हिमाचल में ग्राम पंचायत स्तर पर होगी बंदरों की गणना, सुक्खू सरकार ने वन्यजीव विंग से मांगा पूरा ब्यौरामूलांक 7 राशिफल 26 अक्टूबर 2026: वाद-विवाद से बनाएं दूरी और काम में बरतें धीरजमहर्षि वाल्मीकि जयंती पर राहुल गांधी ने दी बधाई, आदिकवि के विचारों को बताया प्रेरणास्रोतमूलांक 8 राशिफल 26 अक्टूबर 2026: धीमी रहेगी काम की रफ्तार, फैसलों में जल्दबाजी से बचेंउत्तर प्रदेश में योगी को रोकने के लिए ओवैसी ने सपा और कांग्रेस को दिया साथ आने का न्योताएनटीए ने जारी किया जेईई मेन 2027 का विस्तृत पाठ्यक्रम, तीनों विषयों की 54 यूनिट्स से तय होगी परीक्षा की दिशामाउंट आबू यात्रा के दौरान हनुमान भक्तों के लिए ये पांच स्थान हैं बेहद खासओबीसी क्रीमी लेयर पर अदालती उलझन से थमी नए आईएएस अफसरों की ट्रेनिंग, पुरानी भर्तियों पर भी संकट के बादलशिमला में पूर्व एसपी संजीव गांधी पर वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर दूसरी एफआईआर दर्जमूलांक 9 अंकज्योतिष 26 अक्टूबर 2026: पराक्रम से पूरे होंगे अटके काम, संयम से सुलझेंगे रिश्ते
जापान में मोना अग्रवाल का कमाल, दो स्वर्ण पदक और नए विश्व कीर्तिमान के साथ रचा इतिहासखेल
26 अक्तू॰ 2026, 7:45 am (2 घंटे पहले)· 3

जापान में मोना अग्रवाल का कमाल, दो स्वर्ण पदक और नए विश्व कीर्तिमान के साथ रचा इतिहास

राजस्थान की पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल ने पांचवें एशियन पैरा शूटिंग गेम्स में दो स्वर्ण पदक जीते और 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में नया विश्व रिकॉर्ड बनाया।

अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर भारतीय पैरा निशानेबाजी ने एक नया मुकाम हासिल किया है। जापान की धरती पर आयोजित पांचवें एशियन पैरा शूटिंग गेम्स में भारतीय निशानेबाज मोना अग्रवाल ने असाधारण कौशल का मुजाहिरा करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इस शानदार अभियान के दौरान उन्होंने न केवल शीर्ष स्थान पाया, बल्कि 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन स्पर्धा में नया विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भी एशियन रिकॉर्ड के साथ पहला स्थान हासिल किया। राजस्थान से ताल्लुक रखने वाली इस निशानेबाज की इस दोहरी स्वर्णिम सफलता से खेल जगत में उत्सव का माहौल है।

पांच साल का सफर और वैश्विक कीर्तिमान

मोना अग्रवाल की निशानेबाजी यात्रा की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी। महज पांच वर्षों की इस छोटी सी अवधि में उन्होंने बुनियादी स्तर से उठकर वैश्विक रिकॉर्ड बुक तक का सफर तय कर लिया। खेल में प्रवेश करने के बाद से ही उन्होंने अपने अभ्यास, अनुशासन और तकनीक पर कड़ा ध्यान दिया। आम तौर पर निशानेबाजी जैसे तकनीकी खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिपक्व होने में लंबा वक्त लगता है, परंतु उन्होंने लगातार सुधार करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित किया।

ये भी पढ़ें

जापान में संपन्न हुई प्रतियोगिता में मोना ने दो अलग-अलग प्रारूपों में अपनी सर्वोच्च क्षमता साबित की। 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में उन्होंने सटीक निशाने लगाते हुए एशियन रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। इसके तुरंत बाद, 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन स्पर्धा में उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी या सुधार करते हुए एक और स्वर्ण पदक हासिल किया। थ्री पोजीशन स्पर्धा में निशानेबाज को प्रोन, नीलिंग और स्टैंडिंग स्थितियों में निशाना साधना होता है, जिसमें शारीरिक संतुलन और मानसिक एकाग्रता की कड़ी परीक्षा होती है।

पेरिस पैरालंपिक से जापान तक का निरंतर प्रदर्शन

मोना अग्रवाल की यह स्वर्णिम उपलब्धि कोई अचानक मिला परिणाम नहीं है, बल्कि यह उनकी निरंतर बढ़ती फॉर्म की अगली कड़ी है। वर्ष 2024 में आयोजित पेरिस पैरालंपिक में उन्होंने भारत के लिए कांस्य पदक जीतकर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाई थी। पेरिस के उस पदक ने उनके आत्मविश्वास को मजबूती दी और उन्होंने अपने खेल को और अधिक तराशना जारी रखा।

पैरालंपिक के बाद के सफर में उन्होंने बड़े टूर्नामेंटों में अपनी लय बनाए रखी। पांचवें एशियन पैरा शूटिंग गेम्स में दो अलग-अलग स्पर्धाओं में स्वर्ण जीतना और साथ में महाद्वीपीय व विश्व रिकॉर्ड दर्ज करना यह रेखांकित करता है कि वह दबाव के क्षणों में भी शांत रहकर सटीक निशाना लगाने में माहिर हैं। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने खेल में जो ऊंचाई हासिल की है, वह भारतीय पैरा एथलीटों के लिए एक मजबूत मिसाल बनकर उभरी है।

कोच योगेश शेखावत का तकनीकी मार्गदर्शन और तैयारी

इस ऐतिहासिक सफलता की नींव में खिलाड़ी के कठिन परिश्रम के साथ-साथ उनके कोच योगेश शेखावत का तकनीकी मार्गदर्शन भी शामिल रहा है। निशानेबाजी जैसे संवेदनशील खेल में एक मिलीमीट्री चूक भी पदक की दौड़ से बाहर कर सकती है। इस खेल में खिलाड़ी की सांस लेने की लय, शारीरिक संतुलन, ट्रिगर पर नियंत्रण और एकाग्रता बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।

कोच योगेश शेखावत ने मोना की क्षमताओं को निखारने के लिए विशेष प्रशिक्षण तकनीकों का सहारा लिया। अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के दौरान आने वाले मानसिक दबाव को संभालने और हर एक शॉट में एकसमान निरंतरता बनाए रखने के लिए अभ्यास सत्रों में खास ध्यान दिया गया। खिलाड़ी के अटूट समर्पण और कोच की रणनीतिक योजना के इस समन्वय ने मोना को पोडियम के शीर्ष तक पहुंचाया।

अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित खिलाड़ी की नई प्रेरणा

खेलों में असाधारण योगदान और उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए मोना अग्रवाल को भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। पेरिस पैरालंपिक 2024 में जीता गया कांस्य पदक और अब जापान में पांचवें एशियन पैरा शूटिंग गेम्स में दो स्वर्ण पदक उनकी खेल यात्रा के सबसे प्रमुख मील के पत्थर हैं।

उनकी यह उपलब्धि न केवल पैरा खेलों के प्रति समाज का नजरिया बदलने में मदद करती है, बल्कि उन तमाम उभरते खिलाड़ियों के लिए भी एक बड़ा प्रोत्साहन है जो कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। वर्ष 2021 में राइफल थामने से लेकर 2026 तक विश्व रिकॉर्ड कायम करने की यह कहानी साबित करती है कि यदि स्पष्ट लक्ष्य, उचित मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास हों, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

सवाल-जवाब

मोना अग्रवाल ने पांचवें एशियन पैरा शूटिंग गेम्स में कौन-कौन से पदक जीते हैं?
मोना अग्रवाल ने पांचवें एशियन पैरा शूटिंग गेम्स में दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं।
मोना अग्रवाल ने किन स्पर्धाओं में रिकॉर्ड बनाए हैं?
उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में एशियन रिकॉर्ड बनाया और 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया।
पांचवें एशियन पैरा शूटिंग गेम्स का आयोजन किस देश में हुआ था?
इस प्रतियोगिता का आयोजन जापान में किया गया था।
मोना अग्रवाल ने अपने निशानेबाजी करियर की शुरुआत किस वर्ष की थी?
उन्होंने अपने शूटिंग करियर की शुरुआत वर्ष 2021 में की थी।
मोना अग्रवाल ने 2024 के पेरिस पैरालंपिक में कौन सा पदक जीता था?
उन्होंने 2024 के पेरिस पैरालंपिक में भारत के लिए कांस्य पदक जीता था।
मोना अग्रवाल के कोच कौन हैं?
मोना अग्रवाल के कोच योगेश शेखावत हैं, जिन्होंने उनके तकनीकी और मानसिक प्रशिक्षण में अहम भूमिका निभाई है।
खेलों में उल्लेखनीय योगदान के लिए मोना अग्रवाल को किस सम्मान से नवाजा जा चुका है?
उन्हें भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp