कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के जूडो मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी अस्मिता डे ने स्वर्णिम इतिहास रचते हुए देश का नाम ऊंचा किया है। महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग में असाधारण कौशल और अद्भुत जुझारूपन का प्रदर्शन करते हुए अस्मिता ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह राष्ट्रमंडल खेलों के पूरे इतिहास में पहला मौका है जब किसी भारतीय जूडोका ने गोल्ड मेडल जीता है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही अस्मिता ने चालू खेलों की जूडो प्रतियोगिता में भारत के पदकों का खाता भी खोल दिया है। यह आज के दिन राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की झोली में आया पहला पदक भी बना, जिससे पूरे देश और भारतीय खेल दल के बीच जश्न का माहौल व्याप्त है।
गोल्डन स्कोर में सांसें थमा देने वाला खिताबी मुकाबला
महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग का खिताबी मुकाबला किसी बेहद रोमांचक स्पोर्ट्स थ्रिलर से कम नहीं था। मैच की शुरुआत से ही दोनों प्रतिद्वंद्वियों के बीच एक-एक अंक हासिल करने के लिए जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला। त्रिपुरा की रहने वाली 23 वर्षीय अस्मिता डे के लिए इस फाइनल मैच की शुरुआत काफी चुनौतीपूर्ण रही। शुरुआत में अस्मिता थोड़ा पिछड़ गई थीं और उन पर एक पेनल्टी भी लगा दी गई थी। हालांकि, अत्यधिक दबाव के बावजूद अस्मिता ने अपना धैर्य नहीं खोया और आक्रामक वापसी करते हुए स्कोर 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया।
चार मिनट के निर्धारित समय तक दोनों ही खिलाड़ी 1-1 के स्कोर के साथ बराबरी पर डटे रहे और कोई भी निर्णायक अंक हासिल नहीं कर सका। इसके बाद स्वर्ण पदक का फैसला 'गोल्डन स्कोर' यानी अतिरिक्त समय (सडन डेथ) के जरिए होना तय हुआ। जूडो में गोल्डन स्कोर का नियम यह होता है कि अतिरिक्त समय में जो भी खिलाड़ी पहला अंक हासिल कर लेता है, उसे तुरंत विजेता घोषित कर दिया जाता है।
यूको के सटीक दांव से अस्मिता ने पक्का किया ऐतिहासिक गोल्ड
गोल्डन स्कोर के दौरान अस्मिता डे ने अपनी परिपक्वता और मानसिक मजबूती का शानदार परिचय दिया। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी द्वारा किए गए प्रत्येक आक्रमण को विफलता में बदला और अपने आक्रामक दांव के लिए सही अवसर का इंतजार किया। आखिरकार, सटीक मौका मिलते ही अस्मिता ने एक बेहतरीन और आक्रामक दांव लगाया, जिसके जरिए उन्होंने 'यूको' तकनीक से निर्णायक अंक हासिल कर लिया।
यूको स्कोर दर्ज होते ही अस्मिता ने इस रोमांचक फाइनल मुकाबले को 2-1 से अपने नाम कर लिया और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पहला जूडो स्वर्ण पदक जीत लिया। मुकाबला खत्म होते ही भारतीय खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। अंतरराष्ट्रीय मंच पर कॉम्बैट स्पोर्ट्स में ऐसा अटूट विश्वास और आक्रामक रणनीति दिखाना भारतीय खिलाड़ियों की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।
भारतीय जूडो के लिए मील का पत्थर और आज रात दो और मेडल की उम्मीदें
अस्मिता डे की यह स्वर्णिम सफलता भारतीय जूडो के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी। भारत में जूडो जैसे खेल को आगे बढ़ाने और युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करने में यह उपलब्धि एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी। अस्मिता का यह जुझारूपन देश के उभरते हुए एथलीटों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
अस्मिता की इस धमाकेदार जीत के साथ ही आज की रात भारतीय जूडो दल के लिए और भी ज्यादा खास हो सकती है। भारत के दो अन्य प्रतिभाशाली जूडोका, हर्ष सिंह और यामिनी मौर्या, भी अपने-अपने भारवर्ग के फाइनल मुकाबलों में जगह बना चुके हैं। यदि हर्ष और यामिनी भी अपनी-अपनी स्पर्धाओं में अस्मिता के दिखाए रास्ते पर चलते हुए जीत दर्ज करते हैं, तो राष्ट्रमंडल खेलों में आज का दिन भारतीय जूडो के इतिहास का सबसे स्वर्णिम दिन बन जाएगा। पूरे देश की निगाहें अब इन दोनों खिलाड़ियों के खिताबी मुकाबलों पर टिकी हुई हैं।



















