़ों में चीटिंग की वजह से तलाक की संभावना ज्यादा होती है। हालांकि लंबी शादियों में जहां बच्चे और जटिल वित्तीय मामले जुड़े होते हैं, वहां बेवफाई के बावजूद जोड़े बच्चों और पारिवारिक परिस्थितियों की खातिर एक बार फिर साथ रहने की कोशिश कर लेते हैं।
पैसों की तंगी
पैसे रिश्तों में होने वाली लड़ाइयों की मुख्य वजहों में से एक है और यदि पैसों को लेकर तनाव लगातार बना रहे तो यह रिश्ते के अंत का कारण बन सकता है। अनुराधा बताती हैं कि जब कोई परिवार आर्थिक दबाव का सामना करता है, तो पार्टनर्स के बीच आपसी नाराजगी पैदा हो सकती है, खासकर तब जब कोई काम न कर रहा हो या किसी की नौकरी चली गई हो। ऐसे हालात में क्लाइंट्स को लगता है कि शुरुआती मुश्किलें भले ही हों, लेकिन लंबे समय में अकेले रहना ज्यादा बेहतर है। वह यह भी अनुमान लगाती हैं कि जीवनयापन के मौजूदा संकट के बीच पैसों की चिंता से जुड़े तलाक के मामले और बढ़ सकते हैं, क्योंकि हर साल जनवरी के महीने में वैसे भी पूछताछ बढ़ जाती है जब लोगों के पास पैसों की कमी होती है।
नशा और बुरा बर्ताव
मैगुएर फैमिली लॉ के मैनेजिंग डायरेक्टर जेम्स मैगुएर शराब पीने, ड्रग्स लेने और आपराधिक गतिविधियों जैसे व्यवहार से जुड़े मुद्दों को शादी टूटने की एक आम वजह मानते हैं। कैरोलिन भी बताती हैं कि उनके पास एक ऐसा मामला है जहां पति को जुए की लत है और इस वजह से उसने भारी कर्ज जमा कर लिया है, जिसके कारण उनका अलगाव हो गया है। शराब की लत की तरह ही किसी की बुरी आदत तब तक नहीं सुधर सकती जब तक वह खुद बदलना न चाहे।
अंतरंगता की कमी
मिग का कहना है कि रिश्तों के साथ 30 साल काम करने के बाद भी उन्हें इस बात से हैरानी होती है कि जोड़े सेक्स जैसे विषयों पर खुलकर बात नहीं करते, जिससे या तो बड़ी गलतफहमियां पैदा होती हैं या फिर रिश्ता किसी युद्ध का मैदान बन जाता है। उनके अनुभव के अनुसार ज्यादातर महिलाओं को सेक्स महसूस करने के लिए भावनात्मक जुड़ाव की जरूरत होती है, जबकि पुरुषों को आमतौर पर सेक्स के जरिए ही जुड़ाव महसूस होता है। इस बारे में खुलकर बात करना या मदद लेना बेहद जरूरी है, वरना यह समस्या आगे चलकर बेवफाई और तलाक का रूप ले सकती है।
एक-दूसरे की बात न सुनना
मिग के अनुभव में रिश्तों के टूटने की सबसे बड़ी वजह एक-दूसरे की बात न सुनना और खुद को अनसुना महसूस करना है, जिससे उनका पुराना जुड़ाव हमेशा के लिए टूट जाता है। बेहतर बातचीत से कई बार रिश्ते को नया जीवन मिल सकता है, लेकिन कई बार जोड़ों को यह अहसास होता है कि रिश्ता अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है और वे तलाक का रास्ता चुन लेते हैं। खराब संवाद एक ऐसा खेल बन जाता है जहां हर कोई हमला करने, बचाव करने और एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश में लगा रहता है।
घरेलू हिंसा और प्रताड़ना
अनुराधा बताती हैं कि तलाक के मामलों में हिंसा भी एक बहुत बड़ा कारक है, जिसके दायरे में शारीरिक, भावनात्मक और आर्थिक नुकसान तीनों आते हैं। कई मामलों में पहला कदम तलाक लेना नहीं बल्कि कोर्ट में जाकर सुरक्षा के लिए निषेधाज्ञा हासिल करना होता है। आर्थिक और भावनात्मक शोषण कई बार बहुत सूक्ष्म हो सकता है, जैसे कि नियंत्रण करने वाला व्यवहार और गैसलाइटिंग, जो तलाक की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ और गंभीर हो जाते हैं।
खरीदार का पछतावा
कैरोलिन बताती हैं कि वह छोटे रिश्तों के अलावा कम समय की शादियों के बाद विचार बदलने वाले युवा जोड़ों के मामलों को भी नियमित रूप से संभालती हैं। इसमें अक्सर यह बात सामने आती है कि उन्हें अब एक-दूसरे के साथ रहना पसंद नहीं है या उन्हें उम्मीद नहीं थी कि शादी ऐसी होगी। युवा लोग आज के समय में अलग होने और अपनी राहें जुदा करने के लिए ज्यादा तैयार और सक्षम नजर आते हैं।
कुछ अन्य अजीब वजहें
जेम्स ने कुछ ऐसी अजीब वजहों का भी जिक्र किया है जिन्हें तलाक का आधार बनाया गया है। इनमें जादू-टोना करना, बगीचे में घोंघे मारना और टूथपेस्ट को ट्यूब के गलत छोर से दबाना जैसी बातें शामिल हैं।



















