उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में स्थित धिगीइ खेरहना गांव के रहने वाले सलमान खान की जिंदगी संघर्ष और अटूट संकल्प की एक अनूठी मिसाल बन गई है। साल 2016 में जब उनके पिता का साया सिर से उठा, तब परिवार में सबसे बड़े बेटे के रूप में पूरे घर की आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ टिकी थी। पिता की हमेशा से यह ख्वाहिश थी कि सलमान भारतीय सेना में शामिल होकर देश की रक्षा करें। विपरीत परिस्थितियों के बीच भी उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता के इस संकल्प को अधूरा न छोड़ने की ठान ली थी।
मुश्किल दौर में टैक्सी चलाकर संभाला परिवार का खर्च
पिता के गुजर जाने के बाद परिवार के सामने दैनिक गुजारे का गहरा संकट खड़ा हो गया था। सलमान खान ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी गाड़ी लेकर सड़क पर उतर आए तथा टैक्सी चलाना शुरू कर दिया। कठिन समय में मिले इस आजीविका के साधन से घर की दैनिक जरूरतें पूरी होने लगीं। इस चुनौतीपूर्ण सफर में उनके एक दोस्त ने भी पूरा साथ निभाया और संकट की घड़ी में बड़ा सहारा बनकर खड़े रहे। तमाम आर्थिक तंगियों और निजी मुश्किलों के बीच भी सलमान ने अपने भीतर के सपनों को कभी दबने नहीं दिया।
सेना में चयन और रोइंग के अखाड़े में अप्रत्याशित कदम
कड़ी मेहनत के बल पर सलमान खान साल 2018 में बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप, पुणे के माध्यम से भारतीय सेना में भर्ती होने में सफल रहे। इसके बाद साल 2019 में उनकी लंबी कद-काठी को ध्यान में रखते हुए उनका चयन नौकायन यानी रोइंग टीम के लिए किया गया। आरंभ में सलमान इस खेल को लेकर पूरी तरह अनिच्छुक थे और उन्होंने इसमें शामिल होने से मना कर दिया था। हालांकि, सेना के मेजर नागेंद्र हुड्डा के व्यक्तिगत मार्गदर्शन और समझाने-बुझाने के बाद उन्होंने पतवार थामने का फैसला किया और वाटर स्पोर्ट्स की दुनिया में कदम रखा।
राष्ट्रीय मंच पर स्वर्ण और एशियाई स्तर पर मिली बड़ी सफलताएं
साल 2021 में सलमान ने रोइंग का नियमित और विधिवत प्रशिक्षण लेना शुरू किया। कठिन अभ्यास के दम पर उन्होंने साल 2022 में मुख्य टीम में अपनी जगह पक्की कर ली। गुजरात में संपन्न हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हुए उन्होंने अपने पदार्पण मुकाबले में ही स्वर्ण पदक जीतकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस बड़ी कामयाबी से उनका मनोबल काफी बढ़ा और उन्होंने अपनी तकनीक को और धार दी। साल 2024 में ओलंपिक चयन प्रक्रिया के दौरान ट्रायल्स में उन्हें कामयाबी नहीं मिल सकी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके तुरंत बाद दक्षिण कोरिया में आयोजित एशियाई रोइंग चैंपियन कप में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस उत्कृष्ट उपलब्धि का सम्मान करते हुए सेना ने उन्हें सिपाही रैंक से पदोन्नत कर सीधे नायब सूबेदार बना दिया। इसके पश्चात साल 2026 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर उन्होंने एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई किया और वहां ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर देश का गौरव बढ़ाया।



















