एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम का सफर कांस्य पदक पर समाप्त हुआ। 23 सितंबर को खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में भारत को मेजबान चीन के खिलाफ 1-3 से शिकस्त झेलनी पड़ी। इस कड़े मुकाबले में भारतीय शटलरों ने जोरदार वापसी का प्रयास किया, लेकिन अहम मोड़ों पर चीनी खिलाड़ियों ने दबाव बनाकर मैच अपने पाले में कर लिया और फाइनल में प्रवेश पा लिया। मुकाबले में पराजय के बावजूद भारतीय पुरुष टीम ने महाद्वीपीय खेलों में चार दशक पुराना एक खास रिकॉर्ड दोहराकर इतिहास रच दिया।
इस कांस्य पदक के साथ भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने एशियन गेम्स के इतिहास में लगातार दूसरे संस्करण में टीम मेडल जीतने का कारनामा किया है। इससे पहले भारतीय टीम ने 1982 और 1986 के एशियन गेम्स में लगातार दो बार कांस्य पदक हासिल किए थे। अब पूरे 40 साल के लंबे इंतजार के बाद भारतीय टीम फिर से लगातार दो एशियन गेम्स में टीम स्पर्धा का पदक अपने नाम करने में सफल रही है। इससे पूर्व 2023 हांगझोउ एशियन गेम्स में भी भारतीय टीम ने फाइनल तक का सफर तय करते हुए रजत पदक अपने नाम किया था, जहां खिताबी मुकाबले में चीन ने ही भारत को हराया था।
सात्विकसाईराज और चिराग की जोड़ी ने दर्ज की एकमात्र जीत
सेमीफाइनल मुकाबले में भारत के लिए एकमात्र जीत देश की स्टार युगल जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने दिलाई। जब भारत पहले सिंगल्स मैच में पिछड़ चुका था, तब इस जोड़ी ने मोर्चा संभाला। सात्विकसाईराज और चिराग का सामना मौजूदा विश्व चैंपियन और पेरिस ओलंपिक के रजत पदक विजेता चीनी खिलाड़ी लियांग वेई केंग और वांग चांग से हुआ।
भारतीय जोड़ी ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाते हुए विश्व चैंपियनों को कोर्ट पर टिकने का मौका नहीं दिया। सात्विकसाईराज और चिराग ने सीधे गेमों में 21-11, 22-20 से शानदार जीत दर्ज करते हुए पांच मैचों की इस टाई को 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया। दूसरे गेम में चीनी जोड़ी ने कड़ा संघर्ष जरूर किया, लेकिन भारतीय जोड़ी ने संयम बनाए रखते हुए मुकाबला समाप्त किया।
एकल मुकाबलों में लक्ष्य सेन और आयुष शेट्टी को मिली हार
टाई की शुरुआत पहले सिंगल्स मुकाबले से हुई थी, जहां भारत के लक्ष्य सेन कोर्ट पर उतरे। विश्व रैंकिंग में 14वें स्थान पर मौजूद लक्ष्य सेन के सामने दुनिया के छठे नंबर के खिलाड़ी शी यू क्यूई की कठिन चुनौती थी। लक्ष्य ने इससे पहले सेमीफाइनल तक के सफर में भारत के लिए कई बेहतरीन मुकाबले जीते थे, लेकिन इस अहम मोड़ पर वह अपनी लय बरकरार नहीं रख सके। चीनी दिग्गज शी यू क्यूई ने दोनों गेमों में महत्वपूर्ण मौकों पर बढ़त बनाते हुए लक्ष्य को 21-16, 21-18 से मात दी।
सात्विक और चिराग द्वारा स्कोर 1-1 से बराबर करने के बाद दूसरे सिंगल्स में युवा आयुष शेट्टी पर भारत को बढ़त दिलाने की बड़ी जिम्मेदारी थी। विश्व रैंकिंग में 20वें स्थान पर काबिज आयुष का सामना चीन के 12वें नंबर के शटलर ली शी फेंग से हुआ। पहले गेम में आयुष ने अच्छी टक्कर दी, लेकिन ली शी फेंग ने अपनी गति और कोर्ट कवरेज के दम पर मैच पर पकड़ मजबूत कर ली। ली शी फेंग ने यह मुकाबला 21-19, 21-13 से जीतकर चीन को टाई में 2-1 की महत्वपूर्ण बढ़त दिला दी।
हरिहरन और अर्जुन की जोड़ी नहीं टाल सकी हार
चीन के 2-1 से आगे होने के बाद मुकाबले को पांचवें और निर्णायक मैच तक ले जाने का दारोमदार भारत के दूसरे डबल्स संयोजन पर आ गया था। कोर्ट पर भारत की ओर से विश्व में 25वें नंबर की जोड़ी हरिहरन अम्साकरुणन और एमआर अर्जुन उतरे। उनका सामना चीन की मजबूत जोड़ी हे जी टिंग और लियू यी से हुआ।
पहले गेम में चीनी जोड़ी ने दबदबा बनाया और 21-16 से जीत हासिल की। इसके बाद हरिहरन और अर्जुन ने दूसरे गेम में असाधारण जुझारूपन दिखाते हुए 21-17 से जीत दर्ज की और मैच को तीसरे व निर्णायक गेम में खींच लिया। हालांकि तीसरे गेम में चीनी जोड़ी ने पूरी तरह नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया और भारतीय जोड़ी पर लगातार दबाव बनाते हुए निर्णायक गेम 21-9 के बड़े अंतर से जीत लिया। इसके साथ ही चीन ने सेमीफाइनल टाई 3-1 से जीतकर फाइनल का टिकट पक्का कर लिया, जबकि भारतीय टीम को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।



















