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ग्लासगो में भारतीय एथलीट का शानदार प्रदर्शन, पीएचडी शोधकर्ता सीमा कलीरामना ने कॉमनवेल्थ गेम्स की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में जीता कांस्यखेल
31 जुल॰ 2026, 10:06 am (43 दिन पहले)· 1

ग्लासगो में भारतीय एथलीट का शानदार प्रदर्शन, पीएचडी शोधकर्ता सीमा कलीरामना ने कॉमनवेल्थ गेम्स की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में जीता कांस्य

स्कॉटलैंड के ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की 27 वर्षीय डिस्कस थ्रो खिलाड़ी सीमा कलीरामना ने 58.65 मीटर का थ्रो कर कांस्य पदक अपने नाम किया। एक छोटे बच्चे की मां और पीएचडी की छात्रा सीमा का खेल में वापसी के बाद यह पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय मेडल है।

स्कॉटलैंड की राजधानी ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। भारत की 27 वर्षीय महिला एथलीट सीमा कलीरामना ने डिस्कस थ्रो स्पर्धा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए कांस्य पदक हासिल किया है। तीन साल के मासूम बच्चे की जिम्मेदारी संभालने और शारीरिक शिक्षा में पीएचडी की पढ़ाई करने के साथ ही सीमा ने खेल के मैदान पर यह असाधारण मुकाम हासिल किया है। मातृत्व के बाद ट्रैक एंड फील्ड में वापसी करते हुए किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर यह उनका पहला पदक है। इस जीत के साथ ही भारत ने प्रतियोगिता की पदक तालिका में अपना दबदबा और मजबूत कर लिया है।

शुरुआती झटके के बाद तीसरे प्रयास में दर्ज किया सर्वश्रेष्ठ थ्रो

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के इस हाई-वोल्टेज फाइनल मुकाबले में सीमा कलीरामना की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी। उनका पहला प्रयास विफल रहा और डिस्कस शॉट पुट एरिया के सुरक्षा ढांचे यानी फ्रेम से टकरा गया। हालांकि, इस शुरुआती झटके से विचलित हुए बिना भारतीय खिलाड़ी ने तुरंत अपनी तकनीक में सुधार किया। अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने 57.32 मीटर की दूरी तय कर सीधे तीसरे स्थान पर जगह बना ली। इसके बाद अपने तीसरे और अंतिम प्रयास में सीमा ने पूरी ताकत झोंकते हुए 58.65 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंका और कांस्य पदक पर अपनी पकड़ पक्की कर ली।

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इस स्पर्धा में जमैका की सामंथा हॉल ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा और 61.66 मीटर का शानदार थ्रो फेंककर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं कनाडा की जूलिया टंक्स ने 60.67 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक हासिल किया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद सीमा कलीरामना ने संयम बनाए रखा और तीसरे स्थान पर रहते हुए तिरंगा लहराया।

ठंड की चुनौती, पीएचडी की पढ़ाई और ट्रैक पर वापसी का सफर

पदक जीतने के बाद सीमा कलीरामना ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेकर कांस्य पदक जीतना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। उन्होंने ग्लासगो के मौसम का जिक्र करते हुए कहा कि प्रतियोगिता के दौरान अत्यधिक ठंड होने के कारण शरीर को चुस्त बनाए रखने के लिए उन्हें बार-बार वॉर्मअप करना पड़ा। अपने व्यक्तिगत जीवन पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि वह चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रही हैं। उन्होंने अपने गाइड डॉक्टर सुरेश कुमार मलिक के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके समर्थन के कारण ही पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना संभव हो सका है।

उल्लेखनीय है कि बच्चे के जन्म के बाद सीमा ने खेल से कुछ समय का ब्रेक लिया था। पिछले वर्ष नेशनल गेम्स के जरिए उन्होंने प्रतिस्पर्धी खेलों में सफल वापसी की थी। पारिवारिक जिम्मेदारियों और उच्च शिक्षा की चुनौतियों के बीच उन्होंने कड़ी मेहनत जारी रखी, जिसका सुखद परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय पदक के रूप में सामने आया है।

पदक तालिका में 10वें स्थान पर पहुंचा भारत

सीमा कलीरामना के इस कांस्य पदक के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। इस शानदार उपलब्धि के साथ भारत अंक तालिका में 10वें स्थान पर काबिज हो गया है। अगर केवल एथलेटिक्स और पैरा-एथलेटिक्स स्पर्धाओं की बात की जाए, तो भारत के खाते में अब तक कुल 8 मेडल जुड़ चुके हैं। भारतीय दल का यह प्रदर्शन आने वाले मुकाबलों के लिए खिलाड़ियों के मनोबल को और बढ़ाने वाला साबित होगा।

सवाल-जवाब

सीमा कलीरामना ने CWG 2026 में कौन सा पदक जीता?
उन्होंने महिला डिस्कस थ्रो स्पर्धा में 58.65 मीटर का थ्रो करके कांस्य पदक जीता।
सीमा कलीरामना का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कितना रहा?
उन्होंने अपने तीसरे और अंतिम प्रयास में 58.65 मीटर की दूरी तय कर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया।
इस स्पर्धा में गोल्ड और सिल्वर मेडल किसने जीता?
जमैका की सामंथा हॉल ने 61.66 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड और कनाडा की जूलिया टंक्स ने 60.67 मीटर के साथ सिल्वर मेडल जीता।
सीमा कलीरामना का शैक्षणिक पृष्ठभूमि और पारिवारिक स्थिति क्या है?
27 वर्षीय सीमा तीन साल के बच्चे की मां हैं और चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी से शारीरिक शिक्षा में पीएचडी कर रही हैं।
इस पदक के बाद मेडल टैली में भारत का क्या स्थान है?
इस कांस्य पदक के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या 17 हो गई है और भारत मेडल टैली में 10वें स्थान पर है।
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