राजस्थान के विभिन्न अंचलों में नवंबर की शुरुआत होते ही वायुमंडलीय परिस्थितियों में उल्लेखनीय परिवर्तन दर्ज किया जा रहा है। मानसून तथा उत्तर-पश्चिमी हलचलों के शांत पड़ने के उपरांत समूचे राज्य में वर्षा का सिलसिला पूरी तरह थम चुका है। मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा 2 नवंबर को जारी किए गए आधिकारिक बुलेटिन के आधार पर 3 नवंबर 2026 को प्रदेश के किसी भी भूभाग में मेघ गर्जन अथवा वर्षा होने का कोई संकेत नहीं है। वातावरण पूरी तरह स्थिर हो चुका है, जिसके चलते मंगलवार के दिन राज्य के सभी जिलों में शुष्क परिस्थितियां प्रभावी रहेंगी। मौसम वैज्ञानिकों ने किसी भी क्षेत्र के लिए कोई चेतावनी या प्रतिकूल मौसम का संकेत जारी नहीं किया है, जिससे खुले आसमान के बीच लोगों को राहत का अनुभव होगा।
सप्ताह भर शुष्क परिस्थितियों का दौर
मौसम विश्लेषण के अनुसार, राज्य के ऊपर इस समय वर्षा प्रेरित करने वाला कोई नया चक्रवाती घेरा अथवा वायुमंडलीय तंत्र क्रियाशील नहीं है। आगामी एक सप्ताह तक राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में हवा का रुख शांत और मौसम शुष्क बना रहने की प्रबल संभावना व्यक्त की गई है। बादलों की अनुपस्थिति और साफ धूप के कारण दिन के समय दृश्यता उत्तम रहेगी, जबकि सूर्यास्त के बाद विकिरण शीतलन के प्रभाव से वातावरण में सिहरन पैदा होगी। विशेष रूप से भोर तथा देर रात के समय हवाओं में ठंडक का अहसास लगातार बढ़ता हुआ देखा जाएगा।
पूर्वी अंचल के जनपदों की स्थिति
पूर्वी राजस्थान के विस्तृत मैदानी और पठारी हिस्सों में मंगलवार को खिली धूप के साथ मौसम पूरी तरह साफ रहने का आकलन किया गया है। संभागीय मुख्यालयों जयपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर के अधीन आने वाले किसी भी जिले में वर्षा के आसार नहीं हैं। अजमेर, जयपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, टोंक, सीकर और झुंझुनूं जिलों में आकाश एकदम स्वच्छ रहेगा। इसके साथ ही हाड़ौती अंचल के कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ तथा मेवाड़ व वागड़ क्षेत्र के भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ में भी वातावरण में नमी बेहद कम रहेगी। हाल ही में गठित नवीन प्रशासनिक क्षेत्रों डीग, ब्यावर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़ और सलूम्बर में भी किसी प्रकार की मौसमी हलचल या वर्षा का पूर्वानुमान नहीं है।
रेगिस्तानी और पश्चिमी जिलों का हाल
थार मरुस्थल से आच्छादित पश्चिमी राजस्थान के सभी क्षेत्रों में भी बादलों का जमावड़ा पूरी तरह बिखर चुका है। बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर और श्रीगंगानगर जनपदों में 3 नवंबर को शुष्क धरातलीय परिस्थितियां हावी रहेंगी। इसके अतिरिक्त हनुमानगढ़, चूरू, नागौर, पाली, जालौर, फलौदी, बालोतरा और डीडवाना-कुचामन के क्षेत्रों में भी वर्षा का कोई अंदेशा नहीं जताया गया है। पश्चिमी इलाकों में नवंबर मास के प्रारंभ के साथ ही दिन और रात के पारे में अंतर बढ़ने लगता है। दिन के समय खिली हुई तेज धूप देखने को मिलेगी, वहीं रात्रि के समय तापमान में गिरावट आने से लोगों को गुलाबी सर्दी का अनुभव होगा। मौसम विभाग ने पश्चिमी जिलों में आंधी, धूल भरी हवाओं अथवा बादलों की गरज-चमक के संबंध में कोई चेतावनी जारी नहीं की है।
शीत ऋतु के क्रमिक आगमन के संकेत
आगामी सात दिनों के मौसम चक्र को देखें तो पूरे राजस्थान में मौसमी स्थिरता बनी रहने के ठोस प्रमाण मिल रहे हैं। वर्षा का कोई बड़ा दौर फिलहाल निकट भविष्य में दिखाई नहीं दे रहा है। दोनों प्रमुख भौगोलिक अंचलों पूर्वी तथा पश्चिमी राजस्थान में शुष्क हवाएं प्रभावी रहेंगी। साफ आसमान के कारण रात्रि के समय धरती तेजी से ठंडी होगी, जिससे सुबह के समय हल्की सिहरन महसूस होगी। हालांकि आने वाले दिनों में पारा कितने पायदान नीचे गिरेगा और किन विशिष्ट जिलों में न्यूनतम तापमान सबसे कम रिकॉर्ड किया जाएगा, इस विषय पर बुलेटिन में कोई पृथक जिलावार विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
प्रमुख नगरों का स्थानीय वातावरण
राज्य के बड़े शहरी केंद्रों की बात करें तो प्रांतीय राजधानी जयपुर में 3 नवंबर को वर्षा का नामोनिशान नहीं रहेगा और मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहेगा। सूर्योदय और देर रात के वक्त हल्की ठंड महसूस की जा सकेगी। सूर्य नगरी जोधपुर में भी आकाश निर्मल रहेगा तथा वर्षा से संबंधित कोई अलर्ट प्रभावी नहीं है। झीलों की नगरी उदयपुर में मंगलवार को वातावरण पूरी तरह शांत और शुष्क रहने की पुष्टि की गई है। शिक्षा नगरी कोटा में भी वर्षा या अंधड़ की कोई आशंका नहीं है और मौसम सामान्य रहेगा। उधर उत्तरी राजस्थान के बीकानेर में भी दिनभर मौसम पूरी तरह साफ रहने का अनुमान है, जहां किसी भी प्रकार की बारिश का योग नहीं बन रहा है।


















