राजस्थान के प्रसिद्ध हिल स्टेशन माउंट आबू की यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए रास्ते में कई धार्मिक स्थल आते हैं। आबूरोड से माउंट आबू की चढ़ाई शुरू करते ही सबसे पहले आरना गांव का हनुमान मंदिर नजर आता है। इस पावन स्थल को आरना हनुमान या बालेश्वर हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है और यह पहाड़ी मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। सड़क मार्ग से सफर करने वाले तमाम लोग यहां कुछ पल ठहरकर संकटमोचन के दर्शन करते हैं ताकि उनकी आगे की यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे। इस प्राचीन मंदिर में भगवान को गुड़ और चने का भोग अर्पित करने की गहरी परंपरा चली आ रही है। ऐसी गहरी मान्यता है कि यहां मत्था टेकने से पूरा सफर बिना किसी बाधा के संपन्न होता है।
चम्पेश्वर हनुमान मंदिर की प्राकृतिक सुंदरता
पहाड़ी रास्ते से थोड़ा आगे बढ़ने पर सनी गांव के पास चम्पेश्वर हनुमान मंदिर स्थित है जो स्थानीय निवासियों और आसपास के इलाकों के लोगों की अटूट आस्था से जुड़ा है। यह पूरा परिसर चारों तरफ फैली प्राकृतिक हरियाली के बीच स्थित है जो इसे बेहद शांत और मनमोहक बनाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित प्रतिमा है जिसके बारे में कहा जाता है कि यह अपने आप प्रकट हुई थी। पुरानी लोक मान्यताओं के अनुसार बीते समय में यहां घने चंपा के पेड़ों और गुफाओं के बीच बजरंगबली की यह मूर्ति प्राप्त हुई थी जिसके बाद से यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया।
ज्ञान गुफा एवं ज्ञानेश्वर हनुमान मंदिर की भव्यता
देलवाड़ा क्षेत्र में स्थित ज्ञान गुफा एवं ज्ञानेश्वर हनुमान मंदिर अपनी विशाल वास्तुकला और भव्य मूर्तिकला के कारण विशिष्ट स्थान रखता है। इस परिसर का सबसे बड़ा आकर्षण हनुमान जी की लगभग 21 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा है जिसमें वे हाथों में मंजीरे थामे प्रभु श्रीराम की भक्ति में पूरी तरह लीन दिखाई देते हैं। श्रद्धालुओं के बीच ऐसी जानकारी है कि इस पावन मंदिर की स्थापना वर्ष 1965 में की गई थी। इस पूरे परिसर के भीतर संगमरमर से निर्मित भव्य मंदिर, भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और बजरंगबली की सुंदर मूर्तियां तथा मुख्य प्रवेश द्वार पर उकेरे गए नक्काशीदार हाथी इसकी उत्कृष्ट शिल्पकला का परिचय देते हैं। ज्ञान गुफा के ऐतिहासिक महत्व के बारे में कहा जाता है कि प्राचीन काल में यहां साधु-संत एकांत में बैठकर तपस्या और साधना किया करते थे।
वनवासी हनुमान मंदिर और गौमुख क्षेत्र
माउंट आबू के गौमुख क्षेत्र में बना वनवासी हनुमान मंदिर इस पूरे मार्ग का प्रवेश द्वार माना जाता है। इस स्थान की विशेषता यह है कि पर्यटक और भक्त महर्षि वशिष्ठ आश्रम तथा गौमुख कुंड की कठिन यात्रा शुरू करने से पहले यहीं पर रुककर आशीर्वाद लेते हैं। वनवासी हनुमान मंदिर से ही गौमुख मंदिर तक जाने वाली सीढ़ियों का रास्ता शुरू होता है। इस पूरे इलाके में चारों तरफ घना जंगल फैला हुआ है जिसके कारण इसे वनवासी हनुमान मंदिर के नाम से पुकारा जाता है।
टेकरी वाले हनुमान मंदिर की मान्यता
माउंट आबू की तलहटी यानी आबूरोड क्षेत्र में एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित हनुमान टेकरी मंदिर भी अत्यंत प्रसिद्ध है जिसे लोग टेकरी वाले हनुमान मंदिर के रूप में जानते हैं। गुजरात की ओर से माउंट आबू बायपास के रास्ते आने वाले यात्री इस मंदिर में दर्शन करने के पश्चात ही अपनी आगे की यात्रा बढ़ाते हैं। इस स्थान से जुड़ी खास मान्यता यह है कि लगातार 5 मंगलवार तक यहां व्रत रखकर पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।



















