अंतरराष्ट्रीय खेल जगत के सबसे बड़े मंच पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करना और तिरंगे का मान बढ़ाना किसी भी एथलीट का सबसे बड़ा सपना होता है। झारखंड के सिमडेगा जिले की रहने वाली 23 वर्षीय स्टार महिला हॉकी खिलाड़ी ब्यूटी डुंगडुंग का यही सपना अब साकार होने के बेहद करीब है। नीदरलैंड और बेल्जियम की संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने वाले आगामी महिला हॉकी वर्ल्ड कप के लिए ब्यूटी को भारतीय राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है। हालांकि खेल के इस शिखर तक पहुंचने की उनकी राह अपार पारिवारिक मुश्किलों और भावनात्मक चुनौतियों से भरी रही है। एक तरफ जहां वह भारत के लिए पहली बार वर्ल्ड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में खेलने की तैयारी कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पिता के अचानक निधन और मां की गंभीर बीमारी के कारण उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इन सभी विषम परिस्थितियों के बावजूद ब्यूटी ने अपनी मानसिक मजबूती और हॉकी के प्रति अपने जुनून को कभी कम नहीं होने दिया है।
पिता का मार्गदर्शन और 2023 की दर्दनाक दुर्घटना
ब्यूटी डुंगडुंग के हॉकी करियर की नींव रखने में उनके पिता अमरुष डुंगडुंग की बहुत बड़ी भूमिका थी। उन्होंने ही पहली बार ब्यूटी के हाथों में हॉकी स्टिक थमाई थी और उन्हें मैदान में उतरकर देश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया था। ब्यूटी के जीवन का सबसे कठिन दौर वर्ष 2023 में आया, जब वह एक गंभीर सर्जरी से उबरने की कोशिश कर रही थीं। इसी दौरान एक भीषण सड़क हादसे में उनके पिता अमरुष डुंगडुंग का असमय निधन हो गया। इस दुखद घटना ने न केवल ब्यूटी को अंदर से झकझोर कर रख दिया, बल्कि पूरे परिवार को अनिश्चितता के अंधकार में धकेल दिया। पिता के जाने के बाद ब्यूटी इतने गहरे सदमे में थीं कि कई दिनों तक उनका मन खेल में बिल्कुल नहीं लग पा रहा था। उनके सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया था कि क्या वह कभी दोबारा स्टिक थामकर मैदान पर उतर पाएंगी और अपने पिता के देखे गए सपनों को पूरा कर पाएंगी।
मां की गंभीर बीमारी और दूर रहकर अभ्यास करने की चुनौती
पिता के असमय चले जाने के बाद परिवार पर एक और बड़ा संकट आ खड़ा हुआ। ब्यूटी की मां पहले से ही लकवे की बीमारी से जूझ रही थीं, और पिता के निधन के बाद उनकी शारीरिक स्थिति अधिक चिंताजनक हो गई। ब्यूटी जब हाल ही में राष्ट्रीय शिविर से कुछ समय के लिए सिमडेगा स्थित अपने घर गई थीं, तब उनकी मां के स्वास्थ्य में कुछ सुधार नजर आ रहा था। लेकिन जैसे ही ब्यूटी बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में वापस लौटीं, उसके अगले ही दिन उन्हें घर से सूचना मिली कि मां की तबीयत फिर से काफी बिगड़ गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उनकी मां का ठीक से उठ पाना और चलना-फिरना भी बेहद मुश्किल हो गया है। राष्ट्रीय कैंप में ट्रेनिंग के दौरान भी ब्यूटी के मन में अपनी मां के स्वास्थ्य को लेकर लगातार चिंता बनी रहती है। ब्यूटी स्वीकार करती हैं कि अभ्यास के दौरान कई बार उनका ध्यान सिमडेगा में अपनी मां की हालत की तरफ चला जाता है, लेकिन वह खुद को मानसिक रूप से मजबूत करती हैं और यह याद दिलाती हैं कि इस समय राष्ट्रीय टीम के लिए बेहतर प्रदर्शन करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
पारिवारिक जिम्मेदारी और बेंगलुरु राष्ट्रीय शिविर का माहौल
ब्यूटी डुंगडुंग इस समय बेंगलुरु में आयोजित भारतीय महिला हॉकी टीम के राष्ट्रीय कैंप में गहन अभ्यास में जुटी हुई हैं। वहीं हजारों किलोमीटर दूर सिमडेगा में उनके बड़े भाई और उनका परिवार मां की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियों को संभाल रहा है। ब्यूटी के अनुसार भले ही उनके और घर के बीच बड़ी भौगोलिक दूरी है, फिर भी पारिवारिक परिस्थितियां अक्सर उनके विचारों पर हावी हो जाती हैं। हालांकि उन्होंने एक मजबूत एथलीट की तरह अपने ध्यान को नियंत्रित करना सीख लिया है। ब्यूटी का मानना है कि जैसे ही वह मैदान के अंदर कदम रखती हैं, उनका पूरा ध्यान केवल टीम की रणनीति, गेंद के मूवमेंट और खेल पर केंद्रित हो जाता है, ताकि वह अपने व्यक्तिगत दुखों को अपने राष्ट्रीय कर्तव्य के आड़े न आने दें।
वर्ल्ड कप का बड़ा मंच और चैंपियन बनने का दृढ़ संकल्प
इस महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में शुरू हो रहे महिला हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय टीम अपनी मजबूत चुनौती पेश करेगी। ब्यूटी डुंगडुंग के लिए यह टूर्नामेंट सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि अपने दिवंगत पिता के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने और अपनी विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करते हुए इतिहास रचने का एक स्वर्णिम अवसर है। ब्यूटी का स्पष्ट कहना है कि वह अपने घर की परिस्थितियों और स्वास्थ्य समस्याओं को अपने नियंत्रण में नहीं रख सकती हैं, लेकिन मैदान के अंदर अपने खेल और प्रदर्शन पर उनका पूरा नियंत्रण है। इसी सोच के साथ वह पूरी तरह से एकाग्र होकर अभ्यास कर रही हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य नीदरलैंड और बेल्जियम की धरती पर अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाना है और भारतीय महिला हॉकी टीम को विश्व कप की ट्रॉफी जिताकर देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करना है।



















