फर्रुखाबाद के इस प्राचीन शिव मंदिर में एक साथ होते हैं बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, महाभारत काल से जुड़ा है गहरा इतिहासपुणे प्लांट में बनने लगी लैंड रोवर डिफेंडर, कीमतों में 34 लाख रुपये तक की भारी कटौतीसावन में बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम क्या है, एक गलती से बेकार हो सकती है पूजाक्विंस की मेरिनो वूल टी-शर्ट बाजार में क्यों मचा रही है धूमवियतनाम में आर्थिक रफ्तार 2027 तक रहेगी तेज, 11 फीसदी तक पहुंच सकती है विकास दरड्यून: पार्ट थ्री का फाइनल ट्रेलर रिलीज, पॉल अत्रेइदेस और चानी के बीच भयंकर टकराव की झलकयमन से मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद रियाद में धमाके, उधर होर्मुज में तेल टैंकर में लगी आगअमेरिकी डॉलर की मजबूती से टूटा यूरो, तकनीकी स्तर पर 1.1113 का अहम सपोर्ट क्षेत्र बेहद संवेदनशीलऐप्पल ने जारी किया iOS 27.2 अपडेट, सिरी एआई में नई भाषाएं और सुरक्षा पैच शामिलजीमेल और ड्राइव के डेटा से गूगल दिखा रहा विज्ञापन, ऐसे रोकें
जोधपुर की होनहार बेटियों की कहानी, एक पानी में दिखा रही दम तो दूसरी कराटे में बरसा रही पंचखेल
18 अग॰ 2026, 3:22 pm (70 दिन पहले)· 1

जोधपुर की होनहार बेटियों की कहानी, एक पानी में दिखा रही दम तो दूसरी कराटे में बरसा रही पंच

जोधपुर की दो सगी बहनों शिवांजना और मनुश्री ने अपनी खेल प्रतिभा से शहर का नाम रोशन किया है। बड़ी बहन शिवांजना तैराकी में 32 मेडल जीत चुकी हैं, जबकि छोटी बहन मनुश्री ने दिल्ली की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक समेत 15 मेडल अपने नाम किए हैं।

जोधपुर की पहचान सिर्फ नीले मकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की दो प्रतिभावान बेटियां अपने मजबूत इरादों से एक अलग इबारत लिख रही हैं। इन दोनों बहनों की सफलता सिर्फ पदकों की चमक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अटूट लगन, कड़े संघर्ष और आपसी प्रेरणा की एक जीवंत मिसाल है। दिल्ली पब्लिक स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने वाली बड़ी बहन शिवांजना जलक्रीड़ा यानी तैराकी की दुनिया में अपनी तेज रफ्तार से सफलता के नए आयाम गढ़ रही हैं। वहीं, उनकी छोटी बहन मनुश्री कराटे के मैदान पर अपने सटीक पंच और मजबूत आत्मविश्वास से लोहा मनवा रही हैं। दोनों का खेल भले ही अलग है, लेकिन उनका अंतिम उद्देश्य देश और अपने गृह नगर जोधपुर का मान वैश्विक पटल पर बढ़ाना है। इस मुकाम तक पहुंचने के सफर में उनके परिवार से मिले संस्कारों और निरंतर प्रोत्साहन का अहम योगदान रहा है।

तैराकी के मैदान पर बड़ी बहन का जलवा

परिवार में बड़ी बेटी के रूप में पहचान बनाने वाली शिवांजना ने तैराकी को अपने जीवन का मुख्य लक्ष्य बनाया है। वह अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अब तक कुल 32 मेडल हासिल कर चुकी हैं। राज्य स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में उनके प्रदर्शन ने सभी का ध्यान खींचा है और अब उनकी निगाहें राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों पर टिकी हैं। शिवांजना का दृष्टिकोण सिर्फ पदकों की संख्या तक सीमित नहीं है। उनका सपना ओलंपिक खेलों और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का है, ताकि वह देश का सिर गर्व से ऊंचा कर सकें। उनका स्पष्ट मानना है कि एक सच्चे खिलाड़ी को दूसरों की सफलताओं से अपनी तुलना करने के बजाय पूरी तरह से अपने खेल कौशल और तयशुदा लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

ये भी पढ़ें

कराटे में छोटी बहन का कमाल और दिल्ली में गोल्ड मेडल

अपनी बड़ी बहन से प्रेरणा लेकर कराटे की बारीकियां सीखने वाली मनुश्री ने इसे महज एक खेल न मानकर आत्मरक्षा का एक मजबूत जरिया बनाया है। अपनी मेहनत के बूते वह अब तक 15 मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। पिछले सप्ताह ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित एक बड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपना बेहतरीन हुनर दिखाते हुए मनुश्री ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। उनका अगला बड़ा लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना है। मनुश्री का विचार है कि आज के समय में हर लड़की के लिए आत्मरक्षा के गुर सीखना बेहद जरूरी है, क्योंकि माता-पिता हर परिस्थिति में ढाल बनकर साथ नहीं रह सकते। यही स्वतंत्र सोच और आत्मबल उन्हें हर दिन पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने की प्रेरणा देता है।

पारिवारिक संस्कारों से मिल रही है ऊंची उड़ान

जोधपुर के जाने-माने वरिष्ठ समाजसेवी स्व. धर्माराम चौधरी और स्व. पुखराज चौधरी इस दुनिया में भले ही मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा रोपे गए संस्कारों और समाज सेवा के बीज इस परिवार में साफ नजर आते हैं। उनकी पुत्रवधू मोनिका चौधरी समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़ी हैं और अब घर की दोनों बेटियां अपनी उपलब्धियों के बल पर परिवार की इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि दोनों बहनों के बीच किसी तरह की प्रतिद्वंद्विता या ईर्ष्या नहीं है, बल्कि वे एक-दूसरे को पछाड़ने के बजाय आगे बढ़ने में मदद करती हैं। जहां एक बहन पानी की लहरों को चीरकर अपनी पहचान बना रही है, वहीं दूसरी बहन कराटे के दांव-पेंच से अपनी ताकत साबित कर रही है। दोनों के सपने काफी ऊंचे हैं और पूरे परिवार को अटूट विश्वास है कि यही अनुशासन और मेहनत एक दिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक अवश्य ले जाएगी।

सवाल-जवाब

शिवांजना ने तैराकी में अब तक कितने मेडल जीते हैं?
शिवांजना तैराकी में शानदार प्रदर्शन करते हुए अब तक कुल 32 मेडल अपने नाम कर चुकी हैं।
मनुश्री ने हाल ही में स्वर्ण पदक कहां जीता है?
मनुश्री ने पिछले सप्ताह दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया है।
दोनों बहनें किस स्कूल में पढ़ती हैं?
दोनों बहनें जोधपुर के डीपीएस स्कूल में अध्ययन करती हैं।
मनुश्री ने कराटे किससे सीखा है?
मनुश्री ने कराटे अपनी बड़ी बहन शिवांजना से सीखा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp