झुंझुनूं जिले का ऐतिहासिक कस्बा मंडावा हमेशा से अपनी खूबसूरत हवेलियों और सैलानियों की चहल-पहल के लिए मशहूर रहा है, लेकिन इन दिनों यहां के युवाओं में एक अलग ही बौद्धिक खेल का जुनून देखने को मिल रहा है। कस्बे में राजाओं और बुजुर्गों की पुरानी चौपालों तक सीमित रहने वाले शतरंज के खेल को अब नई पीढ़ी ने अपने भविष्य की दिशा बना लिया है। स्थानीय स्तर पर छह साल पहले केवल तीन शौकिया सदस्यों के साथ रखी गई एक छोटी सी पहल आज लगभग 300 सक्रिय शतरंज खिलाड़ियों के बड़े केंद्र में तब्दील हो चुकी है। इस निरंतर अभ्यास और लगन का सबसे सुखद परिणाम यह सामने आया है कि पहली दफा इस कस्बे के नौ होनहार खिलाड़ी राज्य स्तर की आधिकारिक शतरंज प्रतियोगिता में उतरने जा रहे हैं।
चौपालों की पुरानी परंपरा से निकली खेल की चिंगारी
मंडावा के इतिहास में चौसठ खानों की इस बिसात का लगाव कोई हालिया बात नहीं है। दशकों पहले यहां के प्रतिष्ठित बुजुर्ग फुर्सत के पलों में इस बौद्धिक खेल की गहरी चालों में घंटों डूबे रहते थे। उस दौर में पूर्व चेयरमैन पंडित लादूराम मिश्रा, रतनलाल मिश्रा, कस्तूरी लाल मिश्रा और ओमप्रकाश सोनी जैसे दिग्गजों की चौसर पर जमी बैठकों को कस्बे के लोग बड़ी उत्सुकता से घेरे रहते थे। इसी कड़ी में रामेश्वर चौहान, शिवचंद्र पीपलवा, पुरुषोत्तम पीपलवा और चिरंजीलाल तोलासरिया जैसे नाम भी शामिल रहे, जिन्होंने कस्बे में इस खेल की जीवंत संस्कृति को कभी थमने नहीं दिया। इन्हीं बुजुर्ग खिलाड़ियों की बौद्धिक समझ और जटिल चालों ने आने वाली पीढ़ियों के मन में खेल के प्रति उत्सुकता का मजबूत बीज बोया था।
कोलकाता से वापसी और क्लब की आधिकारिक शुरुआत
इस अनौपचारिक शौक को संस्थागत रूप देने की मुहिम तब शुरू हुई जब मंडावा के निवासी केशरदेव टेलर कोलकाता से अपनी सेवानिवृत्ति पूरी कर वापस अपनी मिट्टी में लौटे। उन्होंने कस्बे में बच्चों को स्क्रीन और खाली समय से हटाकर शतरंज के अनुशासन में ढालने का मन बनाया। उनके इस विचार को गोपाल सिंह चौहान की प्रेरणा और कस्बे के कई अन्य खेल प्रेमियों का सक्रिय साथ मिला। नतीजतन 2 फरवरी 2020 को मंडावा चेस क्लब की नींव रखी गई। शुरुआत में इस मंच से केवल तीन उत्साही बच्चे जुड़े थे, लेकिन देखते ही देखते यह दायरा फैलता चला गया। आज इसी क्लब में करीब 300 खिलाड़ी नियमित तौर पर जुटते हैं, जहां कस्बे के वरिष्ठ खिलाड़ी बच्चों को खेल की बारीकियों, ओपनिंग थ्योरी और एंडगेम की रणनीति सिखाते हैं।
रतनलाल मिश्रा की राज्य स्तरीय सफलताओं से मिली प्रेरणा
कस्बे में खेल की इस मजबूत नींव के पीछे एक और बड़ा प्रेरणादायक नाम पूर्व सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी तथा पूर्व डिप्टी डायरेक्टर रतनलाल मिश्रा का रहा है। वे अपने समय में राजस्थान के सबसे अव्वल दर्जे के शतरंज खिलाड़ियों में गिने जाते थे। उन्होंने वर्ष 1972 में जयपुर और वर्ष 1973 में जोधपुर में आयोजित बड़े टूर्नामेंटों में पूरे राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया था। इन दोनों ही आयोजनों में वे प्रदेश स्तर पर पहले पायदान पर रहे थे। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने कस्बे के लोगों को यह भरोसा दिलाया था कि मंडावा जैसे छोटे कस्बे से निकलकर भी शतरंज के बड़े फलक पर शीर्ष स्थान हासिल किया जा सकता है।
सालाना प्रतियोगिताएं और पंद्रह सदस्यों की संचालन समिति
वर्तमान में क्लब की पूरी व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए 15 सदस्यीय समर्पित कमेटी जिम्मेदारी संभाल रही है। इसमें संस्था प्रधान बाबूलाल कुमावत, सचिव ज्ञानप्रकाश गोयनका और संरक्षक के रूप में केशरदेव टेलर खुद मौजूद रहकर प्रशिक्षण का माहौल तैयार करते हैं। कस्बे के तोलासरिया परिवार की सहायता से सेठ चिरंजीलाल तोलासरिया की स्मृति में प्रतिवर्ष एक भव्य राज्य स्तरीय टूर्नामेंट आयोजित किया जाता है। इस आयोजन में अंडर-14 तथा अंडर-19 वर्ग के प्रतिभाशाली बच्चे भाग लेते हैं, जिन्हें प्रोत्साहन के रूप में स्मृति चिह्न, नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाते हैं।
विभिन्न जिलों में पांच ट्रॉफियां जीतकर गाड़े झंडे
मंडावा के ये युवा खिलाड़ी अब तक चूरू, जयपुर, कोटा और उदयपुर जैसे कई शहरों में जाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। अलग-अलग शहरों में आयोजित कठिन मुकाबलों के दौरान क्लब के खिलाड़ियों ने पांच बार विजेता ट्रॉफी पर कब्जा जमाकर कस्बे का गौरव बढ़ाया है। विभिन्न जिलों में मिली इन लगातार सफलताओं के बाद अब नौ खिलाड़ियों का एक साथ राज्य स्तरीय स्तर पर चुना जाना कस्बे के खेल इतिहास का सबसे सुनहरा अध्याय बन गया है।



















