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ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में ज्ञानेश्वरी यादव का कमाल, वेटलिफ्टिंग में देश को दिलाया सिल्वर मेडलखेल
27 जुल॰ 2026, 10:55 pm (4 घंटे पहले)· 0

ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में ज्ञानेश्वरी यादव का कमाल, वेटलिफ्टिंग में देश को दिलाया सिल्वर मेडल

छत्तीसगढ़ की युवा वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया है।

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की पहचान अब तक केवल हॉकी के एक बड़े केंद्र के रूप में होती रही है, लेकिन अब इस क्षेत्र की नई पहचान तेईस साल की प्रतिभावान खिलाड़ी ज्ञानेश्वरी यादव के जरिए भी स्थापित हो रही है। ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उन्होंने वेटलिफ्टिंग स्पर्धा के बावन किलोग्राम वर्ग में अपनी ताकत का लोहा मनवाते हुए देश के लिए रजत पदक जीता। इस उल्लेखनीय प्रदर्शन के साथ ही प्रतियोगिता में भारत के पदकों का कुल योग पांच तक पहुंच गया है। उन्होंने स्नैच स्पर्धा में अट्ठासी किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में अपने व्यक्तिगत श्रेष्ठ प्रदर्शन को दोहराते हुए एक सौ ग्यारह किलोग्राम भार उठाकर यह सफलता हासिल की।

संघर्षों और तंगहाली से भरा शुरुआती सफर

इस पदक की चमक के पीछे लंबा और कठिन संघर्ष छिपा है। ज्ञानेश्वरी के पिता दीपक यादव कभी मध्य प्रदेश के जाने-माने पहलवान हुआ करते थे, जो बाद में परिवार का गुजारा चलाने के लिए इलेक्ट्रीशियन बन गए। लोगों के घरों में बिजली ठीक करने का काम करने वाले दीपक की मासिक आय मात्र सात से दस हजार रुपये के बीच थी। इस सीमित कमाई में बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च, खेलकूद के लिए जरूरी किट और ज्ञानेश्वरी की विशेष खुराक का खर्च चलाना बेहद चुनौतीभरा था। इसके बावजूद पिता ने अपनी बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया और हर मुश्किल का डटकर मुकाबला किया।

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पिता की साइकिल और अखाड़े की पुरानी यादें

कम संसाधनों के बीच पले-बढ़े इस परिवार की कहानी प्रेरणा से भरी है। दीपक यादव रोज लगभग आठ किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करके भोड़िया गांव से राजनांदगांव आते थे और अपनी सात साल की बेटी को उसी जय भवानी व्यायामशाला में प्रशिक्षण के लिए ले जाते थे जहां वे खुद कभी बॉडी बिल्डिंग किया करते थे। उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपनी छोटी सी बच्ची को भारी भरकम बारबेल उठाते हुए देखा था। आज जब उन्होंने टेलीविजन स्क्रीन पर अपनी बेटी को पदक से सम्मानित होते देखा होगा, तो उनका पूरा संघर्ष किसी फिल्मी कहानी की तरह उनकी आंखों के सामने तैर गया होगा।

साल 2017 साबित हुआ जीवन का बड़ा मोड़

ज्ञानेश्वरी के खेल जीवन में वर्ष 2017 एक अहम मोड़ बनकर आया। दुर्ग में आयोजित एक राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उन्होंने अपना पहला कांस्य पदक अपने नाम किया। इस शुरुआती सफलता ने न केवल उनका हौसला बढ़ाया बल्कि यह विश्वास भी दिलाया कि वह आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने की पूरी क्षमता रखती हैं। इस जीत के बाद उनके अभ्यास और समर्पण में और अधिक निखार आ गया, जिससे उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती रही।

मीराबाई चानू के नक्शेकदम पर आगे बढ़ती नई उम्मीद

वर्ष 2022 में भुवनेश्वर में आयोजित जूनियर महिला वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद ज्ञानेश्वरी का चयन पटियाला स्थित प्रतिष्ठित नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान की अकादमी के लिए हुआ। उसी वर्ष उन्होंने कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप के जूनियर और सीनियर दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि वह देश की दिग्गज खिलाड़ी मीराबाई चानू के बाद कम वजन वर्ग में भारत का एक नया और मजबूत चेहरा बनकर उभर रही हैं।

जीत के बाद खिलाड़ियों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं

अपनी इस बड़ी सफलता के बाद ज्ञानेश्वरी यादव ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह बेहद प्रसन्न हैं क्योंकि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था और उनका मुख्य उद्देश्य अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना था जिसे उन्होंने पूरी तरह निभाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल जीतने पर ज्ञानेश्वरी यादव को बहुत-बहुत बधाई। यह सफलता इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने इस प्रतियोगिता में अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। उनकी यह सफलता देश के युवाओं को प्रेरित करे।

सवाल-जवाब

ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कौन सा पदक जीता?
ज्ञानेश्वरी यादव ने वेटलिफ्टिंग के बावन किलोग्राम वर्ग में रजत पदक यानी सिल्वर मेडल हासिल किया।
ज्ञानेश्वरी यादव ने ग्लास्गो प्रतियोगिता में कुल कितना वजन उठाया?
उन्होंने स्नैच राउंड में अट्ठासी किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में एक सौ ग्यारह किलोग्राम भार उठाया।
ज्ञानेश्वरी यादव के करियर का बड़ा मोड़ कौन सा वर्ष माना जाता है?
वर्ष 2017 उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ जब उन्होंने दुर्ग में आयोजित राज्य स्तरीय इवेंट में पहला कांस्य पदक जीता था।
ज्ञानेश्वरी यादव का चयन प्रशिक्षण के लिए किस संस्थान में हुआ था?
वर्ष 2022 में जूनियर महिला वेटलिफ्टिंग में स्वर्ण जीतने के बाद उनका चयन पटियाला स्थित नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान की अकादमी के लिए हुआ था।
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