कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पदकों का सिलसिला लगातार आगे बढ़ रहा है और इस बार देश की स्टार वेटलिफ्टर बिंदियारानी देवी ने पोडियम पर अपनी जगह पक्की कर ली है। महिलाओं के 58 किलोग्राम भार वर्ग के इस कड़े मुकाबले में उन्होंने अपनी बेहतरीन ताकत और तकनीक का परिचय देते हुए देश के लिए एक और मेडल पक्का किया। इस बहुप्रतीक्षित स्पर्धा के दौरान उन्होंने स्नैच और क्लीन एंड जर्क दोनों चरणों को मिलाकर कुल 199 किलोग्राम वजन उठाया। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने तीसरा स्थान हासिल किया और भारत के कुल पदकों की संख्या को छह तक पहुंचा दिया। पूरे आयोजन के दौरान उनका यह सफर बेहद प्रेरणादायक रहा, जिसमें उन्होंने अपनी शुरुआती बाधाओं को पार करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का मान बढ़ाया।
प्रयास और कड़ा मुकाबला
इस रोमांचक स्पर्धा के दौरान बिंदियारानी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। अपने अंतिम प्रयास में वह 116 किलोग्राम वजन उठाने से चूक गईं, लेकिन उनके शुरुआती और मजबूत प्रयासों से बना स्कोर इतना पर्याप्त था कि उन्हें कांस्य पदक से वंचित नहीं किया जा सका। इस वर्ग में कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जहां नाइजीरिया की राफियातु फोलाशाडे ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए कुल 229 किलोग्राम वजन उठाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पोडियम पर तीसरा स्थान हासिल करने के बाद भारतीय दल में खुशी की लहर दौड़ गई, क्योंकि इस स्पर्धा ने देश की पदक तालिका को और मजबूत कर दिया।
मणिपुर की जड़ों से प्रेरणा का सफर
मणिपुर के एक साधारण परिवार से आने वाली बिंदियारानी देवी के जीवन का यह सफर काफी संघर्षों और प्रेरणाओं से भरा रहा है। अपने शुरुआती दौर से ही वह देश की दिग्गज खिलाड़ी मीराबाई चानू को अपना सबसे बड़ा आदर्श मानती थीं। उनकी मां ने उन्हें बचपन से ही जीवन में कड़ा अनुशासन बनाए रखने की सीख दी थी, जिसने खेल के मैदान पर उन्हें कभी हार न मानने की हिम्मत दी। इसके अलावा, मीराबाई चानू ने समय-समय पर उन्हें अपने खान-पान में सुधार करने और अपनी फिटनेस पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करने की मूल्यवान सलाह दी थी। अपने शुरुआती दिनों में उन्हें फास्ट फूड खाने का बहुत शौक था, लेकिन खेल के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्होंने अपनी डाइट में बड़ा बदलाव किया और पूरी तरह से अपने अभ्यास पर ध्यान लगाया।
जूनियर से सीनियर स्तर तक का सफर
बिंदियारानी का खेल करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने साल 2016 की एशियन यूथ और जूनियर चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करके पहली बार अपनी राष्ट्रीय पहचान बनाई थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार सीनियर स्तर पर भी अपनी चमक बिखेरी। साल 2019 की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद 2021 की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक हासिल किया और अपनी निरंतरता साबित की। इसके बाद उन्होंने 2022 में बर्मिंघम में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स के 55 किलोग्राम भार वर्ग में भी सिल्वर मेडल जीता था। इस सफल क्रम को जारी रखते हुए उन्होंने 2023 की एशियन चैंपियनशिप में भी रजत पदक अपने नाम किया।
ज्ञानेश्वरी यादव का शानदार प्रदर्शन
इस खेल महाकुंभ में भारतीय वेटलिफ्टर्स लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं और इससे पहले ज्ञानेश्वरी यादव ने भी देश का नाम रोशन किया था। महिलाओं के 53 किलोग्राम भार वर्ग में भाग लेते हुए 23 वर्षीय ज्ञानेश्वरी ने 88 किलोग्राम स्नैच और 111 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क के साथ कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता था। इस मुकाबले के दौरान उन्होंने क्लीन एंड जर्क और कुल वजन के मामले में नए भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी स्थापित किए। हालांकि इस वर्ग में नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला डिडिह ने कुल 206 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण अपने नाम किया, लेकिन दोनों खिलाड़ियों के बीच चले इस कड़े संघर्ष ने दर्शकों का दिल जीत लिया और कई बार गेम्स के रिकॉर्ड भी बदले।
वेटलिफ्टिंग टीम का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टिंग दल का प्रदर्शन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। इससे पहले मीराबाई चानू ने स्वर्ण पदक जीतकर देश के लिए स्वर्णिम इतिहास रचा था, जबकि ऋषिकांत सिंह, राजा मुथुपंडी और ज्ञानेश्वरी यादव जैसे खिलाड़ियों ने भी शानदार रजत पदक अपने नाम किए। अब बिंदियारानी देवी के इस कांस्य पदक के साथ ही भारत ने वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में लगातार पांच पदक जीतने का एक बेहतरीन और अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।



















