भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने अपने घरेलू मैदान पर शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर महाद्वीप में अपनी सर्वोच्चता साबित कर दी है। पंजाब की धरती पर आयोजित एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के खिताबी मुकाबले में भारत ने जापान को 4-1 के बड़े अंतर سے शिकस्त दी। इस शानदार जीत के साथ ही डिफेंडिंग चैंपियंस भारतीय टीम ने रिकॉर्ड छठी बार इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमा लिया है। मुकाबले की शुरुआत से ही भारतीय खिलाड़ियों ने तेज गति और आक्रामक रणनीति अपनाई, जिससे जापानी डिफेंस की एक न चली और टीम ने मुकाबले को अपने नाम कर लिया।
जापान की शुरुआती बढ़त के बाद शानदार वापसी
मुकाबले के शुरुआती क्षणों में जापान ने बढ़त बनाकर मुकाबला रोमांचक कर दिया था। मैच के तीसरे मिनट में काजुमासा मात्सुमोतो ने गोल दागकर जापान को 1-0 से आगे कर दिया, जिससे भारतीय खेमे पर शुरुआती दबाव बन गया। हालांकि, इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन नमूना पेश किया। मैच के 42वें मिनट में शिलानंद लाकड़ा ने स्कोर बराबर किया। इसके बाद 48वें मिनट में दिलप्रीत सिंह ने गोल कर बढ़त दिलाई। फिर 53वें मिनट में जुगराज सिंह और 54वें मिनट में विवेक सागर प्रसाद ने गोल दागकर जीत को पूरी तरह सुनिश्चित कर दिया। टूर्नामेंट के राउंड-रॉबिन लीग चरण में भी भारत ने इसी अंतर से जापान को मात दी थी।
क्रेग फुल्टन के मार्गदर्शन में अजेय सफर
मुख्य कोच क्रेग फुल्टन की देखरेख में उतरी भारतीय टीम पूरे टूर्नामेंट के दौरान एक भी मैच नहीं हारी और अजेय रहते हुए चैंपियन बनी। लीग चरण के अपने सभी पांचों मुकाबलों में टीम ने शानदार जीत दर्ज की थी। इसके बाद सेमीफाइनल मुकाबले में भारत ने दक्षिण कोरिया को 8-1 से बुरी तरह रौंदकर फाइनल का टिकट कटाया था। दूसरी ओर, जापान की टीम ने दूसरे सेमीफाइनल में मलेशिया के खिलाफ मैच ड्रॉ रहने के बाद पेनल्टी शूटआउट में 5-3 से जीत हासिल कर फाइनल में प्रवेश किया था।
हार्दिक सिंह का ऐतिहासिक और यादगार प्रदर्शन
अपने करियर का 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे उप-कप्तान हार्दिक सिंह ने मिडफील्ड की जिम्मेदारी बखूबी संभाली। उन्होंने डिफेंस और फॉरवर्ड लाइन के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाकर कई उपयोगी मौके बनाए। वहीं दूसरी ओर, जर्मनप्रीत सिंह ने रक्षापंक्ति में दीवार बनकर जापानी हमलों को नाकाम कर दिया। मैच के 20वें मिनट में जापान को लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन कप्तान राइकी फुजीशिमा के इन प्रयासों को भारतीय डिफेंस ने पूरी तरह से विफल कर दिया। पहले हाफ की समाप्ति तक भारत 0-1 से पीछे जरूर था, लेकिन टीम के हौसले बुलंद थे।
चौथे क्वार्टर में भारतीय आक्रमण का तूफान
हाफ टाइम के बाद भारतीय टीम पूरी तरह से बदले हुए इरादे के साथ मैदान पर उतरी। 33वें मिनट में मिले पहले पेनल्टी कॉर्नर को जापानी गोलकीपर किशो कुरोदा ने रोक लिया, जबकि 39वें मिनट में जापान को मिला पेनल्टी कॉर्नर भी बेकार चला गया। इसके बाद भारत ने हमले तेज किए और आदित्य अर्जुन लालागे के पास पर शिलानंद लाकरा ने रिबाउंड पर गोल कर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। चौथे क्वार्टर में भारतीय टीम ने पूरी तरह से शिकंजा कस लिया। 48वें मिनट में हार्दिक सिंह के मूव पर दिलप्रीत सिंह ने रिवर्स हिट से गोल कर बढ़त 2-1 कर दी। इसके बाद जुगराज सिंह ने ड्रैग-फ्लिक से स्कोर 3-1 पहुंचाया और विवेक सागर प्रसाद ने सर्कल के टॉप से जोरदार हिट लगाकर स्कोर 4-1 कर दिया। अंत में जापान का आखिरी प्रयास भी नाकाम रहा और भारत ने स्वर्ण पदक जीत लिया।



















