कजाखस्तान के अस्ताना में आयोजित कुश्ती विश्व चैंपियनशिप के मैट पर भारतीय खेल इतिहास का नया स्वर्णिम पन्ना जुड़ गया है। शुक्रवार को खेले गए महिलाओं के 59 किलोग्राम भार वर्ग के खिताबी मुकाबले में मनीषा भानवाला ने अविश्वसनीय वापसी करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस शानदार उपलब्धि के साथ वह सीनियर स्तर पर कुश्ती विश्व चैंपियन बनने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बन गई हैं। पूरे देश के कुश्ती इतिहास में वह सुशील कुमार के बाद दूसरी ऐसी एथलीट हैं जिन्होंने विश्व चैंपियनशिप का शीर्ष खिताब जीता है। सुशील कुमार ने साल 2010 में पुरुषों के 66 किलोग्राम भार वर्ग में यह कारनामा कर दिखाया था।
शून्य से शिखर तक फाइनल का रोमांचक मुकाबला
फाइनल बाउट में मनीषा के सामने अमेरिका की मजबूत पहलवान और ‘पैन अमेरिकन’ चैंपियन अबीगैल नेट्टे थीं। मुकाबले की शुरुआत भारतीय खिलाड़ी के पक्ष में नहीं रही और वह एक समय तकनीकी रूप से 0-6 से पीछे छूट गई थीं। अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी का दबदबा देखकर मुकाबला एकतरफा लग रहा था, लेकिन मनीषा ने संयम नहीं खोया और जोरदार जवाबी हमले शुरू किए। उन्होंने लगातार अंक जुटाते हुए स्कोर को 8-6 के पक्ष में पलट दिया। इस धमाकेदार जीत के साथ ही मनीषा ने भारतीय महिला कुश्ती के विश्व चैंपियन बनने के दशकों लंबे इंतजार पर विराम लगा दिया।
सेमीफाइनल में दबदबा और साथी पहलवानों का प्रदर्शन
खिताबी मुकाबले तक की राह में मनीषा ने सेमीफाइनल स्टेज पर भी जबरदस्त क्लास दिखाई थी। उन्होंने मेजबान कजाखस्तान की अल्तिन शगायेवा को पूरी तरह एकतरफा अंदाज में परास्त कर फाइनल का टिकट पक्का किया था। इस आयोजन में भारतीय महिला दल का समग्र प्रदर्शन भी ऐतिहासिक रहा, क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ जब एक ही विश्व चैंपियनशिप में तीन भारतीय महिला पहलवान गोल्ड मेडल मुकाबलों में उतरीं। मनीषा से एक दिन पहले बृहस्पतिवार को नीलम सिरोही (50 किलोग्राम) और काजल धोचक (76 किलोग्राम) ने फाइनल में कड़े संघर्ष के बाद रजत पदक अर्जित किए थे, जबकि तनु शर्मा ने अपने वर्ग में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया।



















