छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि शहर के कौरिनभाठा इलाके की रहने वाली ज्ञानेश्वरी यादव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में आयोजित प्रतिष्ठित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में उन्होंने अपने बेहतरीन खेल कौशल का प्रदर्शन किया है। इस कठिन और कड़ी स्पर्धा में उन्होंने दूसरा स्थान प्राप्त करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया है, जिससे पूरे देश में जश्न का माहौल है।
कड़ी स्पर्धा और संघर्ष भरा सफर
वेटलिफ्टिंग के इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्ण पदक हासिल करने के लिए खिलाड़ियों के बीच बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिला। ज्ञानेश्वरी ने इस बड़ी प्रतियोगिता के लिए दिन-रात कठिन परिश्रम किया था और अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। अंततः उनके इसी संघर्ष और समर्पण ने उन्हें रजत पदक तक पहुँचाया। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से उनके गृह नगर राजनांदगांव के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ और देश भर में खुशी की लहर दौड़ गई है।
साधारण पृष्ठभूमि और पिता का संघर्ष
ज्ञानेश्वरी यादव एक बेहद साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता दीपक यादव पेशे से एक इलेक्ट्रिशियन के रूप में काम करते हैं और उनकी माता गृहणी हैं। अपनी बिटिया की इस असाधारण सफलता से पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है। पिता दीपक यादव ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि ज्ञानेश्वरी ने इस मुकाम को हासिल करने के लिए बहुत संघर्ष किया है। परिवार ने अपनी सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद उन्हें हर संभव सुविधा मुहैया कराई और स्थानीय लोगों ने भी बेटी को पूरा सहयोग और आशीर्वाद दिया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले भी लहराया परचम
ज्ञानेश्वरी का खेल के मैदान में पुराना और शानदार ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। उन्होंने इससे पहले भी देश और विदेश में आयोजित कई बड़ी राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उन्होंने सामोआ में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। इसके अलावा, उन्होंने गुजरात में हुई एशियन चैंपियनशिप में हिस्सा लेते हुए ब्रोंज और सिल्वर मेडल दोनों ही अपने देश की झोली में डाले थे।
ओलंपिक खेलों में पदक जीतने का नया सपना
बेटी की इन लगातार सफलताओं के बाद अब उनके पिता दीपक यादव की निगाहें और भी बड़े लक्ष्य पर टिकी हैं। उनका सपना है कि ज्ञानेश्वरी आने वाले समय में ओलंपिक खेलों में देश के लिए पदक जीतें। उनका मानना है कि यदि समय पर सही और आवश्यक खेल सुविधाएँ मिलती रहें, तो उनकी बेटी निश्चित रूप से ओलंपिक में भी देश का नाम रोशन करेगी। इस बड़ी कामयाबी पर उनके कोच और जिले भर के खेल प्रेमियों ने उन्हें ढेरों बधाइयाँ दी हैं और उनकी यह सफलता आज की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा बन गई है।



















