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गांधी स्टेडियम में ग्रामीण बच्चों के लिए बास्केटबॉल टैलेंट सर्च, 7 से 10 साल के खिलाड़ियों को मिलेगी मुफ्त ट्रेनिंगखेल
15 अग॰ 2026, 7:23 pm (46 दिन पहले)· 2

गांधी स्टेडियम में ग्रामीण बच्चों के लिए बास्केटबॉल टैलेंट सर्च, 7 से 10 साल के खिलाड़ियों को मिलेगी मुफ्त ट्रेनिंग

सरगुजा में आर्थिक तंगी से जूझ रहे ग्रामीण और स्लम इलाकों के बच्चों के लिए खास बास्केटबॉल टैलेंट सर्च अभियान शुरू किया गया है। गांधी स्टेडियम में 7 से 10 वर्ष के बच्चों को निशुल्क जूते, ड्रेस और यात्रा सहयोग देकर राष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार किया जा रहा है।

सरगुजा क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण परिवारों के बच्चों के खेल सपनों को साकार करने के उद्देश्य से एक विशेष बास्केटबॉल टैलेंट सर्च अभियान की शुरुआत की गई है। इस जमीनी पहल का मुख्य लक्ष्य संसाधनों की कमी से जूझ रहे प्रतिभाशाली बच्चों को एक बेहतरीन खेल मंच प्रदान करना है। इस अभियान का नेतृत्व कर रहे राजेश सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में अक्सर यह देखने को मिलता है कि संपन्न परिवारों के बच्चों को सुविधाएं और अवसर आसानी से मिल जाते हैं। इसके विपरीत, ग्रामीण और स्लम इलाकों के बच्चों में असाधारण खेल क्षमता होने के बावजूद वे सही मार्गदर्शन और साधनों के अभाव में पीछे रह जाते हैं। इसी अंतर को समाप्त करने के उद्देश्य से गांधी स्टेडियम में जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त बास्केटबॉल प्रशिक्षण देकर उन्हें राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में खेलने के लिए तैयार किया जा रहा है।

प्राथमिक शाला के बच्चों पर विशेष ध्यान, 7 से 10 वर्ष की उम्र से शुरुआत

इस वर्ष टैलेंट सर्च कार्यक्रम के संचालन में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। इससे पहले तक इस अभियान के अंतर्गत केवल 14 से 15 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों का चयन किया जाता था। लेकिन खेल की बुनियादी समझ को छोटी उम्र से ही विकसित करने के लिए अब प्राथमिक शाला के विद्यार्थियों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। नई रणनीति के तहत अब 7 से 10 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को चिन्हित कर बास्केटबॉल खेल से जोड़ा जा रहा है। ग्रामीण इलाकों और स्लम बस्तियों के इन छोटे बच्चों को शुरुआती चरण से ही बास्केटबॉल की आधुनिक तकनीकों का अभ्यास कराया जा रहा है ताकि वे भविष्य के लिए मजबूत खिलाड़ी बन सकें।

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निशुल्क किट, जूते और यात्रा सहयोग से सुगम हुई बच्चों की राह

वित्तीय तंगी किसी भी बच्चे के खेल करियर में बाधा न बने, इसके लिए टैलेंट सर्च से जुड़ने वाले जरूरतमंद बच्चों से प्रशिक्षण का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। राजेश सिंह के अनुसार, चयनित बच्चों को बास्केटबॉल ड्रेस और खेल जूते पूरी तरह निशुल्क प्रदान किए जाते हैं। इसके अलावा, जब बच्चे सरगुजा से बाहर अन्य जिलों या राज्यों में प्रतियोगिताओं में भाग लेने जाते हैं, तो उनके यात्रा और ठहरने से जुड़े सभी खर्चों में पूरा सहयोग दिया जाता है। इस पूरी प्रशिक्षण प्रणाली और वित्तीय व्यवस्था का संचालन पूर्व वरिष्ठ खिलाड़ियों के बहुमूल्य योगदान तथा सहयोग करने वाले अभिभावकों की मदद से सफलता पूर्वक किया जा रहा है।

बड़े स्टेडियमों का दबाव दूर करने को बाहरी टीमों संग फ्रेंडली मैच

ग्रामीण पृष्ठभूमि और स्लम बस्तियों से आने वाले खिलाड़ियों के लिए बड़े स्तर के टूर्नामेंट का माहौल शुरुआती दौर में काफी चुनौतीपूर्ण होता है। विशाल खेल मैदान, दर्शकों की भीड़ और प्रतिस्पर्धा के भारी दबाव के कारण अक्सर बच्चे घबरा जाते हैं और अपना स्वाभाविक खेल नहीं दिखा पाते। इस हिचकिचाहट और मंच के डर को समाप्त करने के लिए स्थानीय स्तर पर गांधी स्टेडियम में बाहरी टीमों को बुलाकर बच्चों के बीच फ्रेंडली मैच आयोजित किए जाते हैं। इन दोस्ताना मुकाबलों से बच्चों को वास्तविक प्रतियोगिता का अनुभव मिलता है और राष्ट्रीय स्तर पर खेलते समय उनका आत्मविश्वास बना रहता है। राजेश सिंह के अनुसार, यदि कोई बच्चा लगन और नियमितता के साथ अभ्यास करे, तो वह लगभग एक महीने के भीतर बास्केटबॉल की शुरुआती तकनीकों पर महारत हासिल कर सकता है, हालांकि वास्तविक निखार लगातार मैच खेलने से ही आता है।

सवाल-जवाब

सरगुजा में बास्केटबॉल टैलेंट सर्च अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य ग्रामीण और स्लम क्षेत्रों के जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त बास्केटबॉल प्रशिक्षण देकर राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है।
इस वर्ष टैलेंट सर्च में किस आयु वर्ग के बच्चों पर ध्यान दिया जा रहा है?
इस साल 7 से 10 वर्ष की आयु के बच्चों और प्राथमिक शाला के विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जबकि पहले 14 से 15 वर्ष के बच्चों का चयन होता था।
क्या टैलेंट सर्च में शामिल होने के लिए बच्चों से कोई शुल्क लिया जाता है?
नहीं, यह पूरा प्रशिक्षण अभियान निशुल्क है। बच्चों को खेल ड्रेस, जूते और बाहर प्रतियोगिताओं में जाने पर यात्रा सहयोग भी मुफ्त दिया जाता है।
इस खेल अभियान का संचालन किनके सहयोग से किया जा रहा है?
इस व्यवस्था का संचालन पूर्व अनुभवी खिलाड़ियों के योगदान और सहयोग करने वाले अभिभावकों की मदद से किया जा रहा है।
बच्चों को राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के दबाव से बचाने के लिए क्या किया जाता है?
गांधी स्टेडियम में बाहरी टीमों को आमंत्रित करके बच्चों के साथ फ्रेंडली मैच कराए जाते हैं ताकि वे बड़े मैदानों और दर्शकों की भीड़ के दबाव से न घबराएं।
बास्केटबॉल की बुनियादी तकनीक सीखने में कितना समय लगता है?
राजेश सिंह के अनुसार, यदि बच्चा लगन और नियमितता से अभ्यास करे तो करीब एक महीने में शुरुआती तकनीक सीखी जा सकती है।
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