भारतीय पुरुष हॉकी टीम के अनुभवी मिडफील्डर नीलकांत शर्मा चालू एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के समापन के बाद अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कह देंगे। 31 वर्षीय खिलाड़ी ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने यह कदम देश की नई पीढ़ी के हॉकी सितारों के लिए जगह बनाने के उद्देश्य से उठाया है। जालंधर में इस फैसले पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आइची-नागोया एशियाई खेलों में पदक हासिल करने के तुरंत बाद उन्होंने अपने इस व्यक्तिगत निर्णय से मुख्य कोच क्रेग फुल्टन को अवगत करा दिया था।
युवाओं को अवसर देने का व्यक्तिगत निर्णय
मणिपुर से आने वाले नीलकांत शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि उन पर खेल से अलग होने का कोई बाहरी दबाव नहीं था। उन्होंने कहा, "मैंने यह फैसला खुद लिया है, ताकि अगली पीढ़ी के प्रतिभावान खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिल सके।" उन्होंने यह स्वीकार किया कि मैदान और राष्ट्रीय टीम की कमी उन्हें हमेशा खलेगी, लेकिन भारतीय हॉकी के भविष्य को देखते हुए नए खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर मिलना आवश्यक है।
लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक की ओर बदलाव की योजना
नीलकांत का यह फैसला हॉकी इंडिया की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर भारत ने ओलंपिक के लिए सीधे तौर पर क्वालीफाई किया था। इस परिवर्तन काल के तहत नीलकांत शर्मा के साथ-साथ वरिष्ठ खिलाड़ी जरमनप्रीत सिंह, मनदीप सिंह और अमित रोहिदास भी एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेल रहे हैं। संघ की योजना नए चक्र में युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की है।
संन्यास के बाद जमीनी स्तर पर कोचिंग का इरादा
नीलकांत शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय करियर के बाद की अपनी योजनाओं की रूपरेखा भी साझा की है। टोक्यो ओलंपिक में ऐतिहासिक पदक जीतने के बाद मणिपुर सरकार ने उन्हें खेल विभाग में नौकरी की पेशकश की थी। नीलकांत ने खेल विभाग को इसलिए चुना ताकि वे अपने गृह राज्य में युवा प्रतिभाओं को तराश सकें। वे जब भी अपने घर जाते हैं, स्थानीय खिलाड़ियों को कोचिंग देते हैं और आगे भी युवाओं को प्रशिक्षित करने में अपना पूरा अनुभव लगाएंगे।
एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में विजयी शुरुआत
नीलकांत शर्मा का यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब भारतीय टीम ने एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में धमाकेदार शुरुआत की है। टूर्नामेंट के अपने पहले मुकाबले में भारत ने बांग्लादेश को 13-0 के अंतर से पराजित किया, जिसमें मनदीप सिंह ने शानदार हैट्रिक दर्ज की। वरिष्ठ खिलाड़ी अपने इस अंतिम अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट को यादगार बनाने और भारतीय हॉकी में एक नए युग की नींव रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।



















