आधुनिक खेल जगत में तकनीक की मौजूदगी अब सिर्फ फैसलों और अंपायरिंग तक सीमित नहीं रह गई है। क्रिकेट की बाईस गज की पिच पर जहां पहले केवल खिलाड़ियों का कौशल और पारंपरिक फिटनेस मायने रखती थी, वहीं अब अत्याधुनिक सेंसर और वियरेबल्स ने खिलाड़ियों की दैनिक ट्रेनिंग का रूप पूरी तरह बदल दिया है। हॉकआई, स्नीकोमीटर और थर्ड अंपायर जैसे साधन पहले से ही मैचों का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं, मगर अब व्यक्तिगत बायोमेट्रिक गैजेट्स सीधे खिलाड़ियों के शरीर से जुड़कर उनके प्रदर्शन को निखारने का काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान शुभमन गिल न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी एकदिवसीय श्रृंखला की तैयारियों के दौरान अपनी कनपटी पर एक अनोखा उपकरण लगाए हुए नजर आए हैं।
पीवी सिंधु के बाद क्रिकेट में पहुंची नई तकनीक
इस विशेष वियरेबल गैजेट का नाम 'टेंपल' है। इसे सबसे पहले भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु ने कोर्ट पर अपने अभ्यास के दौरान उपयोग में लाया था। अब बैडमिंटन के बाद क्रिकेट के गलियारों में भी इसका प्रवेश हो चुका है, जहां शुभमन गिल नेट सत्र में इसे पहने दिखाई दिए। इस तकनीकी नवाचार को ज़ोमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने विकसित किया है। यह उपकरण हाल के दिनों में पेशेवर एथलीटों के बीच तेजी से चर्चा बटोर रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि गिल की पहल के बाद आने वाले वक्त में कई अन्य भारतीय क्रिकेटर और विभिन्न खेलों के पेशेवर खिलाड़ी भी अपनी ट्रेनिंग का स्तर बेहतर करने के लिए इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
कनपटी पर लगने वाला सेंसर कैसे करता है काम
आकार में बेहद कॉम्पैक्ट दिखने वाले इस डिवाइस को सीधे सिर के पार्श्व हिस्से यानी कनपटी पर चिपकाया जाता है। इसका मुख्य कार्य मस्तिष्क में रक्त संचार और ऑक्सीजन के स्तर की वास्तविक समय में निगरानी करना है। तकनीकी रूप से यह उपकरण नियर-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक के सहारे काम करता है, जो दिमाग में ऑक्सीजन की सांद्रता को भांपकर मस्तिष्क के रक्त प्रवाह का सटीक अनुमान लगाती है।
दीपिंदर गोयल के अनुसार यह प्रणाली 1 से 250 के पैमाने पर एक लाइव स्कोर प्रदान करती है। इस रीडिंग में 1 का अंक गहन मानसिक विश्राम और शांति को दर्शाता है, जबकि 250 का स्तर किसी शीर्ष अंतरराष्ट्रीय एथलीट के चरम फोकस या 'पीक फ्लो' को प्रदर्शित करता है। फिलहाल यह उपकरण पूरी तरह प्रायोगिक चरण में है। इसे न तो अभी व्यावसायिक तौर पर आम बाजार में उतारा गया है और न ही इसे कोई मेडिकल प्रमाणीकरण हासिल हुआ है। भारत में इसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹72,000 से ₹80,000 के बीच बताई जा रही है, तथा साल 2026 के अंत से पहले इसके वितरण शुरू होने की संभावना जताई गई है।
क्रिकेटरों के किट का पहले से हिस्सा हैं अन्य जीपीएस वियरेबल्स
भारतीय क्रिकेट टीम में हाई-टेक गैजेट्स का प्रयोग नया नहीं है। मैच और अभ्यास के दौरान खिलाड़ियों की जर्सी के पीछे पीठ के ऊपरी हिस्से पर अक्सर एक उभार नजर आता है, जो दरअसल एक GPS परफॉर्मेंस ट्रैकर होता है। खिलाड़ी इसे अपनी जर्सी के नीचे एक विशेष कम्प्रेशन स्पोर्ट्स वेस्ट के पिछले पॉकेट में पहनते हैं।
यह जीपीएस सिस्टम सपोर्ट स्टाफ और कंडीशनिंग कोचों को दौड़ने की गति, तय की गई दूरी, तीव्रता और शारीरिक थकावट का वास्तविक डेटा मुहैया कराता है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की टेक्नोलॉजी फर्मों STATSports और Catapult के साथ साझेदारी करके इसे अपनी राष्ट्रीय संरचना में अनिवार्य कर रखा है। टेस्ट, वनडे, टी20 और आईपीएल के भारी भरकम कैलेंडर के बीच चोटों से बचने और वर्कलोड मैनेजमेंट को सुचारू बनाए रखने के लिए यह तकनीक लंबे समय से अनिवार्य भूमिका निभा रही है। अब 'टेंपल' जैसे न्यूरो-ट्रैकिंग डिवाइस के जुड़ने से खिलाड़ियों की मानसिक सतर्कता को भी तकनीकी रूप से मापना संभव हो रहा है।



















