अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर भारतीय पैरा निशानेबाजी ने एक नया मुकाम हासिल किया है। जापान की धरती पर आयोजित पांचवें एशियन पैरा शूटिंग गेम्स में भारतीय निशानेबाज मोना अग्रवाल ने असाधारण कौशल का मुजाहिरा करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इस शानदार अभियान के दौरान उन्होंने न केवल शीर्ष स्थान पाया, बल्कि 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन स्पर्धा में नया विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भी एशियन रिकॉर्ड के साथ पहला स्थान हासिल किया। राजस्थान से ताल्लुक रखने वाली इस निशानेबाज की इस दोहरी स्वर्णिम सफलता से खेल जगत में उत्सव का माहौल है।
पांच साल का सफर और वैश्विक कीर्तिमान
मोना अग्रवाल की निशानेबाजी यात्रा की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी। महज पांच वर्षों की इस छोटी सी अवधि में उन्होंने बुनियादी स्तर से उठकर वैश्विक रिकॉर्ड बुक तक का सफर तय कर लिया। खेल में प्रवेश करने के बाद से ही उन्होंने अपने अभ्यास, अनुशासन और तकनीक पर कड़ा ध्यान दिया। आम तौर पर निशानेबाजी जैसे तकनीकी खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिपक्व होने में लंबा वक्त लगता है, परंतु उन्होंने लगातार सुधार करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित किया।
जापान में संपन्न हुई प्रतियोगिता में मोना ने दो अलग-अलग प्रारूपों में अपनी सर्वोच्च क्षमता साबित की। 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में उन्होंने सटीक निशाने लगाते हुए एशियन रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। इसके तुरंत बाद, 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन स्पर्धा में उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी या सुधार करते हुए एक और स्वर्ण पदक हासिल किया। थ्री पोजीशन स्पर्धा में निशानेबाज को प्रोन, नीलिंग और स्टैंडिंग स्थितियों में निशाना साधना होता है, जिसमें शारीरिक संतुलन और मानसिक एकाग्रता की कड़ी परीक्षा होती है।
पेरिस पैरालंपिक से जापान तक का निरंतर प्रदर्शन
मोना अग्रवाल की यह स्वर्णिम उपलब्धि कोई अचानक मिला परिणाम नहीं है, बल्कि यह उनकी निरंतर बढ़ती फॉर्म की अगली कड़ी है। वर्ष 2024 में आयोजित पेरिस पैरालंपिक में उन्होंने भारत के लिए कांस्य पदक जीतकर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाई थी। पेरिस के उस पदक ने उनके आत्मविश्वास को मजबूती दी और उन्होंने अपने खेल को और अधिक तराशना जारी रखा।
पैरालंपिक के बाद के सफर में उन्होंने बड़े टूर्नामेंटों में अपनी लय बनाए रखी। पांचवें एशियन पैरा शूटिंग गेम्स में दो अलग-अलग स्पर्धाओं में स्वर्ण जीतना और साथ में महाद्वीपीय व विश्व रिकॉर्ड दर्ज करना यह रेखांकित करता है कि वह दबाव के क्षणों में भी शांत रहकर सटीक निशाना लगाने में माहिर हैं। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने खेल में जो ऊंचाई हासिल की है, वह भारतीय पैरा एथलीटों के लिए एक मजबूत मिसाल बनकर उभरी है।
कोच योगेश शेखावत का तकनीकी मार्गदर्शन और तैयारी
इस ऐतिहासिक सफलता की नींव में खिलाड़ी के कठिन परिश्रम के साथ-साथ उनके कोच योगेश शेखावत का तकनीकी मार्गदर्शन भी शामिल रहा है। निशानेबाजी जैसे संवेदनशील खेल में एक मिलीमीट्री चूक भी पदक की दौड़ से बाहर कर सकती है। इस खेल में खिलाड़ी की सांस लेने की लय, शारीरिक संतुलन, ट्रिगर पर नियंत्रण और एकाग्रता बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।
कोच योगेश शेखावत ने मोना की क्षमताओं को निखारने के लिए विशेष प्रशिक्षण तकनीकों का सहारा लिया। अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के दौरान आने वाले मानसिक दबाव को संभालने और हर एक शॉट में एकसमान निरंतरता बनाए रखने के लिए अभ्यास सत्रों में खास ध्यान दिया गया। खिलाड़ी के अटूट समर्पण और कोच की रणनीतिक योजना के इस समन्वय ने मोना को पोडियम के शीर्ष तक पहुंचाया।
अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित खिलाड़ी की नई प्रेरणा
खेलों में असाधारण योगदान और उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए मोना अग्रवाल को भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। पेरिस पैरालंपिक 2024 में जीता गया कांस्य पदक और अब जापान में पांचवें एशियन पैरा शूटिंग गेम्स में दो स्वर्ण पदक उनकी खेल यात्रा के सबसे प्रमुख मील के पत्थर हैं।
उनकी यह उपलब्धि न केवल पैरा खेलों के प्रति समाज का नजरिया बदलने में मदद करती है, बल्कि उन तमाम उभरते खिलाड़ियों के लिए भी एक बड़ा प्रोत्साहन है जो कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। वर्ष 2021 में राइफल थामने से लेकर 2026 तक विश्व रिकॉर्ड कायम करने की यह कहानी साबित करती है कि यदि स्पष्ट लक्ष्य, उचित मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास हों, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।



















