ग्लास्गो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी प्रतियोगिता में भारतीय दल ने बुधवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया. भारतीय मुक्केबाजों ने अपने-अपने वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बनाते हुए पांच और पदक पक्के कर लिए. इस दमदार प्रदर्शन के दम पर भारत के कुल नौ मुक्केबाज अंतिम चार में पहुंच चुके हैं, जिससे देश का मुक्केबाजी में अब तक का सबसे बड़ा पदक भंडार पक्का हो गया है.
बर्मिंघम 2022 के रिकॉर्ड को छोड़ा पीछे
बुधवार को मिली पांच धमाकेदार सफलताओं के बाद राष्ट्रमंडल खेलों के रिंग में भारत के पदकों की संख्या नौ तक पहुंच गई है. इस उपलब्धि के साथ ही भारतीय मुक्केबाजी टीम ने बर्मिंघम 2022 के अपने पिछले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को पीछे छोड़ दिया है. बर्मिंघम खेलों में भारत ने तीन स्वर्ण, एक रजत और तीन कांस्य पदक सहित कुल सात पदक हासिल किए थे. इस बार प्रतियोगिता में पांच नए खिलाड़ियों के सेमीफाइनल में पहुंचने से पहले लवलीना बोरगोहेन (75 किलो), प्रिया घंघास (60 किलो), प्रीति पवार (54 किलो) और पुरुषों के 55 किलो वर्ग में जादूमणि सिंह पहले ही अपने पदक पक्के कर चुके थे. अब नौ मुक्केबाजों के अंतिम चार में पहुंचने से भारत का सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाजी अभियान दर्ज हो गया है.
साक्षी चौधरी और अरूंधति चौधरी की रिंग में रंगत
महिला वर्ग के 51 किलो भारवर्ग की स्पर्धा में 26 वर्षीय साक्षी चौधरी ने उत्तरी आयरलैंड की कैटलिन फ्रायर्स के खिलाफ मुकाबले में शुरुआत से ही अपना नियंत्रण बनाए रखा. साक्षी ने अपनी लंबी पहुंच का पूरा फायदा उठाते हुए विपक्षी खिलाड़ी को हावी होने का कोई मौका नहीं दिया और 5-0 से एकतरफा जीत दर्ज की. प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी ने लगातार आक्रामक रुख अपनाते हुए तेज पंच बरसाने की कोशिश की, लेकिन साक्षी ने बेहतरीन फुटवर्क और रिंग कौशल का परिचय देते हुए दूरी बनाए रखी. मुकाबला जीतने के बाद साक्षी ने बताया, "उसकी रणनीति करीब से आक्रमण करने की थी जबकि मैं लंबी रेंज से मुक्के लगा रही थी जो मेरी ताकत है." वहीं दूसरी ओर, महिला 70 किलो वर्ग के एक कड़े मुकाबले में अरूंधति चौधरी ने न्यूजीलैंड की मोर्गन हेंडरसन को 3-1 के विभाजित फैसले से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया.
सचिन सिवाच और अंकुश यादव का एकतरफा दबदबा
पुरुषों की 60 किलो स्पर्धा में पूर्व विश्व युवा चैम्पियन सचिन सिवाच ने बोत्स्वाना के ट्रेजर मोरेमी को सर्वसम्मति से 5-0 से पराजित किया और कम से कम कांस्य पदक सुरक्षित कर लिया. इसके साथ ही 80 किलो वर्ग में पिछले साल के विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स के रजत पदक विजेता अंकुश यादव ने सेशेल्स के जेड मिकोक को 5-0 से शिकस्त दी. अंकुश ने पहले ही दौर से अपने मजबूत डिफेंस और सटीक जवाबी हमलों से रिंग पर दबदबा बना लिया था. दूसरे दौर में भी उनका नियंत्रण जारी रहा, जिसके बाद जजों में से एक ने 30-26 और बाकी चार जजों ने 30-27 का स्कोर देकर अंकुश को सर्वसम्मति से विजेता घोषित किया.
नरेंदर बेरवाल का जुझारू पंच और 9वां मेडल
दिन के अंतिम मुकाबले में एशियाई खेलों के कांस्य पदक विजेता नरेंदर बेरवाल ने पुरुषों के 90 किलो से अधिक भारवर्ग के क्वार्टर फाइनल में समोआ के माइकल सेको को 3-2 के विभाजित फैसले से मात दी. इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में रेफरी ने बार-बार हस्तक्षेप किया और भारतीय मुक्केबाज के दो अंक काट लिए, लेकिन इसके बावजूद नरेंदर ने हिम्मत नहीं हारी. नरेंदर ने अपने घातक प्रहारों से सेको को दो बार 'स्टैंडिंग काउंट' के लिए मजबूर कर दिया. आखिरकार जजों ने 3-2 से नरेंदर के हक में फैसला सुनाया, जिससे वह बुधवार को सेमीफाइनल में जगह बनाने वाले पांचवें भारतीय मुक्केबाज बन गए.


















